घोघा के जानीडीह स्थित ऐतिहासिक नागा बाबा खेल मैदान पर मॉडल थाना भवन के निर्माण को लेकर गरमाई सियासत; युवाओं और ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, निर्माण रोकने और वैकल्पिक जमीन तलाशने की मांग

भागलपुर, विशेष संवाददाता: भागलपुर जिले के कहलगांव अंतर्गत घोघा क्षेत्र के जानीडीह स्थित ऐतिहासिक नागा बाबा खेल मैदान पर मॉडल थाना भवन के प्रस्तावित निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं, छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों ने इस निर्णय के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। खेल मैदान के अस्तित्व को बचाने के लिए युवा सड़कों पर उतर आए हैं और जिला प्रशासन तथा स्थानीय जनप्रतनिधियों को ज्ञापन सौंपकर इस परियोजना को तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरित करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि विकास के नाम पर युवाओं के भविष्य और खेल संस्कृति की बलि नहीं दी जानी चाहिए।

क्या है पूरा विवाद और क्यों सुलग रहा है असंतोष?

घोघा क्षेत्र के जानीडीह में स्थित यह मैदान महज एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि पिछले कई दशकों से इस इलाके की खेल संस्कृति का प्राण केंद्र रहा है:

साढ़े पांच दशकों का इतिहास: स्थानीय बुजुर्गों और जानकारों के अनुसार, यह भूमि लगभग पिछले 50-50 वर्षों से अधिक समय से सार्वजनिक खेल मैदान के रूप में उपयोग की जाती रही है। किंवदंतियों और स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यह जमीन मूल रूप से श्रद्धालुओं द्वारा नागा बाबा को दान में दी गई थी, जिस वजह से यह क्षेत्र में 'नागा बाबा खेल मैदान' के नाम से विख्यात है। हालांकि, हालिया सरकारी सर्वे में यह भूमि बिहार सरकार के नाम दर्ज हो चुकी है, जिसके बाद प्रशासन ने यहां मॉडल थाना भवन बनाने की योजना तैयार की है।

पांच पंचायतों का एकमात्र बड़ा मैदान: ग्रामीणों का तर्क है कि यह मैदान घोघा क्षेत्र की करीब पांच पंचायतों के युवाओं के लिए इकलौता बड़ा और सुलभ खेल परिसर है। इसके छिन जाने से लगभग 50 हजार की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित होगी, और क्षेत्र के बच्चों व युवाओं के पास खेलने के लिए कोई दूसरा मैदान नहीं बचेगा।

भविष्य की तैयारी में जुटे युवाओं के सपनों को झटका

इस मैदान पर केवल खेलकूद ही नहीं होता, बल्कि यह क्षेत्र के हज़ारों युवाओं के करियर निर्माण की पहली सीढ़ी है:

सेना और पुलिस भर्ती की नर्सरी: इस मैदान की मिट्टी पर पसीना बहाकर हर साल दर्जनों युवा भारतीय सेना, बिहार पुलिस, बीएसएफ (BSF), सीआईएसएफ (CISF) और होमगार्ड जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं में चयनित होते हैं। प्रतिदिन सुबह और शाम को यहां सैकड़ों अभ्यर्थी दौड़, लंबी कूद और शारीरिक अभ्यास (Physical Training) करते हैं।

प्रतिष्ठित खिलाड़ियों की पौध: क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य स्थानीय खेलों के लिए प्रसिद्ध इस मैदान से निकलकर कई युवा राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक अपनी धाक जमा चुके हैं। युवाओं का कहना है कि यदि यह मैदान छिन गया, तो उनकी तैयारी का सिलसिला हमेशा के लिए थम जाएगा।

ग्रामीणों और युवाओं के तर्क: "गलत है चयन, हो वैकल्पिक भूमि का चयन"

विधायक और जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं:

वैकल्पिक भूमि की तलाश: आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि वे कानून के शासन और पुलिस महकमे के आधुनिकीकरण (मॉडल थाना) के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध इसके गलत स्थान चयन को लेकर है। सरकार को किसी अन्य खाली पड़ी सरकारी जमीन पर थाने का निर्माण कराना चाहिए।

भौगोलिक और व्यावहारिक समस्या: जानकारों का यह भी तर्क है कि प्रस्तावित स्थल घनी आबादी से काफी दूर है, जबकि एक थाने की स्थापना ऐसी जगह होनी चाहिए जो क्षेत्र के बिल्कुल केंद्र में हो, ताकि आपात स्थिति या जरूरत पड़ने पर आम जनता को समय पर पुलिस सहायता मिल सके।

प्रशासनिक स्तर पर हलचल और आगे की राह

ग्रामीणों और युवाओं के मुखर विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर भी दबाव बढ़ गया है। छात्र-छात्राओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। खेल प्रेमियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिला के उच्चाधिकारियों से मिलकर इस ऐतिहासिक मैदान को बचाने की गुहार लगाएगा।

जानीडीह के नागा बाबा खेल मैदान पर मॉडल थाना के निर्माण को लेकर उपजा यह विवाद प्रशासनिक विकास योजनाओं और स्थानीय जन-भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी चुनौती पेश करता है। एक तरफ जहां आधुनिक पुलिसिंग जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण युवाओं के शारीरिक विकास, खेलकूद और करियर को सुरक्षित रखना भी उतना ही अनिवार्य है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या मध्यम मार्ग निकालता है और क्या युवाओं के इस संघर्ष का कोई सकारात्मक समाधान निकल पाता है या नहीं।