कई जिलों में बारिश के आसार, कमजोर मानसून के बीच बढ़ी उमस और गर्मी
पटना। बिहार में 23 अगस्त को मौसम का मिजाज कई जगहों पर बदला हुआ रहने वाला है। राजधानी पटना समेत राज्य के कई हिस्सों में दिनभर बादलों की आवाजाही के बीच छिटपुट बारिश की संभावना है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार पश्चिमी और मध्य बिहार के कुछ जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा का असर देखने को मिल सकता है। वहीं, कई अन्य जिलों में भी स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है।
बिहार में इस मानसून सीजन में बारिश का प्रदर्शन सामान्य से कमजोर रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की सक्रियता में कमी का असर राज्य के कई जिलों में दिखाई दे रहा है। खास तौर पर बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियों की सक्रियता कम रहने से बिहार में व्यापक बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ा है। हालांकि अगस्त के अंतिम सप्ताह में कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधि बढ़ने की उम्मीद है, जिससे बारिश की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।
कई जिलों में बारिश और तेज हवा की संभावना
23 अगस्त को बिहार के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मौसम अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, अरवल और औरंगाबाद समेत कई जिलों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवा की संभावना बताई गई है। कुछ पूर्वानुमानों में इन इलाकों के लिए भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।
इसके अलावा सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, कटिहार, वैशाली, समस्तीपुर, पटना, नालंदा, नवादा और गया जैसे जिलों में भी बादल छाए रहने और कहीं-कहीं बारिश होने की संभावना है। उत्तर और दक्षिण बिहार में मौसम की गतिविधियों में स्थानीय स्तर पर अंतर देखने को मिल सकता है।
पटना में बादलों की आवाजाही के बीच बारिश
राजधानी पटना में शनिवार को दिनभर उमस भरी गर्मी के बाद रात में बारिश होने से लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को भी पटना में बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश हो सकती है। शहर में अधिकतम तापमान करीब 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।
बारिश होने पर तापमान में थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन बारिश के बाद उमस बढ़ने की संभावना भी बनी रहेगी। इसका कारण वातावरण में नमी की अधिक मात्रा और स्थानीय स्तर पर बादलों का निर्माण है। ऐसे मौसम में कुछ समय के लिए गर्मी कम महसूस होती है, लेकिन बारिश रुकने के बाद उमस लोगों को परेशान कर सकती है।
मानसून कमजोर रहने से बारिश में कमी
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल बिहार में मानसून की सक्रियता कई चरणों में कमजोर रही है। ग्रामीण मौसम विज्ञान केंद्र, पूसा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अब्दुस सत्तार के अनुसार मानसून की कमजोर गतिविधि के पीछे बड़े मौसमी कारकों की भूमिका है। खासकर बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मानसूनी प्रणालियों में कमी का असर बिहार की बारिश पर पड़ा है।
बिहार के लिए बंगाल की खाड़ी से आने वाली मौसम प्रणालियां काफी महत्वपूर्ण होती हैं। जब खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र या अन्य मानसूनी सिस्टम बनते हैं और वे बिहार की ओर बढ़ते हैं, तो राज्य के बड़े हिस्से में बारिश होती है। लेकिन जब ऐसी प्रणालियों की संख्या या ताकत कम रहती है, तो बारिश भी सीमित क्षेत्रों में सिमट सकती है। यही स्थिति इस मानसून में कई बार देखने को मिली है।
अलनीनो का प्रभाव और मानसून की स्थिति
मौसम विशेषज्ञों ने इस साल मानसून की कमजोर स्थिति को अलनीनो के प्रभाव से भी जोड़कर देखा है। हालांकि किसी एक मौसम घटना को पूरी तरह किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होता, लेकिन समुद्र और वायुमंडल की वैश्विक परिस्थितियां भारतीय मानसून की गतिविधि को प्रभावित कर सकती हैं। हालिया मौसम विश्लेषणों में भी अलनीनो और हिंद महासागर की स्थितियों को लेकर मानसून के लिए अनिश्चितता की चर्चा की गई है।
बिहार में इसका असर खासतौर पर कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। राज्य की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और धान समेत खरीफ फसलों के लिए मानसूनी बारिश महत्वपूर्ण होती है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने पर किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।
अगस्त के अंतिम सप्ताह में सुधार की उम्मीद
कमजोर मानसून के बावजूद मौसम विशेषज्ञों ने अगस्त के अंतिम सप्ताह में कुछ दिनों तक अच्छी बारिश की संभावना जताई है। इससे राज्य में बारिश के आंकड़े में कुछ सुधार हो सकता है। हालांकि इसके बाद सितंबर में फिर से बारिश की गतिविधि कमजोर होने की आशंका भी व्यक्त की गई है।
मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमानों में 22 से 26 अगस्त के बीच बिहार के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई गई है। 24 अगस्त को समस्तीपुर, सुपौल, वैशाली, बेगूसराय, खगड़िया, लखीसराय और नालंदा जैसे जिलों में भारी बारिश की संभावना बताई गई है। इसका मतलब है कि अगले कुछ दिनों में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम लगातार बदल सकता है।
किसानों के लिए बारिश महत्वपूर्ण
बिहार के किसानों के लिए अगस्त की बारिश काफी महत्वपूर्ण है। धान की फसल के विकास के दौरान पर्याप्त नमी की आवश्यकता होती है। बारिश की कमी होने पर खेतों में सिंचाई की जरूरत बढ़ जाती है। वहीं, बहुत अधिक बारिश होने पर निचले इलाकों में जलभराव और फसल को नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है।
भागलपुर कृषि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार कम वर्षा की स्थिति में धान के खेतों में खर-पतवार तेजी से बढ़ सकते हैं, जिससे किसानों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इसलिए किसानों के लिए आने वाले दिनों के मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी है।
बारिश के साथ वज्रपात से सावधानी जरूरी
बारिश के दौरान कई जिलों में गरज-चमक और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना है। ऐसे में लोगों को खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचना चाहिए। खेतों में काम कर रहे किसानों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
बिजली चमकने के दौरान पेड़, बिजली के खंभे और खुले मैदान के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। मौसम खराब होने पर स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना जरूरी है।
नदियों के जलस्तर पर भी नजर
बिहार में बारिश का संबंध नदियों के जलस्तर से भी है। राज्य में गंगा समेत कई प्रमुख नदियां बारिश के दौरान तेजी से बढ़ सकती हैं। 23 अगस्त को गंगा के जलस्तर में वृद्धि से कई इलाकों में चिंता भी बनी हुई है। पटना समेत कुछ स्थानों पर नदी के बढ़ते जलस्तर का असर घाटों और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है।
इसलिए अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश को केवल गर्मी से राहत के रूप में नहीं देखा जा सकता। जहां कम बारिश से राहत मिलेगी, वहीं नदी किनारे और निचले इलाकों में अधिक बारिश होने पर जलभराव तथा बाढ़ जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।
आगे कैसा रहेगा मौसम?
23 अगस्त के बाद भी बिहार में बारिश की गतिविधि पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं। पूर्वानुमानों के मुताबिक 24 से 26 अगस्त के बीच अलग-अलग जिलों में बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद भी कुछ हिस्सों में छिटपुट बारिश की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर बिहार में इस समय मौसम दोहरी स्थिति दिखा रहा है। एक ओर मानसून की व्यापक सक्रियता कमजोर है और बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है, तो दूसरी ओर स्थानीय मौसम प्रणालियों के कारण कई जिलों में अचानक बारिश, तेज हवा और गरज-चमक देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी और क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों की गतिविधि यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि बिहार में मानसून कितना सक्रिय रहता है।
23 अगस्त को बिहार के कई जिलों में बारिश की संभावना के बीच लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। पश्चिमी और मध्य बिहार के कुछ जिलों में भारी बारिश, तेज हवा और वज्रपात को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। वहीं किसानों के लिए अगस्त के अंतिम सप्ताह की बारिश महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। कमजोर मानसून के बीच यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होती है तो राज्य में वर्षा की कमी कुछ कम हो सकती है, लेकिन सितंबर के मौसम को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है। इसलिए लोगों और किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान तथा प्रशासन की चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए।