टीएमबीयू में अतिथि शिक्षकों के मानदेय और बकाया भुगतान को लेकर बढ़ा आक्रोश; यूनिवर्सिटी विभागों और अंगीभूत कॉलेजों में संघ ने उठाई आवाज, प्रशासन पर टालमटोल का आरोप
भागलपुर, वरीय संवाददाता: सिल्क सिटी के प्रतिष्ठित तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर में एक बार फिर शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न अंगीभूत इकाइयों (Constituent Colleges), स्नातकोत्तर विभागों और अतिथि शिक्षक संघ (Guest Faculty Association) के बैनર तले गुरुवार को एक अहम बैठक आयोजित की गई और जोरदार प्रदर्शन किया गया। अतिथि शिक्षकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनके लंबे समय से लंबित मानदेय भुगतान और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षकों का कहना है कि महीनों से मानदेय न मिलने के कारण उनके समक्ष भुखमरी और आर्थिक तंगी की विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रबंधन सिर्फ आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं कर रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, TMBU के अंतर्गत संचालित कॉलेजों और विभागों में पढ़ाने वाले अतिथि शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय होती जा रही है:
महीनों से बकाया है मानदेय: अतिथि शिक्षकों का मुख्य दर्द यह है कि उन्हें पिछले कई महीनों से उनके अध्यापन कार्य के एवज में मिलने वाला मानदेय (Honorarium) नहीं मिला है। पर्व-त्योहारों के इस दौर में वेतन या मानदेय न मिलने से उनके परिवारों का गुजर-बसर करना मुश्किल हो गया है।
बजट और कागजी पेचीदगियों का रोना: शिक्षकों का आरोप है कि जब भी वे विश्वविद्यालय के वित्त विभाग या प्रशासनिक अधिकारियों से अपने बकाया भुगतान के संबंध में मिलते हैं, तो उन्हें हमेशा बजट की कमी या फाइलों के पेंडing होने का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। बार-बार के आश्वासनों के बावजूद धरातल पर भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है।
गुरुवार की बैठक में बनी आगे की रणनीति
गुरुवार को हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और कॉलेजों से आए दर्जनों अतिथि शिक्षक शामिल हुए:
आर-पार की लड़ाई का ऐलान: बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द से जल्द उनके बकाये मानदेय का भुगतान नहीं किया, तो वे शैक्षणिक कार्यों का बहिष्कार करने के लिए विवश हो जाएंगे।
ज्ञापन सौंपने की तैयारी: संघ के प्रतिनिधियों ने निर्णय लिया है कि वे इस संबंध में एक अंतिम ज्ञापन कुलपति (Vice-Chancellor) और कुलसचिव (Registrar) को सौंपेंगे, जिसमें भुगतान की एक निश्चित समय-सीमा तय करने की मांग की जाएगी।
अतिथि शिक्षकों की शैक्षणिक व्यवस्था में है अहम भूमिका
शिक्षाविदों और जानकारों का मानना है कि TMBU के अधिकांश कॉलेजों और विभागों में नियमित शिक्षकों की भारी कमी है:
रीढ़ हैं अतिथि शिक्षक: वर्तमान में विश्वविद्यालय और उसके अंगीभूत कॉलेजों की शैक्षणिक व्यवस्था काफी हद तक इन्हीं अतिथि शिक्षकों के कंधों पर टिकी हुई है। नियमित नियुक्तियों के अभाव में ये शिक्षक यूजी और पीजी कक्षाओं का संचालन पूरी निष्ठा से कर रहे हैं।
शोषण का आरोप: शिक्षकों का कहना है कि एक तरफ तो यूनिवर्सिटी उनसे नियमित शिक्षकों की तरह पूरा काम लेती है, लेकिन जब पारिश्रमिक देने की बारी आती है, तो उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है, जो पूरी तरह अनुचित है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और आश्वासन
मामले के तूल पकड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन हरकत में आया है:
शीघ्र भुगतान का दावा: TMBU के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान की फाइल प्रक्रियाधीन है। सरकार से मिलने वाले अनुदान और विश्वविद्यालय के आंतरिक स्रोतों से राशि आते ही सभी के खातों में आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से बकाया राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
संवेदनशीलता दिखाने की अपील: अधिकारियों ने शिक्षकों से संयम बरतने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।
भागलपुर के टीएमबीयू में अतिथि शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान को लेकर उठाया गया यह कदम विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया, तो आने वाले दिनों में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं, जिसका सीधा नुकसान छात्रों के भविष्य को उठाना पड़ेगा।