सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्हौला में 'निश्चय पोषण आहार' योजना के तहत विशेष कार्यक्रम का आयोजन; टीबी रोगियों के बीच पोषण सामग्री और वित्तीय सहायता वितरण को लेकर स्वास्थ्य प्रशासन सख्त और सक्रिय
भागलपुर/सन्हौला, संवाद सूत्र: देश को तपेदिक (टीबी) मुक्त बनाने के सरकार के संकल्प को जमीन पर उतारने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सन्हौला में 'निश्चय पोषण आहार' योजना (निक्षय पोषण योजना) के तहत एक विशेष स्वास्थ्य शिविर एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चिन्हित टीबी (Tuberculosis) के मरीजों को बेहतर पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराना और उनके इलाज की प्रक्रिया को सुगम बनाना रहा, ताकि कुपोषण की वजह से टीबी के इलाज में आने वाली बाधाओं को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
निश्चय पोषण योजना और इसका महत्व: गंभीर बीमारी के खिलाफ जंग
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी जैसी गंभीर और संक्रामक बीमारी से लड़ने के लिए केवल दवाइयां ही काफी नहीं हैं, बल्कि इसके लिए शरीर को उच्च कोटि के पोषण की भी उतनी ही आवश्यकता होती है:
पोषण और इलाज का तालमेल: कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि अक्सर आर्थिक तंगी और गरीबी के कारण टीबी मरीज नियमित और पौष्टिक आहार नहीं ले पाते हैं, जिससे उनका शरीर कमजोर हो जाता है और दवाइयां भी ठीक से असर नहीं कर पाती हैं।
योजना का उद्देश्य: सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना के तहत हर पंजीकृत टीबी रोगी को उनके संपूर्ण उपचार की अवधि के दौरान पौष्टिक आहार खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और पोषण सामग्री सीधे तौर पर उपलब्ध कराई जाती है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्हौला में विशेष पहल
सन्हौला अस्पताल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों ने मिलकर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए टीबी रोगियों की स्थिति की समीक्षा की:
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और सहायता: अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधकों ने बताया कि निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत सभी अधिसूचित टीबी रोगियों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सहायता राशि भेजी जा रही है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी मरीजों को समय पर दवा किट और पोषण संबंधी परामर्श दिया जा रहा है।
रोगी पंजीकरण की प्रक्रिया: शिविर में वैसे नए मरीजों की भी पहचान की गई जिनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उनके दस्तावेज और बैंक खाते की जानकारी 'निक्षय पोर्टल' पर अपडेट की गई, ताकि उन्हें बिना किसी विलंब के इस योजना का लाभ मिल सके।
चिकित्सा अधिकारियों के निर्देश और परामर्श
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्हौला के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य कर्मियों और एएनएम को कड़ी हिदायत दी कि वे अपने-अपने क्षेत्र के टीबी मरीजों से लगातार संपर्क में रहें:
दवा की नियमितता पर जोर: अधिकारियों ने मरीजों से अपील करते हुए कहा कि वे बीच में दवा बिल्कुल न छोड़ें। नियमित रूप से पूरी खुराक लेने पर टीबी पूरी तरह ठीक हो जाती है।
खान-पान का विशेष ख्याल: मरीजों को समझाया गया कि वे सरकारी सहायता राशि का उपयोग केवल पौष्टिक खान-पान (जैसे दूध, अंडे, हरी सब्जियां, फल और दालें) के लिए ही करें, जिससे उनका इम्यून सिस्टम मजबूत हो सके।
ग्रामीणों और मरीजों में दिखा सकारात्मक उत्साह
सन्हौला अस्पताल में आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन की इस पहल की सराहना की:
मरीजों की प्रतिक्रिया: कई मरीजों ने बताया कि समय पर मिलने वाली सलाह और पोषण सहायता से उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। पहले जहां उन्हें कमजोरी और थकान महसूस होती थी, वहीं अब वे खुद को पहले से काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं।
स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका: क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं और टीबी समन्वयकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी टीबी मरीज योजना के लाभ से वंचित न रहे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सन्हौला में 'निश्चय पोषण आहार' योजना के तहत आयोजित यह कार्यक्रम ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और टीबी उन्मूलन की दिशा में एक ठोस कदम है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य और पोषण की पहुंच सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक स्वस्थ समाज का सपना पूरा नहीं हो सकता। सन्हौला अस्पताल की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्र को टीबी मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।