भागलपुर पायलट ट्रेनिंग सेंटर का विरोध तेज, कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोग; बोले- "आशियाना उजाड़कर विकास मंजूर नहीं"
भागलपुर, 16 जुलाई: भागलपुर हवाई अड्डा परिसर में प्रस्तावित पायलट प्रशिक्षण केंद्र (Pilot Training Centre) की स्थापना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। नगर निगम की ओर से प्रभावित परिवारों को जारी किए जा रहे नोटिसों के विरोध में गुरुवार को हवाई अड्डा क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण और स्थानीय निवासी कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और जिला अधिकारी (डीएम) अलंकृता पांडेय से सीधे हस्तक्षेप की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विकास परियोजनाओं का वे विरोध नहीं करते, लेकिन किसी भी परियोजना के नाम पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घर उजाड़ना स्वीकार नहीं किया जा सकता। लोगों ने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाए।
कलेक्ट्रेट में जुटी बड़ी संख्या में भीड़
सुबह से ही हवाई अड्डा क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों और गांवों से लोग कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे। पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बुजुर्ग भी प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर "आशियाना बचाओ", "पहले पुनर्वास, फिर विकास" और "गरीबों के घर नहीं उजाड़ो" जैसे नारे लगाए।
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की भी तैनाती की गई ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
नोटिस जारी होने से बढ़ा आक्रोश
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा हाल के दिनों में कई परिवारों को नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिसों में कथित रूप से अतिक्रमण हटाने और निर्धारित समय के भीतर स्थान खाली करने की बात कही गई है।
नोटिस मिलने के बाद लोगों में चिंता और असमंजस का माहौल है। कई परिवारों का कहना है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और उनके पास रहने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
"आशियाना उजाड़कर विकास नहीं चाहिए"
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पायलट ट्रेनिंग सेंटर जैसी विकास परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका सवाल है कि यदि विकास की कीमत किसी गरीब परिवार का घर उजाड़कर चुकानी पड़े, तो ऐसी योजना पर पुनर्विचार होना चाहिए।
लोगों का कहना था कि सरकार को पहले प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट नीति घोषित करनी चाहिए। जब तक वैकल्पिक आवास और उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक किसी को भी बेघर करना न्यायसंगत नहीं होगा।
डीएम से की सीधे हस्तक्षेप की मांग
प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी (डीएम) अलंकृता पांडेय से मुलाकात की मांग की। लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया कि प्रभावित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए और किसी भी कार्रवाई से पहले जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ बातचीत की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि प्रशासन उनकी चिंताओं को समझेगा।
महिलाओं ने भी जताई चिंता
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि उनका सबसे बड़ा डर अपने घरों को खोने का है। कई परिवारों ने वर्षों की मेहनत से अपने मकान बनाए हैं और अब अचानक मिले नोटिसों ने उन्हें असुरक्षा की स्थिति में ला दिया है।
महिलाओं का कहना था कि यदि उनके घर हटाए जाते हैं, तो बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और पूरे परिवार का जीवन प्रभावित होगा।
प्रशासन से पारदर्शिता की मांग
स्थानीय निवासियों ने मांग की कि पायलट ट्रेनिंग सेंटर परियोजना से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। लोगों ने जानना चाहा कि परियोजना के लिए कितनी जमीन की आवश्यकता है, कितने परिवार प्रभावित होंगे और उनके पुनर्वास की क्या योजना है।
उनका कहना है कि बिना स्पष्ट जानकारी के लोगों में भ्रम और भय का माहौल बना हुआ है।
विकास और पुनर्वास दोनों जरूरी
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़ी विकास परियोजना के साथ पुनर्वास और उचित मुआवजा नीति का पालन करना आवश्यक होता है। इससे परियोजनाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहता है और सामाजिक तनाव कम होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले, तो विवाद काफी हद तक कम हो सकता है।
नगर निगम और प्रशासन की भूमिका
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नोटिस जारी करने की प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है।
संभावना जताई जा रही है कि प्रशासन प्रभावित लोगों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं और मांगों पर चर्चा कर सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर
पायलट ट्रेनिंग सेंटर को लेकर शुरू हुए विवाद पर अब विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी नजर है। कई संगठनों ने प्रभावित परिवारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।
राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में परिवार इस परियोजना से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं।
आगे क्या?
फिलहाल प्रभावित लोगों ने प्रशासन से नोटिस की प्रक्रिया पर रोक लगाने और पहले पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। यदि उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो उन्होंने आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
दूसरी ओर, प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि विकास परियोजना को आगे बढ़ाने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और हितों की भी रक्षा की जाए।
भागलपुर में प्रस्तावित पायलट ट्रेनिंग सेंटर को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों लोगों ने साफ कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना पुनर्वास और उचित मुआवजे के अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। अब सबकी नजर जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी है। यदि प्रशासन संवाद और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ता है, तो इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सकता है; अन्यथा यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है।