घनश्यामपुर की नरगिस ने रचा इतिहास: नीट यूजी में 572 अंक लाकर हासिल की शानदार सफलता, मातृत्व और वैवाहिक जिम्मेदारियों के बीच तय किया संघर्ष का सफर

 

बिहार के घनश्यामपुर की रहने वाली नर्गिस ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) में अपनी कड़ी मेहनत, अटूट संकल्प और असाधारण इच्छाशक्ति के बल पर शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने इस परीक्षा में कुल 572 अंक प्राप्त किए हैं, जिसके आधार पर उन्होंने ऑल इंडिया जनरल रैंक 22,161 और कैटेगरी रैंक 2,606 हासिल की है। नर्गिस की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने भर की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम बाधाओं को पार करने की एक प्रेरणादायक मिसाल है, जो आमतौर पर महिलाओं के सपनों के आड़े आती हैं।

मुख्य बिंदु: स्कोर, रैंक और उत्कृष्ट प्रदर्शन

नर्गिस ने नीट-यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की गलाकाट प्रतियोगिता में जो रैंक और स्कोर प्राप्त किया है, वह उनकी बौद्धिक क्षमता और फोकस को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

प्राप्त कुल अंक: उन्होंने परीक्षा में कुल 572 अंक अर्जित किए हैं, जो मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) सीट पक्की करने के लिए एक बेहतरीन स्कोर माना जाता है।

ऑल इंडिया जनरल रैंक: अखिल भारतीय स्तर पर जनरल श्रेणी में उन्होंने 22,161वीं रैंक हासिल की है।

कैटेगरी रैंक: अपनी श्रेणी के अंतर्गत उन्होंने 2,606वीं रैंक प्राप्त की है, जिससे उन्हें काउंसलिंग के दौरान अच्छे संस्थानों में प्रवेश मिलने का पूरा अवसर मिलेगा।

मातृत्व और विवाह की जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष की दास्तान

नर्गिस की यह सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक और विशेष है क्योंकि उन्होंने इसे बेहद प्रतिकूल परिस्थितियों और दोहरी जिम्मेदारियों के बीच रहकर हासिल किया है।

चार वर्षीय बेटे की परवरिश: एक तरफ जहाँ छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई के दौरान केवल किताबों में डूबे रहते हैं, वहीं नर्गिस ने एक चार वर्षीय छोटे बच्चे की माँ होने की तमाम जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी।

वैवाहिक जीवन की गृहस्थी: शादीशुदा होने के नाते घर-परिवार और ससुराल की दैनिक जिम्मेदारियों को संभालना और साथ में नीट जैसी कठिन परीक्षा के लिए रोज घंटों समय निकालना उनके लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था।

परिवार का संबल: इस पूरे सफर में उनके पति, माता और पिता का भरपूर सहयोग और प्रोत्साहन रहा, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें कभी भी हार न मानने की प्रेरणा दी।

घनश्यामपुर में खुशी की लहर और प्रेरणा का स्त्रोत

नर्गिस की इस कामयाबी से उनके पैतृक गाँव घनश्यामपुर और पूरे इलाके में गर्व का माहौल है।

बधाई देने वालों का तांता: जैसे ही नीट परिणाम में नर्गिस के 572 अंक और शानदार रैंक आने की खबर गाँव पहुँची, लोगों ने उनके घर पहुंचकर उन्हें और उनके परिवार को बधाइयां दीं।

विवाहित महिलाओं के लिए मिसाल: नर्गिस ने यह साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों और अपनों का साथ मिले, तो विवाह और मातृत्व कभी भी किसी महिला के सपनों और उच्च शिक्षा के आड़े नहीं आ सकते।

भविष्य का संकल्प: अपनी इस सफलता के बाद नर्गिस का लक्ष्य एक कुशल चिकित्सक बनकर समाज के जरूरतमंद और खासकर महिलाओं व बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं में अपना योगदान देना है।

 

घनश्यामपुर की नर्गिस ने नीट-यूजी परीक्षा में 572 अंक लाकर और ऑल इंडिया रैंक 22,161 हासिल कर यह दिखा दिया है कि सफलता उम्र, हालात या पारिवारिक जिम्मेदारियों की मोहताज नहीं होती। मातृत्व और वैवाहिक जीवन की तमाम व्यस्तताओं को दरकिनार करते हुए उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह आने वाली पीढ़ियों और खासकर महिलाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।