कहलगांव नगर पंचायत में पेयजल संकट से त्रस्त पहाड़ी क्षेत्र के चार वार्ड मूलभूत सुविधा के लिए तरस रहे लोग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता पर फूटा गुस्सा

भागलपुर : सूबे के शहरी क्षेत्रों में हर घर नल का जल पहुंचाने और बुनियादी सुविधाओं के विकास के तमाम दावों के बीच भागलपुर जिले का ऐतिहासिक कहलगांव शहर एक गंभीर और शर्मनाक सच्चाई से जूझ रहा है। कहलगांव नगर पंचायत (नपं) के अंतर्गत आने वाले पहाड़ी क्षेत्र के चार वार्डों में पिछले लंबे समय से पेयजल जैसी निहायत मूलभूत और जीवनरक्षक सुविधा का घोर अभाव बना हुआ है। तपती धूप और उमस भरे मौसम के बीच पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे स्थानीय नागरिकों का गुस्सा अब धीरे-धीरे फूटने लगा है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रितिनिधियों के तमाम वादों के बावजूद इन पहाड़ी वार्डों में पाइपलाइन और जलापूर्ति के पुख्ता इंतजाम न हो पाने के कारण आम जनता नारकीय जीवन जीने को विवश है।

क्या है समस्या और किन वार्डों की स्थिति है सबसे दयनीय?

कहलगांव नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत पहाड़ी की ढलानों और ऊपरी हिस्सों में बसे चार वार्डों के निवासियों की यह पुरानी और नासूर बन चुकी समस्या है:

पेयजल संकट की भीषण मार: इन पहाड़ी वार्डों में न तो नियमित जलापूर्ति की कोई कारगर व्यवस्था है और न ही बोरिंग या चापाकल काम कर रहे हैं। भू-जल स्तर नीचे चले जाने और ऊंचाई पर होने के कारण पारंपरिक जल स्रोत भी पूरी तरह सूख चुके हैं।

मीलों दूर से पानी ढोने की मजबूरी: महिलाओं और बच्चों को रोज सुबह-शाम मीलों दूर नीचे से सिर पर पानी ढोकर अपने घरों तक लाना पड़ता है। कई परिवारों को महंगे दामों पर प्राइवेट टैंकरों या अन्य माध्यमों से पानी खरीदना पड़ रहा है।

विकास के दावों की पोल: सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में करोड़ों रुपये खर्च कर हर घर जल योजना के बड़े-बड़े होर्डिंग और दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन भौगोलिक कठिनाइयों का हवाला देकर इन पहाड़ी वार्डों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है।

स्थानीय जनता और बुद्धिजीवियों का आक्रोश

बुनियादी हक से वंचित इन चारों वार्डों के निवासियों में नगर पंचायत प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है:

प्रतिनिधियों की बेरुखी: स्थानीय लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे और आश्वासन देने वाले जनप्रतिनिधि जीत हासिल करने के बाद इन पहाड़ी इलाकों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखते हैं।

अधिकारियों की कागजी औपचारिकताएं: नगर पंचायत कार्यालय में कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाई जाती है, जमीन पर राहत के नाम पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है।

जीवनयापन पर संकट: पानी जैसी बुनियादी जरूरत के अभाव में इन वार्डों में रहना दूभर हो गया है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित होने लगा है।

प्रशासनिक लापरवाही और समाधान की मांग

भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए विशेष तकनीकी प्रयास की आवश्यकता होती है, जिसकी यहाँ भारी कमी खटक रही है:

पंप हाउस और ओवरहैड टैंक की दरकार: जानकारों का मानना है कि यदि पहाड़ी इलाकों के लिए विशेष हाई-प्रेशर मोटर पंप और ओवरहैड टैंक का निर्माण कराया जाए, तो इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।

अल्टीमेटम और चेतावनी: यदि आने वाले कुछ दिनों में नगर पंचायत प्रशासन ने युद्धस्तर पर टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति शुरू नहीं की और पाइपलाइन विस्तार का काम तेज नहीं किया, तो ग्रामीण और वार्डवासी उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

कहलगांव नगर पंचायत के पहाड़ी क्षेत्र के चार वार्डों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव होना विकास के तमाम दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। एक तरफ जहां सरकार स्मार्ट सिटी और जल-जीवन हरियाली की बात करती है, वहीं कहलगांव की इन पहाड़ियों पर बसे नागरिकों का पानी के लिए संघर्ष करना प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले पर कब नींद से जागते हैं और कब इन प्यासे वार्डों तक पानी की बूंद पहुंच पाती है।