होल्डिंग टैक्स को लेकर राजद का सरकार पर हमला, अरुण कुमार यादव बोले- ग्रामीणों की जेब पर डाका डाल रही एनडीए सरकार
पटना: बिहार सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कर एवं दर शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। नई नियमावली के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों पर 50 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक होल्डिंग टैक्स लगाए जाने के प्रावधान को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ग्रामीण जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया।
अरुण कुमार यादव ने आरोप लगाया कि राज्य की एनडीए सरकार विकास के नाम पर लगातार जनता पर नए-नए करों का बोझ डाल रही है। उनका कहना है कि सरकार अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए ग्रामीण गरीबों और मध्यम वर्ग की जेब पर अतिरिक्त भार डाल रही है।
सरकार के फैसले पर राजद की कड़ी प्रतिक्रिया
राजद प्रवक्ता ने जारी बयान में कहा कि बिहार सरकार ने ग्राम पंचायत कर एवं दर शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी देकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर नया कर लगाने का रास्ता खोल दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती जीवन-यापन लागत से आम लोग पहले ही परेशान हैं।
"गरीबों की जेब पर डाका"
अरुण कुमार यादव ने कहा कि एनडीए सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और अब राजस्व बढ़ाने के लिए गांवों के गरीब लोगों पर आर्थिक बोझ डाल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीति अब जनकल्याण की बजाय टैक्स वसूली तक सीमित होती जा रही है।
किन-किन संपत्तियों पर टैक्स का जिक्र
राजद नेता ने दावा किया कि नई व्यवस्था के तहत विभिन्न प्रकार की संपत्तियों और प्रतिष्ठानों पर कर लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि इसमें कथित तौर पर शामिल हैं—
- अर्द्ध पक्का मकान
- पक्का मकान
- जलापूर्ति सुविधाएं
- सफाई सेवाएं
- पेट्रोल पंप
- रसोई गैस एजेंसियां
- ईंट-भट्ठे (ईंट चिमनी)
- सिनेमा हॉल
- अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान
उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
पहले भी लगाए गए शुल्कों का किया जिक्र
राजद प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि सरकार पहले ही बिजली, सड़क, परिवहन और विभिन्न सरकारी सेवाओं पर शुल्क बढ़ा चुकी है।
उनका कहना था कि अब होल्डिंग टैक्स के माध्यम से सरकार एक बार फिर आम जनता से अतिरिक्त राशि वसूलना चाहती है।
सरकार का संभावित पक्ष
हालांकि, इस बयान में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सामान्यतः स्थानीय निकायों द्वारा संपत्ति कर या होल्डिंग टैक्स का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़क रखरखाव और अन्य नागरिक सुविधाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना होता है। नई नियमावली के उद्देश्य और उसके क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत जानकारी सरकार द्वारा जारी अधिसूचना और दिशा-निर्देशों में स्पष्ट होगी।
राजनीतिक बहस तेज
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत कर से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में प्रमुख विषय बन सकता है।
विपक्ष जहां इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रहा है, वहीं सरकार इस व्यवस्था को स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया कदम बता सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव
यदि नियमावली के प्रावधान लागू होते हैं, तो पंचायत स्तर पर संपत्तियों का वर्गीकरण, कर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया शुरू होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नई कर व्यवस्था की सफलता उसके पारदर्शी और न्यायसंगत क्रियान्वयन पर निर्भर करती है।
जनता की प्रतिक्रियाएं
नई नियमावली को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा शुरू हो गई है।
कुछ लोग इसे पंचायतों की आय बढ़ाने का माध्यम मान रहे हैं, जबकि कई लोग संभावित आर्थिक बोझ को लेकर चिंता भी जता रहे हैं।
विपक्ष का आंदोलन का संकेत
राजद नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं करती है, तो विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगा और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगा।
हालांकि, आंदोलन या विरोध कार्यक्रम को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
बिहार सरकार द्वारा ग्राम पंचायत कर एवं दर शुल्क नियमावली-2026 को मंजूरी मिलने के बाद राजद के प्रदेश प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में 50 रुपये से 5,000 रुपये तक होल्डिंग टैक्स लगाने का फैसला आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस आलोचना पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है।