NEET पेपर लीक, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और लाठीचार्ज के विरोध में बिहार बंद, कई जिलों में उग्र प्रदर्शन; पथराव के बाद पुलिस ने किया लाठीचार्ज
पटना: कथित NEET पेपर लीक मामले, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के विरोध में शनिवार को छात्र संगठनों के आह्वान पर बिहार बंद का व्यापक असर देखने को मिला। राजधानी पटना समेत राज्य के कई जिलों में छात्र बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पटना, छपरा, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और अन्य जिलों में छात्रों ने सड़क जाम, नारेबाजी और विरोध मार्च निकालकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
सुबह से ही बिहार के विभिन्न जिलों में छात्र संगठनों के कार्यकर्ता प्रमुख चौक-चौराहों, रेलवे स्टेशनों और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर जुटने लगे। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर कथित पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग की। छात्रों का कहना था कि लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत पर सवाल खड़े हो गए हैं और जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
राजधानी पटना में सुबह से ही कई प्रमुख मार्गों पर प्रदर्शन शुरू हो गया। बड़ी संख्या में छात्र डाकबंगला चौराहा, गांधी मैदान, अशोक राजपथ और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर पहुंचे। प्रदर्शन के कारण कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों और आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया और पुलिस को यातायात सामान्य कराने के लिए अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा।
छपरा में भी छात्रों ने सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच बहस के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ स्थानों पर पथराव की घटनाएं हुईं, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इसी प्रकार लखीसराय में भी प्रदर्शन उग्र होने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। कई जिलों से प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबरें सामने आईं।
बिहार बंद के कारण सार्वजनिक परिवहन पर भी असर पड़ा। कई बसों का संचालन प्रभावित हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने वाहनों को रोककर बंद का समर्थन करने की अपील की। रेलवे स्टेशनों के बाहर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। जिला प्रशासन ने पहले से ही संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की थी।
छात्र संगठनों का कहना है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में कथित अनियमितताओं ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है। उनका आरोप है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी होती, तो लाखों छात्रों को इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। प्रदर्शनकारी यह भी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक दलों की ओर से भी बिहार बंद को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आईं। विपक्षी दलों ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की। प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।
बिहार पुलिस ने राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी। संवेदनशील जिलों में अतिरिक्त पुलिस बल, रैपिड एक्शन टीम और दंगा नियंत्रण इकाइयों को तैनात किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने लगातार विभिन्न जिलों की स्थिति की निगरानी की और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए। सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ाई गई ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को फैलने से रोका जा सके।
प्रदर्शन के दौरान कई छात्र नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। उनका कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना छात्रों का विश्वास बहाल नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल सुरक्षा प्रणाली और पारदर्शी जांच व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी बिहार बंद का असर देखने को मिला। कई बाजार आंशिक रूप से बंद रहे, जबकि कुछ व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने सुरक्षा कारणों से अपने प्रतिष्ठान देर से खोले। आम लोगों ने भी प्रशासन से जल्द स्थिति सामान्य करने की अपील की ताकि दैनिक जीवन प्रभावित न हो।
फिलहाल राज्यभर में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। विभिन्न जिलों से मिल रही सूचनाओं के आधार पर पुलिस और जिला प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे हैं। छात्र संगठनों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
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