पैकेज-2 की समय-सीमा फिर बढ़ी, सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद
भागलपुर/मुंगेर: पूर्वी बिहार की लाइफलाइन मानी जाने वाली महत्वाकांक्षी मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के पैकेज-2 की समय-सीमा एक बार फिर आगे बढ़ गई है। इस पैकेज के तहत करीब 30 किलोमीटर सड़क का निर्माण 20 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी और अंतिम फिनिशिंग कार्यों के कारण अब इसके सितंबर महीने तक पूरा होने की उम्मीद है।
पैकेज-2 के तहत खड़िया गांव से भागलपुर बाइपास स्थित चौधरीडीह तक 29.42 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस हिस्से पर करीब 902 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित है।
इस पैकेज की टेंडर प्रक्रिया 10 फरवरी 2021 को पूरी हुई थी, जबकि जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य 12 मार्च 2022 से शुरू हुआ। परियोजना को मूल रूप से मार्च 2024 तक पूरा किया जाना था। हालांकि, विभिन्न तकनीकी और अन्य अड़चनों के कारण समय-सीमा कई बार बढ़ानी पड़ी। वर्तमान में भी करीब 4.69 प्रतिशत काम बाकी है।
पैकेज-2 पर टिकी निगाहें
मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना को पूर्वी बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण सड़क परियोजना माना जा रहा है। पैकेज-2 का हिस्सा खड़िया गांव से शुरू होकर भागलपुर बाइपास के चौधरीडीह तक जाता है।
इस सड़क के पूरा होने के बाद क्षेत्र में आवागमन को बेहतर बनाने और लंबी दूरी के वाहनों के लिए सुगम मार्ग उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अब अगस्त की समय-सीमा निकलने के बाद निर्माण एजेंसी का ध्यान बचे हुए तकनीकी और फिनिशिंग कार्यों को पूरा करने पर है। सितंबर में इस हिस्से को पूरा करने का नया लक्ष्य सामने आया है।
करीब 4.69 प्रतिशत काम बाकी
परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन करीब 4.69 प्रतिशत काम अभी शेष है।
भले ही यह हिस्सा कुल परियोजना की तुलना में कम दिखाई देता हो, लेकिन अंतिम चरण के कार्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सड़क को यातायात के लिए पूरी तरह खोलने से पहले उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और अन्य तकनीकी मानकों की जांच जरूरी होती है।
सड़क की अंतिम परत, किनारे, जल निकासी, सुरक्षा व्यवस्था, संकेतक और अन्य आवश्यक कार्यों को पूरा करना भी इसी चरण का हिस्सा हो सकता है।
समय-सीमा बढ़ने की वजह
पैकेज-2 के निर्माण में पहले ही कई बार देरी हो चुकी है। टेंडर प्रक्रिया फरवरी 2021 में पूरी होने के बाद मार्च 2022 में जमीन पर काम शुरू हुआ था।
मूल रूप से परियोजना को मार्च 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह लक्ष्य हासिल नहीं हो सका।
अब अगस्त 20 की समय-सीमा भी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाई है। तकनीकी और अंतिम फिनिशिंग कार्यों को पूरा करने में अतिरिक्त समय लगने के कारण सितंबर तक काम पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
902 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण
पैकेज-2 के तहत बनने वाली 29.42 किलोमीटर सड़क पर करीब 902 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इतने बड़े निवेश वाली परियोजना के लिए समय पर निर्माण के साथ-साथ गुणवत्ता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
ग्रीनफील्ड परियोजना में नए सड़क कॉरिडोर का निर्माण किया जाता है। इसके लिए सड़क निर्माण के अलावा कई तरह के तकनीकी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य करने पड़ते हैं।
फोरलेन सड़क से बेहतर होगी कनेक्टिविटी
मुंगेर-मिर्जाचौकी परियोजना का उद्देश्य पूर्वी बिहार में आधुनिक फोरलेन सड़क संपर्क को मजबूत करना है।
फोरलेन सड़क बनने के बाद वाहनों की आवाजाही अधिक सुगम होने की उम्मीद है। इससे लंबी दूरी के यात्री वाहनों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों को भी फायदा मिल सकता है।
बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों और अन्य सामानों को अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा हो सकती है।
स्थानीय लोगों को भी विभिन्न शहरों और कस्बों के बीच आवागमन में राहत मिलने की उम्मीद है।
पूर्वी बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना पूर्वी बिहार के कई क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण शहर, कस्बे, कृषि क्षेत्र और व्यावसायिक केंद्र हैं। बेहतर सड़क संपर्क स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
इसी वजह से इस परियोजना को केवल सड़क निर्माण योजना के बजाय क्षेत्रीय विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर माना जा रहा है।
अब फिनिशिंग कार्य पर जोर
निर्माण कार्य का अधिकांश हिस्सा पूरा होने के बाद अब अंतिम चरण के काम पर ध्यान दिया जा रहा है।
सड़क को यातायात के लिए खोलने से पहले तकनीकी मानकों की जांच और गुणवत्ता परीक्षण आवश्यक होंगे।
सड़क की सतह, जल निकासी, सुरक्षा व्यवस्था, संकेतक और अन्य जरूरी सुविधाओं को मानकों के अनुसार पूरा करना जरूरी है।
इस वजह से सितंबर का नया लक्ष्य काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
पूरा होने के बाद मिलेंगे कई फायदे
पैकेज-2 के पूरा होने के बाद इस कॉरिडोर से गुजरने वाले वाहन चालकों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है।
फोरलेन सड़क की क्षमता सामान्य दो लेन की सड़क की तुलना में अधिक होती है। इससे यातायात का प्रवाह बेहतर हो सकता है और मौजूदा मार्गों पर दबाव कम होने की संभावना रहती है।
भारी वाहनों और व्यावसायिक परिवहन को भी आधुनिक सड़क कॉरिडोर से फायदा मिल सकता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा
बेहतर सड़क संपर्क का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ सकता है।
व्यापारियों को सामान लाने-ले जाने में सुविधा होगी। कच्चे माल और तैयार उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
सड़क के आसपास स्थित गांवों और कस्बों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
परियोजना पूरी होने के बाद उपयुक्त स्थानों पर व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है।
निर्माण गुणवत्ता सबसे जरूरी
परियोजना को जल्द पूरा करना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ सड़क की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
फोरलेन सड़क पर बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने की संभावना रहती है। इसलिए सड़क की मजबूती और टिकाऊपन महत्वपूर्ण है।
जल निकासी व्यवस्था भी बेहद जरूरी है। बारिश के दौरान उचित ड्रेनेज नहीं होने पर सड़क को नुकसान पहुंच सकता है।
सड़क सुरक्षा से जुड़े संकेतक, रोड मार्किंग और अन्य सुविधाओं को भी ठीक तरीके से पूरा करना जरूरी होगा।
सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद
अब पैकेज-2 को सितंबर तक पूरा करने की उम्मीद है।
20 अगस्त तक करीब 30 किलोमीटर सड़क पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन तकनीकी और अंतिम फिनिशिंग कार्यों के चलते इसमें देरी हुई।
चूंकि करीब 4.69 प्रतिशत काम ही बाकी है, इसलिए निर्माण एजेंसी अब बचे हुए कार्यों को जल्द पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
यदि काम संशोधित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ता है तो 29.42 किलोमीटर लंबा यह हिस्सा सितंबर में पूरा हो सकता है।
बार-बार समय-सीमा बढ़ने से बढ़ी उम्मीदें
परियोजना पहले ही मार्च 2024 की मूल समय-सीमा से काफी आगे निकल चुकी है।
बार-बार समय-सीमा बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की उम्मीदें भी बढ़ी हैं। लोगों को बेहतर सड़क संपर्क और यात्रा सुविधा का लंबे समय से इंतजार है।
ऐसे में सितंबर की नई समय-सीमा पर स्थानीय लोगों, परिवहन कारोबारियों और व्यवसायियों की नजर रहेगी।
परियोजना की निगरानी जरूरी
बार-बार समय-सीमा बढ़ने से बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की नियमित निगरानी की जरूरत भी सामने आती है।
ऐसी परियोजनाओं में कई चरण होते हैं और किसी एक चरण में देरी का असर पूरी परियोजना की समय-सीमा पर पड़ सकता है।
नियमित निगरानी से तकनीकी समस्याओं और निर्माण से जुड़ी बाधाओं की पहचान समय रहते की जा सकती है।
निर्माण एजेंसी, संबंधित विभाग और स्थानीय स्तर के हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय से भी देरी को कम किया जा सकता है।
बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर
मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना बिहार के सड़क नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है।
इसके पूरा होने से पूर्वी बिहार के कई हिस्सों में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही अलग-अलग जिलों के बीच परिवहन संपर्क बेहतर हो सकता है।
पैकेज-2 इसी बड़े कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका पूरा होना पूरी परियोजना की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
मुंगेर-मिर्जाचौकी ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के पैकेज-2 की समय-सीमा एक बार फिर बढ़ गई है। खड़िया गांव से भागलपुर बाइपास स्थित चौधरीडीह तक 29.42 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण करीब 902 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है।
इस पैकेज की टेंडर प्रक्रिया 10 फरवरी 2021 को पूरी हुई थी और जमीनी स्तर पर काम 12 मार्च 2022 से शुरू हुआ था। परियोजना को मूल रूप से मार्च 2024 तक पूरा किया जाना था, लेकिन विभिन्न कारणों से समय-सीमा आगे बढ़ती गई।
अब 20 अगस्त तक करीब 30 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा करने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सका है। तकनीकी और अंतिम फिनिशिंग कार्यों के चलते करीब 4.69 प्रतिशत काम अभी बाकी है। अब इसके सितंबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
परियोजना पूरी होने के बाद पूर्वी बिहार में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने, मालवाहक वाहनों की आवाजाही आसान होने और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
अब सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए काम को समय पर पूरा करने के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता और सड़क सुरक्षा के मानकों को बनाए रखना है। यदि संशोधित समय-सीमा के अनुसार काम पूरा होता है तो पैकेज-2 का पूरा होना मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन कॉरिडोर की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।