बिहार के मदरसों में अब AI, ड्रोन और रोबोटिक्स की पढ़ाई, 3588 संस्थानों में कौशल विकास प्रशिक्षण की तैयारी; युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर जोर
पटना। बिहार में मदरसा शिक्षा को आधुनिक कौशल और रोजगारपरक प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में नई पहल की तैयारी है। राज्य सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने की योजना बना रही है। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन तकनीक, कोडिंग, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर शिक्षा और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे क्षेत्रों में कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
आपके दिए विवरण के अनुसार यह कार्यक्रम बिहार के 3588 मदरसों में लागू करने की तैयारी है। इनमें 1942 अनुदान प्राप्त और 1646 गैर-अनुदानित मदरसे बताए गए हैं। योजना का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें आगे चलकर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना भी है।
हालांकि, इस विशेष योजना के सभी आंकड़ों और प्रस्तावित NSIC समझौते की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं मिली है। इसलिए 3588 मदरसों और अगले सप्ताह होने वाले MoU से जुड़े आंकड़ों को संबंधित विभाग के आधिकारिक आदेश के आधार पर अंतिम रूप से प्रकाशित करना उचित होगा। केंद्र और बिहार सरकार की ओर से 2026 में कौशल विकास के क्षेत्र में कई नई पहल जरूर हुई हैं। जुलाई 2026 में बिहार सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने पटना में Skill India International Centre के लिए MoU का आदान-प्रदान किया था।
मदरसा शिक्षा में आधुनिक कौशल का प्रवेश
बदलते रोजगार बाजार में केवल पारंपरिक शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। तकनीक तेजी से बदल रही है और उद्योगों में AI, डेटा, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बढ़ रही है।
ऐसे में मदरसों के विद्यार्थियों को भी आधुनिक तकनीकी कौशल से जोड़ने की कोशिश को शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी कम करने वाली पहल के रूप में देखा जा सकता है।
योजना के तहत विद्यार्थियों को उनकी रुचि और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं के आधार पर अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जा सकती है। इससे पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के सामने नौकरी, अप्रेंटिसशिप और स्वरोजगार के नए विकल्प खुल सकते हैं।
3588 मदरसों को जोड़ने की तैयारी
विभागीय जानकारी के अनुसार प्रस्तावित कौशल विकास कार्यक्रम को राज्य के सभी 3588 मदरसों तक पहुंचाने की योजना है। इनमें 1942 अनुदान प्राप्त और 1646 गैर-अनुदानित मदरसे शामिल बताए गए हैं।
अगर इतने बड़े नेटवर्क में आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा का अवसर मिल सकता है।
इस योजना की सफलता के लिए केवल पाठ्यक्रम तय करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रत्येक मदरसे में प्रशिक्षक, कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रयोगशाला, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और संबंधित ट्रेड के लिए जरूरी प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
AI से लेकर ड्रोन तकनीक तक प्रशिक्षण
प्रस्तावित प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को प्रमुख क्षेत्रों में शामिल किया गया है। AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, कृषि, उद्योग और डिजिटल सेवाओं सहित कई क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है।
विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर AI की अवधारणाओं, डिजिटल टूल्स, डेटा और प्रोग्रामिंग से परिचित कराया जा सकता है।
इसी तरह ड्रोन तकनीक भी तेजी से रोजगार का क्षेत्र बन रही है। कृषि सर्वेक्षण, भूमि सर्वेक्षण, वीडियो मैपिंग, आपदा प्रबंधन और विभिन्न तकनीकी कार्यों में ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
ड्रोन प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को ड्रोन के संचालन, सुरक्षा, तकनीकी संरचना और संबंधित नियमों की जानकारी दी जा सकती है।
कोडिंग और रोबोटिक्स से बढ़ेगी तकनीकी समझ
कोडिंग और रोबोटिक्स विद्यार्थियों को समस्या समाधान और तार्किक सोच विकसित करने में मदद कर सकते हैं। शुरुआती स्तर पर प्रोग्रामिंग भाषाओं, बेसिक कंप्यूटर लॉजिक और छोटे तकनीकी प्रोजेक्ट के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
रोबोटिक्स के जरिए विद्यार्थी सेंसर, मोटर, माइक्रोकंट्रोलर और ऑटोमेशन जैसी तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकते हैं।
यदि मदरसों में ऐसे प्रैक्टिकल प्रशिक्षण की व्यवस्था होती है तो विद्यार्थियों को भविष्य में तकनीकी शिक्षा और उच्च अध्ययन के लिए भी बेहतर आधार मिल सकता है।
इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में रोजगार की संभावना
इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिकल सर्विसिंग से जुड़े कामों की जरूरत बढ़ रही है।
प्रस्तावित कार्यक्रम में इलेक्ट्रिक वाहन को शामिल करने का उद्देश्य विद्यार्थियों को इस उभरते क्षेत्र से जोड़ना हो सकता है।
प्रशिक्षण में इलेक्ट्रिक वाहन के बुनियादी सिस्टम, बैटरी, मोटर, चार्जिंग और सुरक्षा से संबंधित जानकारी दी जा सकती है। व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलने पर युवा सर्विसिंग, तकनीकी सहायता और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम कर सकते हैं।
मोबाइल रिपेयरिंग और कंप्यूटर शिक्षा भी शामिल
सभी विद्यार्थियों की रुचि हाई-टेक क्षेत्रों में हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए मोबाइल रिपेयरिंग और कंप्यूटर शिक्षा जैसे व्यावहारिक ट्रेड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
मोबाइल फोन का इस्तेमाल आज लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है और इसके कारण रिपेयरिंग तथा तकनीकी सेवा से जुड़े छोटे व्यवसायों की मांग बनी हुई है।
कंप्यूटर शिक्षा विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का आधार बन सकती है। बेसिक कंप्यूटर से आगे टाइपिंग, ऑफिस सॉफ्टवेयर, इंटरनेट, डिजिटल सेवाएं और शुरुआती प्रोग्रामिंग जैसे कौशल भी रोजगार में मददगार हो सकते हैं।
इलेक्ट्रिकल वायरिंग से स्वरोजगार का विकल्प
इलेक्ट्रिकल वायरिंग एक ऐसा ट्रेड है जिसमें स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं।
प्रशिक्षित युवा घरों, दुकानों और छोटे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में इलेक्ट्रिकल काम कर सकते हैं। अनुभव और प्रमाणन के साथ वे अपना काम भी शुरू कर सकते हैं।
इस तरह कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सरकारी या निजी नौकरी तक सीमित न होकर स्वरोजगार के अवसर पैदा करना भी हो सकता है।
रोजगार मेले लगाने की योजना
प्रस्तावित योजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी रोजगार से जोड़ना है। इसके लिए जिलों में रोजगार मेले आयोजित करने की बात कही गई है।
रोजगार मेले में प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को कंपनियों और संभावित नियोक्ताओं से सीधे संपर्क का अवसर मिल सकता है।
अगर प्रशिक्षण संस्थानों और कंपनियों के बीच पहले से समन्वय बनाया जाए तो विद्यार्थियों को उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देना आसान होगा। इससे प्रशिक्षण के बाद रोजगार पाने की संभावना भी बढ़ सकती है।
NSIC के सहयोग से प्रशिक्षण
आपके दिए विवरण के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम National Small Industries Corporation Limited यानी NSIC के सहयोग से चलाने की तैयारी है।
NSIC भारत सरकार का उपक्रम है और उसकी Technical Services Centres के माध्यम से हाई-टेक तथा पारंपरिक ट्रेड में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाता है। NSIC की आधिकारिक वेबसाइट भी उसके तकनीकी सेवा केंद्रों में हाई-टेक और पारंपरिक क्षेत्रों में skill development की जानकारी देती है।
NSIC पहले भी ड्रोन तकनीक सहित आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण को लेकर संस्थानों और कंपनियों के साथ सहयोग कर चुका है।
ऐसे में यदि बिहार के मदरसों में NSIC के तकनीकी नेटवर्क और विशेषज्ञता का इस्तेमाल होता है, तो प्रशिक्षण को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने में मदद मिल सकती है।
बिहार में पहले से बढ़ रहा आधुनिक कौशल प्रशिक्षण
बिहार में आधुनिक कौशल विकास को लेकर हाल के महीनों में कई पहल सामने आई हैं। जुलाई 2026 में बिहार सरकार और केंद्र के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने Skill India International Centre, Patna के लिए MoU का आदान-प्रदान किया। इस केंद्र का उद्देश्य बिहार के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार के लिए तैयार करना है।
इसी पहल के तहत भाषा प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय रोजगार परामर्श, प्रमाणन सहायता और सुरक्षित प्रवासन से जुड़ी सेवाओं की भी योजना है।
इससे संकेत मिलता है कि राज्य में कौशल विकास को केवल पारंपरिक ट्रेड तक सीमित रखने के बजाय उभरते रोजगार क्षेत्रों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
अल्पसंख्यक युवाओं के लिए AI प्रशिक्षण की पहल
अल्पसंख्यक युवाओं के आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण को लेकर केंद्र स्तर पर भी पहल हुई है। अप्रैल 2026 में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने PM VIKAS योजना के तहत IIT Patna के साथ MoU किया था। इसके तहत बिहार के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को AI Technocrat और Business Analytics Executive जैसे उभरते रोजगार क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने की जानकारी दी गई थी।
इस पृष्ठभूमि में मदरसा विद्यार्थियों के लिए AI, कोडिंग और अन्य तकनीकी ट्रेड को शामिल करने की पहल को व्यापक कौशल विकास रणनीति से जोड़कर देखा जा सकता है।
प्रशिक्षण की गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती
इतने बड़े स्तर पर कौशल विकास कार्यक्रम लागू करना आसान नहीं होगा। सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखना होगी।
यदि केवल नामांकन कराकर विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र दे दिया गया और वास्तविक व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं मिला, तो योजना का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
इसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक उपकरण, नियमित प्रैक्टिकल क्लास, उद्योग विशेषज्ञों के व्याख्यान और प्रशिक्षण के बाद मूल्यांकन जरूरी होगा।
मदरसा स्तर पर उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का भी आकलन करना होगा। जहां आवश्यक हो, वहां कंप्यूटर लैब और तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था करनी होगी।
प्रमाणपत्र और प्लेसमेंट पर जोर जरूरी
विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण तभी अधिक उपयोगी होगा जब उसे मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र और रोजगार के अवसर से जोड़ा जाए।
प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों को नौकरी के लिए आवेदन करने, इंटरव्यू देने और अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने की जानकारी भी दी जानी चाहिए।
अगर कंपनियों के साथ साझेदारी करके अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट की व्यवस्था बनाई जाती है, तो युवाओं को प्रशिक्षण से नौकरी तक पहुंचने का स्पष्ट रास्ता मिल सकता है।
लड़कियों के लिए भी अवसर
मदरसा शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी को देखते हुए कौशल विकास कार्यक्रम में लड़कियों के लिए भी समान अवसर उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा।
कंप्यूटर, कोडिंग, AI, डिजिटल सेवाओं और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में प्रशिक्षण छात्राओं के लिए घर से काम, फ्रीलांसिंग, डिजिटल उद्यमिता और नौकरी के नए विकल्प पैदा कर सकता है।
इसके लिए प्रशिक्षण केंद्रों पर सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा।
शिक्षा और रोजगार के बीच पुल
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह मदरसा शिक्षा को आधुनिक रोजगार बाजार की जरूरतों से जोड़ने की कोशिश करती है।
पारंपरिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर, AI, रोबोटिक्स, ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे क्षेत्रों का प्रशिक्षण विद्यार्थियों को बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं होगा कि पारंपरिक शिक्षा को समाप्त किया जाएगा। बल्कि कौशल विकास को अतिरिक्त और रोजगारपरक शिक्षा के रूप में विकसित किया जा सकता है।
भविष्य में और ट्रेड जुड़ सकते हैं
तकनीकी क्षेत्र लगातार बदल रहे हैं। आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा, डेटा एनालिटिक्स, सोलर टेक्नोलॉजी, डिजिटल मार्केटिंग और अन्य नए क्षेत्रों की मांग बढ़ सकती है।
इसलिए कौशल विकास कार्यक्रम को समय-समय पर अपडेट करना जरूरी होगा। पाठ्यक्रम को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए।
बिहार में NSTI (Women), Patna के प्रस्तावित पाठ्यक्रमों में AI और Programming Assistant, Drone Technician और Solar Technician जैसे उभरते ट्रेड शामिल किए गए हैं, जो राज्य में नए तकनीकी कौशल पर बढ़ते जोर को दर्शाता है।
बिहार के मदरसों में AI, ड्रोन तकनीक, कोडिंग, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण शुरू करने की प्रस्तावित योजना शिक्षा और रोजगार के बीच एक नया रास्ता खोल सकती है। आपके दिए विवरण के अनुसार यह पहल 3588 मदरसों, जिनमें 1942 अनुदान प्राप्त और 1646 गैर-अनुदानित मदरसे बताए गए हैं, तक पहुंचाने की तैयारी है।
प्रस्तावित प्रशिक्षण में AI, ड्रोन, कोडिंग, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर शिक्षा और इलेक्ट्रिकल वायरिंग जैसे ट्रेड शामिल होंगे। जिलों में रोजगार मेले आयोजित कर प्रशिक्षित युवाओं को कंपनियों और रोजगार के अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य भी बताया गया है।
हालांकि, 3588 मदरसों और संबंधित MoU से जुड़े विशिष्ट आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही उन्हें अंतिम तथ्य के रूप में प्रकाशित करना बेहतर होगा। दूसरी ओर, बिहार में आधुनिक कौशल प्रशिक्षण के विस्तार की दिशा में केंद्र और राज्य स्तर पर कई आधिकारिक पहल पहले से चल रही हैं।
यदि प्रस्तावित योजना में गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक लैब, प्रमाणपत्र, अप्रेंटिसशिप और वास्तविक प्लेसमेंट को प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है, तो यह बिहार के मदरसा विद्यार्थियों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। इससे अल्पसंख्यक समुदाय के युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप कौशल हासिल करने का अवसर मिलेगा।