नगर निगम की सख्त चेतावनी; तय समय पर जवाब नहीं मिलने पर लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई, शहर के विकास कार्यों में सुस्ती पर गरमाया निगम का माहौल

भागलपुर, वरीय संवाददाता: स्मार्ट सिटी भागलपुर के विकास कार्यों, नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह सख्त मूड में नजर आ रहा है। नगर निगम कार्यालय से एक बेहद सख्त और दो टूक चेतावनी जारी की गई है, जिसके तहत विभिन्न वार्डों में लंबित पड़ी योजनाओं, जनता की शिकायतों और प्रशासनिक पत्रों के जवाब तय समय सीमा के भीतर न देने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है। निगम प्रशासन के इस कड़े रुख से महकमे में हड़कंप मच गया है, और फाइलें दबाकर बैठने वाले लापरवाह अमले में भारी खलबली मची हुई है।

क्यों उठाया गया यह सख्त कदम? (पृष्ठभूमि और लापरवाही)

भागलपुर नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत इन दिनों कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं—जैसे नाला निर्माण, सड़क मरम्मत, स्ट्रीट लाइट दुरुस्तीकरण और कचरा उठाव प्रबंधन—चल रही हैं। इसके बावजूद आम नागरिकों द्वारा लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि उनके वार्डों की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है:

शिकायतों पर ठंडे बस्ते की नीति: जनता द्वारा वार्ड पार्षदों या सीधे निगम पोर्टल पर दर्ज कराई जाने वाली शिकायतों को जब संबंधित शाखा या अधिकारियों के पास अग्रसारित किया जाता था, तो उन पर महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती थी।

पत्रों का जवाब न देना: उच्च अधिकारियों या बोर्ड की बैठकों में तय किए गए एजेंडों और पत्रों पर जब स्पष्टीकरण या रिपोर्ट मांगी जाती थी, तो शाखा प्रभारियों द्वारा समय पर जवाब दाखिल नहीं किया जाता था। इस प्रशासनिक सुस्ती के कारण शहर के विकास कार्यों की गति कछुए की चाल से भी धीमी हो गई थी, जिससे शहरवासियों में आक्रोश व्याप्त था।

निगम प्रशासन का अल्टीमेटम: "अब नहीं चलेगी हीला-हवाली"

इन तमाम लापरवाहियों का संज्ञान लेते हुए नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब अनुशासनहीनता और प्रशासनिक शिथिलता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा:

नियत समय सीमा का कड़ाई से पालन: निगम प्रशासन की ओर से सभी शाखा प्रभारियों, अंचल निरीक्षकों, कनीय अभियंताओं (JEs) और अन्य संबंधित कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि उन्हें सौंपे गए कार्यों और पत्रों के जवाब एक निर्धारित समयावधि के भीतर देने होंगे।

कार्रवाई की सीधी चेतावनी: यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब या कार्य रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो इसे सीधे तौर पर 'कर्तव्य में लापरवाही' माना जाएगा और संबंधित दोषी कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई (डिपार्टमेंटल एक्शन) के साथ-साथ वेतन रोकने या स्पष्टीकरण मांगने जैसी कठोर अनुशासनात्मक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

शहर के विकास कार्यों में बाधा डालने वालों पर विशेष नजर

नगर निगम के इस निर्देश के बाद शहर के चारों आॅनबोर्ड जोनों और विभिन्न शाखाओं (जैसे राजस्व शाखा, निर्माण शाखा, स्वास्थ्य शाखा और जलकल विभाग) में हड़कंप मचा हुआ है:

जवाबदेही तय करने की कवायद: निगम का मानना है कि जब तक अधिकारियों और कर्मचारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही (Accountability) तय नहीं होगी, तब तक शहर को स्वच्छ, सुंदर और बुनियादी सुविधाओं से युक्त नहीं बनाया जा सकता है।

आम जनता को राहत की उम्मीद: इस प्रशासनिक सख्ती से यह उम्मीद बंध रही है कि अब नागरिकों की समस्याओं का समाधान तेजी से होगा और जो फाइलें महीनों तक धूल फांकती रहती थीं, उन पर अब त्वरित गति से मुहर लगेगी।

भागलपुर नगर निगम द्वारा जारी यह अल्टीमेटम प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक बेहद स्वागत योग्य और कड़ा कदम है। वर्षों से सुस्त पड़ी नगर निगम की कार्यशैली को यदि इस चेतावनी के जरिए गति मिलती है, तो इसका सीधा लाभ भागलपुर की आम जनता को मिलेगा। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन की इस सख्त चेतावनी का मैदानी स्तर पर कितना असर होता है और क्या वाकई लापरवाह कर्मियों की कार्यशैली में सुधार आता है या यह आदेश कागजों तक ही सिमट कर रह जाता है।