PMCH में बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों के लिए पहला OPD काउंटर आरक्षित, डॉक्टर भी देंगे प्राथमिकता

पटना। पटना के प्रसिद्ध पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में इलाज के लिए आने वाले बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों को अब ओपीडी में पर्ची कटाने और डॉक्टर को दिखाने के लिए पहले की तुलना में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी के पहले काउंटर को बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों के लिए आरक्षित करने का फैसला किया है। इस काउंटर पर सामान्य मरीजों की पर्ची नहीं काटी जाएगी। व्यवस्था का उद्देश्य उम्रदराज और दिव्यांग मरीजों को लंबी कतार में खड़े होने की परेशानी से बचाना और उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

नई व्यवस्था के तहत बुजुर्ग और दिव्यांग मरीज सीधे निर्धारित काउंटर पर जाकर ओपीडी की पर्ची बनवा सकेंगे। इसके बाद उन्हें डॉक्टर से परामर्श लेने के दौरान भी प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जा रही है। अस्पताल प्रशासन का मानना है कि उम्रदराज मरीजों को लंबे समय तक कतार में खड़ा रखना उनके लिए परेशानी का कारण बन सकता है। वहीं, दिव्यांग मरीजों के लिए भी भीड़भाड़ वाली कतार में इंतजार करना मुश्किल होता है। ऐसे में अलग काउंटर की व्यवस्था उनके लिए राहत देने वाली साबित हो सकती है।

पहले काउंटर पर सिर्फ बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों की पर्ची

PMCH की ओपीडी में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अलग-अलग विभागों में डॉक्टरों से परामर्श लेने के लिए मरीजों को पंजीकरण और पर्ची की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। भीड़ अधिक होने की स्थिति में मरीजों को काफी समय तक कतार में इंतजार करना पड़ता है।

नई व्यवस्था के तहत ओपीडी के पहले काउंटर को विशेष रूप से बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है। इस काउंटर पर सामान्य मरीजों की पर्ची नहीं काटी जाएगी। इससे पात्र मरीजों को पंजीकरण के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी।

अस्पताल प्रशासन की कोशिश है कि आरक्षित काउंटर पर आने वाले मरीजों की पहचान और पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और तेज रखी जाए। इससे मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को भी कम समय तक अस्पताल परिसर में इंतजार करना पड़ेगा।

डॉक्टर भी बुजुर्ग मरीजों को देंगे प्राथमिकता

सिर्फ पर्ची कटाने तक ही यह सुविधा सीमित नहीं रहेगी। बताया गया है कि डॉक्टरों के स्तर पर भी बुजुर्ग मरीजों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था की जाएगी। इसका मतलब यह है कि पंजीकरण के बाद जब मरीज संबंधित ओपीडी में डॉक्टर के पास पहुंचेंगे तो उम्रदराज मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जा सकेगा।

अस्पतालों की ओपीडी में सामान्य तौर पर मरीज अपनी बारी का इंतजार करते हैं। कई बार भीड़ अधिक होने के कारण बुजुर्ग मरीजों को लंबे समय तक बैठे या खड़े रहना पड़ता है। विशेष प्राथमिकता मिलने से इस परेशानी को कम किया जा सकता है।

विशेष रूप से अधिक उम्र वाले मरीजों को लंबे समय तक खड़े रहने, भीड़ में रहने या अस्पताल परिसर में बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में कठिनाई हो सकती है। ऐसे मरीजों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना अस्पताल की जिम्मेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

दिव्यांग मरीजों को भी मिलेगा लाभ

दिव्यांग मरीजों के लिए भी आरक्षित काउंटर की व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई दिव्यांग मरीजों को चलने-फिरने में परेशानी होती है। कुछ मरीज व्हीलचेयर या दूसरे सहायक साधनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सामान्य मरीजों के साथ लंबी कतार में खड़ा होना या आगे बढ़ना उनके लिए कठिन हो सकता है।

आरक्षित काउंटर से उन्हें पंजीकरण की प्रक्रिया में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा डॉक्टर को दिखाने में प्राथमिकता मिलने से अस्पताल में बिताया जाने वाला समय कम हो सकता है।

अस्पताल प्रशासन की ओर से इस व्यवस्था के बारे में मरीजों और उनके परिजनों को जानकारी देने के लिए काउंटर पर स्पष्ट सूचना लगाने की आवश्यकता भी महत्वपूर्ण होगी। इससे पात्र मरीजों को यह पता चल सकेगा कि उन्हें किस काउंटर पर जाना है और प्रक्रिया कैसे पूरी करनी है।

रोजाना बड़ी संख्या में पहुंचते हैं मरीज

PMCH बिहार के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल है। पटना के अलावा राज्य के अलग-अलग जिलों से मरीज यहां इलाज कराने पहुंचते हैं। गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज के लिए भी बड़ी संख्या में मरीज PMCH की ओपीडी और अन्य विभागों में आते हैं।

मरीजों की अधिक संख्या के कारण अस्पताल में भीड़ बनी रहना सामान्य है। ओपीडी के दौरान पंजीकरण काउंटर और डॉक्टरों के कमरे के बाहर मरीजों की कतार दिखाई देती है। ऐसे माहौल में बुजुर्गों और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग सुविधा शुरू करना भीड़ प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो इससे न केवल बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सामान्य मरीजों की कतार को भी व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।

परिजनों को भी मिलेगी राहत

बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के साथ अक्सर परिवार के सदस्य या देखभाल करने वाले लोग अस्पताल आते हैं। मरीज की पर्ची कटाने और डॉक्टर से परामर्श लेने में अधिक समय लगने पर परिजनों को भी लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है।

आरक्षित काउंटर के कारण पंजीकरण की प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्दी होने की उम्मीद है। डॉक्टर को प्राथमिकता मिलने से मरीज और उनके परिजनों को राहत मिल सकती है।

हालांकि, इस सुविधा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब अस्पताल में आरक्षित काउंटर पर पर्याप्त कर्मचारी मौजूद हों और मरीजों की पहचान तथा पंजीकरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित हो।

व्यवस्था लागू करने में निगरानी जरूरी

किसी भी आरक्षित सुविधा को सफल बनाने के लिए निगरानी महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल में यह सुनिश्चित करना होगा कि आरक्षित काउंटर का इस्तेमाल केवल निर्धारित श्रेणी के मरीज ही करें। यदि सामान्य मरीज इस काउंटर पर पर्ची कटाने का प्रयास करते हैं तो उन्हें उचित तरीके से दूसरे काउंटर पर भेजना होगा।

इसके साथ ही बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों को भी यह जानकारी स्पष्ट रूप से देनी होगी कि प्राथमिकता का लाभ किस आयु सीमा या किस श्रेणी के मरीजों को मिलेगा। यदि नियम स्पष्ट होंगे तो मरीजों और कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति कम होगी।

डॉक्टरों के स्तर पर भी प्राथमिकता व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों में उचित समन्वय आवश्यक होगा। केवल काउंटर पर सुविधा देने से उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि पंजीकरण से लेकर चिकित्सकीय परामर्श तक पूरी प्रक्रिया को मरीज-केंद्रित बनाना होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील बनाने की पहल

बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों के लिए अलग व्यवस्था केवल प्रशासनिक सुविधा नहीं बल्कि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में कदम माना जा सकता है। उम्रदराज मरीजों को कई बार एक साथ कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्हें अस्पताल की लंबी प्रक्रिया में अधिक समय तक इंतजार करना परेशानी बढ़ा सकता है।

इसी तरह दिव्यांग मरीजों को अस्पताल की भौतिक संरचना और भीड़ के कारण अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उनके लिए पंजीकरण, प्रतीक्षा और चिकित्सकीय परामर्श की प्रक्रिया को आसान बनाना जरूरी है।

मरीजों में व्यवस्था को लेकर उम्मीद

नई व्यवस्था की जानकारी मिलने के बाद बुजुर्ग और दिव्यांग मरीजों को उम्मीद है कि उन्हें अस्पताल में पहले से बेहतर सुविधा मिलेगी। खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों से PMCH पहुंचने वाले मरीजों के लिए समय की बचत महत्वपूर्ण होती है।

कई मरीजों को इलाज के लिए सुबह जल्दी अस्पताल पहुंचना पड़ता है। लंबी कतार और डॉक्टर के इंतजार में उन्हें कई घंटे लग सकते हैं। यदि आरक्षित काउंटर और प्राथमिकता वाली डॉक्टर जांच सही तरीके से लागू होती है तो उनके लिए अस्पताल की पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सकती है।

आगे व्यवस्था के विस्तार की संभावना

यदि आरक्षित काउंटर की व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में अस्पताल प्रशासन अन्य जरूरतमंद मरीजों के लिए भी अलग सुविधाओं पर विचार कर सकता है। अस्पताल में मरीजों की संख्या को देखते हुए डिजिटल पंजीकरण, स्पष्ट संकेतक, सहायता डेस्क और व्हीलचेयर सुविधा जैसी व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया जा सकता है।

PMCH जैसे बड़े अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए छोटी-छोटी प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी बड़ा असर डाल सकती हैं। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए आरक्षित पहला काउंटर इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि नई व्यवस्था का लाभ वास्तव में जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचे। आरक्षित काउंटर पर सामान्य मरीजों की पर्ची नहीं काटने और डॉक्टरों द्वारा बुजुर्ग मरीजों को प्राथमिकता देने की व्यवस्था से ओपीडी की प्रक्रिया अधिक मानवीय और सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में इस व्यवस्था के क्रियान्वयन और मरीजों की प्रतिक्रिया से पता चलेगा कि इससे PMCH की ओपीडी व्यवस्था में कितना सुधार आता है।