पूर्णिया: जानकीनगर के चोपड़ा बाजार बस पड़ाव के समीप मांस-मछली की दुकानों से फैल रहे कचरे और गंदे पानी से त्रस्त आमजन; नारकीय स्थिति से जूझ रहे स्थानीय लोग, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल अंतर्गत आने वाले जानकीनगर थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाली समस्या सामने आ रही है। जानकीनगर के व्यस्ततम और महत्वपूर्ण चोपड़ा बाजार बस पड़ाव के समीप संचालित हो रही मीट-मछली की दुकानों से निकलने वाले अवशेष, खून, गंदा पानी और कचरे के खुलेआम फैलाव के कारण स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और यात्रियों का जीना मुहाल हो गया है। स्थिति इतनी नारकीय और बदतर हो चुकी है कि सड़े-गले अवशेषों से उठने वाली भीषण दुर्गंध और मक्खी-मच्छरों के प्रकोप से आसपास के लोगों का सांस लेना तक दूभर हो गया है। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों और राहगीरों में नगर प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश व्याप्त है, क्योंकि कई बार गुहार लगाने के बावजूद इस कचरा प्रबंधन और अवैध रूप से पसरी गंदगी पर रोक लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

बाजार क्षेत्रों में स्वच्छता के अभाव, अनियंत्रित मांस-मछली की दुकानों से फैलने वाले प्रदूषण, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्परिणामों और प्रशासनिक उदासीनता का एक विस्तृत, विश्लेषणात्मक और बिंदुवार विवरण आइए समझते हैं।

समस्या की पृष्ठभूमि: चोपड़ा बाजार बस पड़ाव की वर्तमान स्थिति और गंदगी का साम्राज्य

चोपड़ा बाजार क्षेत्र जानकीनगर का एक प्रमुख वाणिज्यिक और आवागमन का केंद्र है, जहां रोजाना हजारों की संख्या में यात्रियों, छात्रों और स्थानीय लोगों का आना-जाना होता है।

बस पड़ाव के पास नारकीय हालात: बस पड़ाव के ठीक नजदीक मांस और मछली की कई दुकानें बिना किसी मानक या ड्रेनेज सिस्टम के संचालित हो रही हैं। इन दुकानों से निकलने वाला अवशिष्ट कचरा सीधे सड़कों या खाली जमीनों पर फेंक दिया जाता है।

खुले में फेंके जाने वाले अवशेष: नियमों को ताक पर रखकर दुकानदार जानवरों के अवशेष (अपशिष्ट) और गंदा पानी खुले में छोड़ रहे हैं, जिससे वहां से गुजरना भी आम जनता के लिए किसी सजा से कम नहीं रह गया है।

असहनीय दुर्गंध और बीमार

 स्वास्थ्य के लिए मंडराता गंभीर खतरा और संक्रामक बीमारियों की आशंका

गंदगी और कचरे का यह अंबार केवल पर्यावरण को ही दूषित नहीं कर रहा, बल्कि यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

मक्खी-मच्छरों का भारी प्रकोप: सड़े हुए मांस के टुकड़ों पर भिनभिनाती मक्खियों और पनपते मच्छरों के कारण मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और पेट से जुड़ी गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है।

दूषित हवा और सांस की समस्याएं: उठने वाली सड़न भरी दुर्गंध के कारण आसपास के घरों के लोगों का खिड़की-दरवाजे खोलना तक बंद हो गया है। बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

पेयजल और खाद्य सुरक्षा पर असर: बाजार में खुले में बिकने वाली अन्य खाद्य सामग्री (जैसे चाट, ठेले का सामान आदि) पर ये मक्खियां बैठती हैं, जिससे बाजार आने वाले लोग भी फूड पॉइजनिंग का शिकार हो रहे हैं।

स्थानीय निवासियों की पीड़ा और प्रशासन की उदासीनता

इस गंभीर समस्या से त्रस्त होकर स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने कई बार संबंधित विभागों के अधिकारियों के समक्ष अपनी आवाज उठਾਈ है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल: स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत/नगर परिषद के अधिकारियों को इस बात की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद वे आंखें मूंदकर बैठे हुए हैं।

दुकानदारों की मनमानी: बिना किसी वाटर ट्रीटमेंट या वेस्ट डिस्पोजल व्यवस्था के चल रही इन दुकानों पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं होने के कारण दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं।

सख्त कार्रवाई की मांग: आक्रोशित ग्रामीणों और यात्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बस पड़ाव के आसपास सफाई अभियान चलाकर इन दुकानों को व्यवस्थित नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर जोरदार आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

समाधान की रूपरेखा और स्वच्छता के मानक

इस प्रकार की समस्याओं का स्थाई समाधान केवल प्रशासनिक सख्ती और जागरूकता के माध्यम से ही संभव है।

दुकानों का विस्थापन या वेंडिंग जोन: प्रशासन को चाहिए कि इन मांस-मछली की दुकानों के लिए बाजार से हटकर एक निश्चित 'वेंडिंग जोन' (Vending Zone) या आधुनिक बाजार परिसर का निर्माण कराए, जहां कचरे के निस्तारण की उचित व्यवस्था हो।

नियमित साफ-सफाई और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव: जब तक वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होती, तब तक पंचायत या नगर प्रशासन द्वारा रोजाना सुबह-शाम उस क्षेत्र में फिनाइल और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाए।

जानकीनगर के चोपड़ा बाजार बस पड़ाव के समीप मांस-मछली की दुकानों से फैलने वाला कचरा और गंदा पानी एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्यगत संकट का रूप ले चुका है। स्वच्छता अभियानों के दावों के बीच इस तरह की उपेक्षा प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलती है। समय की मांग है कि स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आए, इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकाले और नियमों की अनदेखी करने वाले दुकानदारों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करे, ताकि आम जनता और यात्रियों को इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।