जीवन के नए चरण में कदम रख रहे छात्र भटकाव से बचें, सजग रहकर भविष्य निर्माण पर पूरी तरह केंद्रित करें ध्यान भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं को दिए सफलता के मूलमंत्र
भागलपुर : विद्यार्थी जीवन किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे स्वर्णिम और निर्णायक काल होता है। स्कूल की दहलीज लांघकर जब युवा उच्च शिक्षा यानी कॉलेज जीवन में प्रवेश करते हैं, तो उनके सामने स्वतंत्रता के साथ-साथ कई नई चुनौतियां और विचलनों (Distractions) का दौर भी शुरू होता है। इसी संदर्भ में भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (BCE) में आयोजित एक भव्य इंडक्शन सह एसआईपी (SIP) समापन समारोह के दौरान वक्ताओं ने छात्रों को अत्यंत महत्वपूर्ण सीख दी है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं भागलपुर की जिलाधिकारी डॉ. अलंकृता पांडेय ने युवा विद्यार्थियों को नसीहत देते हुए कहा कि अधिकांश छात्र पहली बार अपने घर और अभिभावकों के प्रत्यक्ष संरक्षण से दूर रहकर स्वतंत्र जीवन की शुरुआत करते हैं, ऐसे में उनके लिए यह बेहद जरूरी है कि वे कॉलेज जीवन में आने वाले तमाम नकारात्मक विचलनों से पूरी तरह सजग रहें और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित करें।
स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन की जरूरत
जिलाधिकारी डॉ. अलंकृता पांडेय ने अपने संबोधन में विस्तार से समझाया कि घर से दूर कॉलेज परिसरों में हॉस्टल या रूम लेकर रहने वाले छात्रों के पास असीमित स्वतंत्रता होती है, लेकिन यही स्वतंत्रता कई बार उन्हें सही मार्ग से भटका भी सकती है:
विचलनों से दूरी: आज के तकनीकी युग में सोशल मीडिया, इंटरनेट और अन्य भटकाव वाली चीजें युवाओं का कीमती समय बर्बाद कर रही हैं। छात्रों को यह समझना होगा कि उनका मुख्य उद्देश्य ज्ञान अर्जन और करियर बनाना है।
लक्ष्य पर एकाग्रता: कॉलेज के शुरुआती दिन यह तय करते हैं कि आपका आगामी चार साल का सफर कैसा होगा। इसलिए, हर छात्र को अपने अकादमिक लक्ष्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित और अनुशासित रहना चाहिए।
अभिभावकों से निरंतर संवाद क्यों है जरूरी?
कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि युवा कितने भी आधुनिक और व्यस्त क्यों न हो जाएं, उन्हें अपने परिवार और अभिभावकों से भावनात्मक दूरी नहीं बनानी चाहिए:
संवादहीनता से बचें: कॉलेज की व्यस्त दिनचर्या और तकनीकी चकाचौंध के बीच छात्रों को नियमित अंतराल पर अपने माता-पिता से बात करनी चाहिए।
अनुभवों और समस्याओं को साझा करना: जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों को अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियों, कॉलेज जीवन के नए अनुभवों और किसी भी प्रकार की मानसिक या व्यावहारिक समस्या को अपने अभिभावकों के साथ खुलकर साझा करना चाहिए। इससे न केवल उनका मानसिक तनाव कम होता है, बल्कि माता-पिता का मार्गदर्शन भी संकट के समय ढाल बनता है।
तकनीकी सत्र में साइबर सुरक्षा और अपराध से सतर्क रहने की अपील
समारोह के दौरान केवल शैक्षणिक और भविष्य निर्माण पर ही नहीं, बल्कि आज के डिजिटल दौर में युवाओं के सामने आने वाली सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी गंभीर चर्चा की गई:
साइबर डीएसपी की चेतावनी: कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में पहुंचे साइबर डीएसपी विनय रंजन ने छात्रों को आज के दौर के सबसे बड़े खतरे यानी साइबर अपराध और ऑनलाइन धोखाधड़ी (Cyber Fraud) के तौर-तरीकों से आगाह किया।
बचाव के व्यावहारिक उपाय: उन्होंने छात्रों को फिशिंग कॉल्स, फर्जी ऑनलाइन लिंक्स, सोशल मीडिया प्रलोभन और वित्तीय धोखाधड़ी से बचने के लिए कई जरूरी और व्यावहारिक तकनीकी टिप्स दिए। साइबर थानाध्यक्ष सन्नी कुमार ने भी छात्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी।
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग का महत्व
युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का मजबूत होना सबसे अनिवार्य शर्त है:
योग शिक्षक के टिप्स: कार्यक्रम में मौजूद योग शिक्षक अंशु सिंह ने छात्रों को अपने व्यस्त शेड्यूल में से कुछ समय योग और प्राणायाम के लिए निकालने की सलाह दी।
तनाव मुक्ति: उन्होंने बताया कि नियमित योग अभ्यास से न केवल स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ती है, बल्कि कॉलेज की पढ़ाई के दौरान होने वाले मानसिक तनाव और एंग्जायटी से भी मुकाबला करने में मदद मिलती है।
संस्थान के प्राचार्य और विशेषज्ञों के विचार
समारोह के दौरान भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ. विमलेश कुमार ने मुख्य अतिथि और अन्य वक्ताओं का स्वागत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों की रूपरेखा रखी। उन्होंने कहा कि संस्थान केवल इंजीनियर तैयार नहीं कर रहा है, बल्कि समाज को एक जिम्मेदार और पारंगत नागरिक देने का काम कर रहा है। तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. पुष्पेंद्र द्विवेदी ने भी छात्रों को अपने तकनीकी कौशल को निखारने और इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार खुद को ढालने के प्रेरित किया।
भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के इस मंच से उठी यह आवाज केवल एक संस्थान विशेष के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्र समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है। आज के तकनीकी और प्रतिस्पर्धी दौर में युवाओं के लिए यह बेहद आवश्यक है कि वे सोशल मीडिया और अन्य भटकाव वाली चीजों के मोहजाल से खुद को बचाएं, साइबर ठगी जैसी आधुनिक चुनौतियों के प्रति पूरी तरह सजग रहें और अपने माता-पिता के आशीर्वाद व संवाद को अपनी ताकत बनाते हुए अपने भविष्य के निर्माण पर पूरी ऊर्जा केंद्रित करें। यही संकल्प युवाओं को एक सफल पेशेवर और बेहतर इंसान बनाने में मददगार साबित होगा।