आर्थिक संकट से जूझ रहे शारीरिक शिक्षक पिछले चार महीने से मानदेय नहीं मिलने से बढ़े संघर्ष, कई शिक्षक जीविका के लिए करने लगे अन्य काम

भागलपुर : बिहार के सरकारी विद्यालयों में खेलकूद और स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नियुक्त किए गए शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के सामने विकट आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालयों में कार्यरत एक सौ से अधिक शारीरिक शिक्षकों और स्वास्थ्य अनुदेशकों को बीते चार महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। वित्तीय संकट के इस लंबे दौर के कारण इन शिक्षकों के परिवारों के समक्ष भरण-पोषण की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिसके चलते कई शिक्षकों को अपनी आजीविका चलाने के लिए वैकल्पिक और संघर्षपूर्ण रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं।

भुगतान में देरी और प्रशासनिक उदासीनता

समय पर मानदेय न मिलने से शिक्षकों में आक्रोश और निराशा का माहौल है:

वित्तीय बदहाली: महज 16 हजार रुपये प्रतिमाह के मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे इन शिक्षकों का कहना है कि चार महीने तक लगातार वेतन न मिलने से घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई और रसोई चलाना नामुमकिन हो गया है।

राज्य स्तर से आवंटन का अभाव: इस संबंध में जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशकों के मानदेय भुगतान के लिए अभी तक राज्य मुख्यालय से वित्तीय आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। विभाग का दावा है कि आवंटन मिलते ही सभी बकाये का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

परिवार पालने के लिए मजबूर हुए अनूठे संघर्ष

नियमित वेतन न मिलने के कारण कुछ शिक्षकों ने अपनी और अपने परिवार की गुजर-बसर के लिए छोटे-मोटे कार्य शुरू कर दिए हैं, जिसकी चर्चा चारों तरफ हो रही है:

झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान: सन्हौला प्रखंड के अमडंडा मध्य विद्यालय में कार्यरत शारीरिक शिक्षक निशांत कुमार बच्चों को खेल और पढ़ाई की शिक्षा देने के बाद स्कूल के बाहर झालमुड़ी और स्टेशनरी की दुकान चलाने को विवश हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2022 में बहाली के बाद लंबे संघर्ष के बाद मानदेय बढ़कर 16 हजार हुआ था, लेकिन समय पर भुगतान न होने के कारण यह नाकाफी साबित हो रहा है।

अन्य कार्य: कई अन्य शिक्षक भी घर-घर जाकर सामान बेचने या ऑनलाइन डिलीवरी जैसे छोटे-मोटे कार्य करने को मजबूर हैं ताकि वे अपने परिवार को आर्थिक तंगी से उबार सकें।

संघ का रुख और प्रशासनिक आश्वासन

शारीरिक शिक्षा एवं स्वास्थ्य अनुदेशक संघ के जिला अध्यक्ष अभय मिश्रा ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि पूर्णकालिक कार्य लिए जाने के बावजूद शिक्षकों को समय पर मानदेय न मिलना उनके साथ अन्याय है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे उच्चाधिकारियों के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

स्कूलों में बच्चों को शारीरिक रूप से फिट रखने और खेल गतिविधियों को आगे बढ़ाने वाले ये शिक्षक खुद आज आर्थिक बदहाली की रेस में पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। प्रशासन और शिक्षा विभाग को इस दिशा में तत्काल कदम उठाते हुए इनका बकाया मानदेय जारी करना चाहिए ताकि इन शिक्षकों को इस अवांछित संघर्ष से मुक्ति मिल सके।