सहरसा: 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत जिला मुख्यालय में आयोजित हुआ भव्य सामूहिक वंदे मातरम् गायन; डीएम की अध्यक्षता में अधिकारियों और कर्मियों ने भरी देशभक्ति की हुंकार

सहरसा (बिहार): स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मनाए जाने वाले राष्ट्रीय उत्सव को लेकर बिहार के सहरसा जिले में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। भारत सरकार के बहुचर्चित 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत सहरसा में एक विशेष और प्रेरणादायक सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम में जिले के सभी वरीय पदाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न विभागों के कर्मियों ने पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ भाग लिया।

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, इस गरिमामयी आयोजन ने पूरे प्रशासनिक परिसर में राष्ट्रप्रेम की एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। आइए जानते हैं इस कार्यक्रम के मुख्य बिंदुओं और आयोजनों का एक विस्तृत विश्लेषण।

सामूहिक वंदे मातरम् गायन और देशभक्ति का माहौल

राष्ट्रगीत के स्वर गूंजते ही पूरा सभागार और प्रशासनिक परिसर देशप्रेम की भावना से सराबोर हो गया।

जिलाधिकारी की अगुवाई: जिलाधिकारी की सीधी देखरेख और अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में सभी ने एक स्वर में 'वंदे मातरम्' का गान किया।

अधिकारियों और कर्मियों की सहभागिता: कार्यक्रम में केवल प्रशासनिक अमला ही नहीं, बल्कि विभिन्न शाखाओं के सैकड़ों कर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे सामूहिक एकता और राष्ट्रीय गौरव का अनूठा उदाहरण देखने को मिला।

 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' का संदेश

इस अभियान के माध्यम से नागरिकों के दिलों में राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान और देश की एकता को मजबूत करने का संदेश दिया जा रहा है।

अभियान की रूपरेखा: सरकार के इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत जिले भर में तिरंगा यात्रा, जागरूकता रैलियां और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है।

जन-भागीदारी का आह्वान: इस अवसर पर अधिकारियों ने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराकर इस राष्ट्रीय पर्व को उत्सव के रूप में मनाएं।

सहरसा में 'हर घर तिरंगा अभियान 2026' के तहत आयोजित यह सामूहिक वंदे मातरम् गायन कार्यक्रम प्रशासनिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रभक्ति का एक बेहतरीन उदाहरण है। इस प्रकार के आयोजन न केवल नागरिकों के भीतर देशप्रेम की भावना को प्रगाढ़ करते हैं, बल्कि राष्ट्रीय पर्वों की गरिमा को भी और अधिक बढ़ाते हैं।