मानसून की पहली बारिश में चरमराई बिजली व्यवस्था, पेड़ों की छंटाई और ढीले तार बने बड़ी परेशानी

भागलपुर, 16 जुलाई: भागलपुर जिले में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। पिछले सात से आठ दिनों के दौरान जिले में तीन से चार बार तेज हवा, मेघगर्जन और झमाझम बारिश दर्ज की गई है। बारिश ने जहां लोगों को उमस और गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी ओर बिजली व्यवस्था की कमजोर तैयारियों की पोल भी खोल दी है। शुरुआती मानसूनी बारिश के दौरान ही शहर और आसपास के कई प्रमुख रिहायशी इलाकों में बार-बार बिजली गुल होने, ट्रिपिंग और कम वोल्टेज की समस्या से हजारों उपभोक्ताओं को जूझना पड़ा।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर वर्ष मानसून से पहले बिजली विभाग द्वारा पेड़ों की छंटाई, ढीले तारों की मरम्मत और बिजली लाइनों के रखरखाव का दावा किया जाता है, लेकिन इस बार भी आवश्यक कार्य समय पर नहीं किए गए। नतीजतन, हल्की बारिश और तेज हवा के साथ ही बिजली आपूर्ति बाधित होने लगी।

मानसून की शुरुआत में ही बिगड़ी व्यवस्था

भागलपुर में मानसून के आगमन के साथ मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान कई बार तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इस दौरान अनेक इलाकों में बिजली आपूर्ति घंटों बाधित रही। कई मोहल्लों में थोड़ी-थोड़ी देर पर बिजली ट्रिप होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बिजली कटौती के कारण घरों में लगे इनवर्टर और बैटरियां भी जल्दी डिस्चार्ज हो गईं। सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों को हुई, जिन्हें लगातार बिजली की आवश्यकता रहती है।

घनी आबादी वाले इलाकों में नहीं हुई पेड़ों की छंटाई

शहर के कई घनी आबादी वाले इलाकों में बिजली के तार पेड़ों की शाखाओं से होकर गुजर रहे हैं। तेज हवा चलने पर शाखाएं तारों से टकराती हैं, जिससे फॉल्ट और ट्रिपिंग की समस्या उत्पन्न होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले पेड़ों की छंटाई कराई जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक कई स्थानों पर यह काम शुरू भी नहीं हुआ है। इससे बारिश के हर दौर में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

ढीले तार बने हादसे का कारण

कई इलाकों में बिजली के तार लंबे समय से ढीले लटक रहे हैं। तेज हवा के दौरान ये तार आपस में टकराते हैं, जिससे स्पार्किंग और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं सामने आती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते तारों को कसने और पुराने उपकरणों को बदलने से ऐसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ रही ट्रिपिंग

मानसून के दौरान सबसे बड़ी समस्या बार-बार होने वाली ट्रिपिंग बन गई है। कई मोहल्लों में कुछ मिनट के अंतराल पर बिजली चली जाती है और फिर वापस आती है। इससे घरेलू उपकरणों के खराब होने का भी खतरा बढ़ जाता है।

व्यापारियों का कहना है कि लगातार बिजली कटौती के कारण उनके कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। छोटे उद्योग, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान नियमित बिजली आपूर्ति पर निर्भर रहते हैं।

बारिश के साथ बढ़ जाती है शिकायतें

बिजली विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर बारिश के दौरान शिकायतों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार शिकायत दर्ज कराने के बाद भी तकनीकी टीम को मौके पर पहुंचने में काफी समय लग जाता है।

कुछ क्षेत्रों में फॉल्ट ठीक होने में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे लोगों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित होती है।

विभाग की तैयारियों पर उठे सवाल

हर वर्ष मानसून से पहले बिजली विभाग रखरखाव अभियान चलाने का दावा करता है। इसमें पेड़ों की छंटाई, बिजली लाइनों की जांच, ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत और जर्जर उपकरणों को बदलने जैसे कार्य शामिल होते हैं।

हालांकि, इस बार शुरुआती बारिश में ही सामने आई समस्याओं ने इन तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर रखरखाव कार्य पूरे कर लिए जाते, तो इतनी अधिक ट्रिपिंग और बिजली बाधित होने की नौबत नहीं आती।

बिजली विभाग का पक्ष

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तेज हवा और बारिश के कारण कई स्थानों पर तकनीकी फॉल्ट उत्पन्न हुए हैं, जिन्हें दूर करने के लिए टीमें लगातार काम कर रही हैं।

अधिकारियों के अनुसार, जहां-जहां पेड़ों की शाखाएं बिजली लाइनों के संपर्क में हैं, वहां उनकी छंटाई की जाएगी। साथ ही ढीले तारों को कसने और खराब उपकरणों को बदलने का काम भी चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।

सुरक्षा को लेकर भी चिंता

बारिश के मौसम में बिजली के ढीले तार और टूटे हुए पोल लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय पर इनकी मरम्मत नहीं की गई, तो करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है।

लोगों से अपील की गई है कि बारिश के दौरान टूटे हुए बिजली के तारों से दूरी बनाए रखें और ऐसी किसी भी स्थिति की सूचना तुरंत बिजली विभाग को दें।

व्यापार और जनजीवन पर असर

लगातार ट्रिपिंग और बिजली कटौती का असर केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है। अस्पताल, छोटे उद्योग, इंटरनेट सेवाएं, बैंकिंग कार्य और शिक्षा से जुड़ी ऑनलाइन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।

बारिश के दौरान बिजली बाधित होने से कई क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति पर भी असर पड़ता है, क्योंकि मोटर और पंप बिजली पर निर्भर होते हैं।

उपभोक्ताओं की मांग

स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग से मानसून के दौरान विशेष निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि—

  • पेड़ों की छंटाई तुरंत कराई जाए।
  • ढीले बिजली तारों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए।
  • फॉल्ट होने पर त्वरित मरम्मत दल भेजे जाएं।
  • पुराने ट्रांसफॉर्मरों और जर्जर उपकरणों को बदला जाए।
  • संवेदनशील इलाकों की नियमित निगरानी की जाए।

आगे भी जारी रह सकता है बारिश का दौर

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। ऐसे में यदि बिजली व्यवस्था में समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो लोगों को आने वाले दिनों में भी इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

भागलपुर में मानसून की शुरुआती बारिश ने बिजली व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। तेज हवा और बारिश के कारण बार-बार ट्रिपिंग, बिजली कटौती, ढीले तार और पेड़ों की बिना छंटाई वाली शाखाएं उपभोक्ताओं के लिए बड़ी समस्या बन गई हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि बिजली विभाग जल्द से जल्द व्यापक रखरखाव अभियान चलाकर व्यवस्था को दुरुस्त करे, ताकि मानसून के पूरे मौसम में लोगों को निर्बाध और सुरक्षित बिजली आपूर्ति मिल सके।