मुजफ्फरपुर: मीरगंज नगर पंचायत परिसर में संपत्ति कर के खिलाफ फूटा जनता का गुस्सा; प्रेमलाल महतो के नेतृत्व में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन, वक्ताओं ने जनता पर थोपे गए टैक्स को बताया अन्यायपूर्ण
मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत आने वाले मीरगंज नगर पंचायत क्षेत्र से स्थानीय नागरिकों और मजदूर वर्ग के बीच पनप रहे भारी आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मीरगंज नगर पंचायत परिसर में गुरुवार को स्थानीय प्रशासन द्वारा लागू किए जाने वाले संपत्ति कर (Property Tax) और अन्य करों के विरोध में एक जोरदार एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन और एकदिवसीय धरने की कमान प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता एवं नेता प्रेमलाल महतो ने संभाली। धरने के दौरान मीरगंज नगर पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों आम नागरिक, गृहस्वामी, छोटे दुकानदार और मजदूर संघ के सक्रिय सदस्य भारी संख्या में उपस्थित होकर प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने नगर पंचायत द्वारा जनता पर थोपे गए इस नए कर को पूरी तरह से जनविरोधी और अन्यायपूर्ण करार देते हुए इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की पुरजोर मांग की।
नगर निकायों द्वारा लगाए जाने वाले करों के खिलाफ जन-आंदोलन के इस स्वरूप, धरने के मुख्य मुद्दों, वक्ताओं के तीखे तेवरों और इसके प्रशासनिक प्रभावों का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण आइए समझते हैं।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: संपत्ति कर और जनता पर बढ़ता आर्थिक बोझ
हाल के दिनों में मीरगंज नगर पंचायत क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच संपत्ति कर लागू किए जाने की सुगबुगाहट और नोटिसों ने आम जनता की नींद उड़ा दी थी।
महंगाई के दौर में अतिरिक्त आर्थिक मार: वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में देश और राज्य के आम लोग भीषण महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ऐसे नाजुक वक्त में नगर पंचायत द्वारा संपत्ति कर थोपना गरीबों और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ने जैसा है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव: प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह था कि जब नगर पंचायत क्षेत्र में आज भी सुचारू रूप से नाला निर्माण, सड़क की रोशनी (स्ट्रीट लाइट), जलापूर्ति और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं तक पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई हैं, तो फिर किस आधार पर नागरिकों से टैक्स वसूला जा रहा है।
मजदूर संघ और नागरिकों की एकजुटता: इस एकदिवसीय धरने की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें केवल अमीर या मध्यम वर्ग के लोग ही नहीं, बल्कि दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा-ठेला चालक और छोटे दुकानदार भी मजदूर संघ के बैनर तले कंधे से कंधा मिलाकर शामिल हुए।
प्रेमलाल महतो के नेतृत्व में गरजा धरना स्थल
धरने की अध्यक्षता और संचालन कर रहे प्रेमलाल महतो ने प्रशासन और नगर पंचायत के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए तीखा हमला बोला।
तानाशाही रवैये का विरोध: प्रेमलाल महतो ने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि मीरगंज नगर पंचायत प्रशासन तानाशाही रवैया अपनाकर जनता की जेब काटने का काम कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गरीबों और मजदूरों की उपेक्षा: उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में अधिकांश आबादी गरीब, मजदूर और छोटे किसानों की है, जो बमुश्किल अपने परिवार का पेट भर पा रहे हैं। ऐसे में उन पर भारी-भरकम टैक्स का बोझ लादना उनके साथ क्रूर मजाक है।
संघर्ष तेज करने की चेतावनी: नेता प्रेमलाल महतो ने मंच से चेतावनी दी कि यदि नगर पंचायत बोर्ड ने इस संपत्ति कर को वापस लेने का फैसला जल्द नहीं लिया, तो इस एकदिवसीय धरने को एक व्यापक और अनिश्चितकालीन जन-आंदोलन में तब्दील कर दिया जाएगा।
वक्ताओं के प्रमुख विचार और जनता की समस्याएं
धरना मंच से एक-एक करके वक्ताओं ने स्थानीय शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और अपनी समस्याएं रखीं।
व्यापारियों और दुकानदारों की पीड़ा: छोटे दुकानदारों ने कहा कि ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी इलाकों में छोटे-मोटे धंधे चलाकर परिवार चलाना मुश्किल हो गया है, ऊपर से विभिन्न प्रकार के होल्डिंग टैक्स और संपत्ति कर का दबाव व्यापारियों का व्यवसाय चौपट कर देगा।
आम जनता की सहभागिता: धरने में शामिल महिलाओं और बुजुर्गों ने भी अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि वे खून-पसीना बहाकर अपने रहने के लिए छोटा-सा आशियाना बनाते हैं, जिस पर अब प्रशासन टैक्स वसूलने की फिराक में है।
ज्ञापन सौंपने की तैयारी: प्रदर्शन के अंत में वक्ताओं और प्रतिनिधियों ने तय किया कि इस एकदिवसीय धरने के माध्यम से जिला प्रशासन और नगर पंचायत के कार्यपालक अधिकारी को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा जाएगा।
प्रशासनिक हलकों में प्रतिक्रिया और आगे की राह
मीरगंज नगर पंचायत परिसर में हुए इस जोरदार प्रदर्शन के बाद स्थानीय प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
अधिकारियों की चुप्पी टूटने के आसार: जानकारों का मानना है कि इस तरह के जन-आंदोलन के बाद नगर पंचायत के अधिकारियों पर दबाव बढ़ेगा कि वे कर निर्धारण की नीति पर पुनर्विचार करें अथवा जनता को इस बारे में संतुष्ट करें।
सुधार की मांग: आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि टैक्स वसूलने से पहले प्रशासन को जनता को बेहतर सुविधाएं देनी होंगी, अन्यथा जनता का यह आक्रोश शांत होने वाला नहीं है।
मीरगंज नगर पंचायत परिसर में गुरुवार को प्रेमलाल महतो के नेतृत्व में संपत्ति कर के खिलाफ आयोजित यह एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जनता अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी है और किसी भी अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ संगठित होकर विरोध दर्ज कराना जानती है। बुनियादी सुविधाओं के बिना जनता पर कर का बोझ थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। नगर पंचायत प्रशासन को इस जन-आक्रोश का सम्मान करते हुए तुरंत उचित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्र में शांति और जन-विश्वास का माहौल बना रहे।