नगर पंचायत प्रशासन की वादाखिलाफी से भड़के सफाईकर्मी और कर्मचारी; तीन माह सात दिन का वेतन देने पर सहमति बनने के बाद भी समाधान न निकलने से आक्रोश गहराया
भागलपुर/बिहार, कार्यालय संवाददाता: स्थानीय नगर निकायों में कार्यरत सफाई कर्मियों, दैनिक वेतन भोगी मजदूरों और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के आर्थिक शोषण और प्रशासनिक उपेक्षा का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। लंबे समय से अपने बकाए वेतन की मांग को लेकर संघर्षरत कर्मचारियों और नगर पंचायत प्रशासन के बीच कई दौर की बैठकों और वार्ताओं के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। हालांकि, हालिया बैठकों में नगर पंचायत प्रशासन द्वारा तीन माह सात दिन (3 महीने और 7 दिन) के बकाए वेतन का भुगतान करने पर सहमति जताई गई थी, इसके बावजूद धरातल पर प्रक्रिया आगे न बढ़ने के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। वेतन न मिलने से भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
क्या है पूरा मामला और वेतन भुगतान का विवाद?
नगरीय व्यवस्था को स्वच्छ और सुचारू बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले सफाई कर्मियों और कर्मचारियों का जीवन इन दिनों भारी आर्थिक संकट से गुजर रहा है:
महीनों से बकाया है वेतन: प्राप्त जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों और कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले कई महीनों से नियमित रूप से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इसके चलते उनके परिवारों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया और बीमार परिजनों की दवाइयों का खर्च चलाना असंभव हो गया है।
प्रशासनिक आश्वासन और सहमति: कर्मचारियों के लगातार विरोध प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार की चेतावनी के बाद हरकत में आए नगर पंचायत प्रशासन ने यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में लंबी चर्चा के बाद प्रशासन ने कुल बकाए में से तीन माह सात दिन के वेतन का तुरंत भुगतान करने पर अपनी रजामंदी दी थी।
सहमति के बाद भी भुगतान में हीला-हवाली से बढ़ा असंतोष
प्रशासन की ओर से लिखित या मौखिक रूप से सहमति बनने के बावजूद जब तय समय सीमा के भीतर कर्मचारियों के बैंक खातों में पैसे नहीं पहुंचे, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया:
कागजी आश्वासन बनकर रह गया समझौता: कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि नगर पंचायत प्रशासन केवल बैठकों के माध्यम से आंदोलन को शांत करने की रणनीति अपनाता है। अधिकारियों द्वारा बार-बार झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जब भुगतान की बारी आती है, तो प्रशासनिक लालफीताशाही और फंड की कमी का रोना रोया जाने लगता है।
त्योहारों और रोजमर्रा के खर्चों पर असर: वर्तमान महंगाई के दौर में पिछले कई महीनों से खाली हाथ बैठे इन कर्मचारियों के लिए जीवनयापन करना दूभर हो गया है। उधार लेकर घर चलाने वाले ये मजदूर अब कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
कर्मचारियों की दो टूक: या तो भुगतान हो, या होगा अनिश्चितकालीन हड़ताल
धैर्य का बांध टूटने के बाद अब नगर पंचायत के कर्मचारियों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है:
यूनियन की चेतावनी: सफाई मजदूर संघ और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि प्रशासन यदि अपनी वादाखिलाफी से बाज नहीं आया और जल्द से जल्द तीन महीने सात दिन के बकाए वेतन का भुगतान नहीं किया, तो वे कामकाज पूरी तरह ठप कर देंगे।
सड़कों पर उतरने की तैयारी: कर्मचारी नगर पंचायत कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन करने और शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह बाधित करने की रणनीति बना रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पक्का और स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।
नगर पंचायत प्रशासन द्वारा तीन माह सात दिन का वेतन देने पर राजी होने के बावजूद भुगतान न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। यदि समय रहते इस गंभीर मसले का समाधान नहीं निकाला गया, तो शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है और प्रशासनिक व कर्मचारियों के बीच का यह टकराव एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।