बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर सियासत तेज, जदयू का तंज—'लगता है ईरान-अमेरिका युद्ध खत्म करवाने गए हैं'
पटना: बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार अनुपस्थिति अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है। सत्ता पक्ष लगातार उनकी गैरमौजूदगी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर हमला बोल रहा है। इसी कड़ी में जनता दल (यूनाइटेड) ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि "लगता है तेजस्वी यादव ईरान-अमेरिका युद्ध खत्म करवाने के लिए गए हैं।"
जदयू के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है। विपक्ष जहां इसे सत्ता पक्ष की राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है, वहीं एनडीए के नेता इसे जनता के प्रति विपक्ष की जवाबदेही से जोड़ रहे हैं।
मानसून सत्र में गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय
बिहार विधानमंडल का मानसून सत्र कई महत्वपूर्ण मुद्दों के बीच चल रहा है। सरकार अनुपूरक बजट, विभिन्न विभागों के कार्यों और राज्य के विकास से जुड़े प्रस्ताव सदन में रख रही है। वहीं विपक्ष की ओर से कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, बाढ़, शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की उम्मीद थी।
लेकिन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। विधानसभा परिसर से लेकर मीडिया तक यही सवाल उठ रहा है कि आखिर विपक्ष के सबसे बड़े नेता सदन में क्यों नहीं पहुंच रहे हैं।
जदयू का तीखा हमला
तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी पर जदयू के नेताओं ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि ऐसा लगता है जैसे वह किसी अंतरराष्ट्रीय मिशन पर निकल गए हैं।
जदयू की ओर से कहा गया कि,
"लगता है तेजस्वी यादव ईरान-अमेरिका युद्ध खत्म करवाने गए हैं। बिहार की जनता ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी दी है, लेकिन वे सदन में दिखाई नहीं दे रहे हैं।"
पार्टी नेताओं ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां जनता के मुद्दे उठाने की जिम्मेदारी विपक्ष की होती है। यदि नेता प्रतिपक्ष ही मौजूद नहीं रहेंगे तो जनता के सवाल कौन उठाएगा।
जनता के मुद्दों से दूरी का आरोप
सत्ता पक्ष का कहना है कि बिहार इस समय कई अहम चुनौतियों का सामना कर रहा है। बाढ़, किसानों की समस्याएं, रोजगार, सड़क, बिजली और शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। ऐसे समय में नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति जनता के हितों की अनदेखी है।
एनडीए नेताओं ने कहा कि विपक्ष केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रह सकता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन के भीतर बहस करना सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।
राजद की ओर से क्या कहा गया?
राजद नेताओं ने सत्ता पक्ष के आरोपों को राजनीतिक ड्रामा करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि जदयू असली मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए व्यक्तिगत टिप्पणियां कर रही है।
राजद नेताओं का कहना है कि पार्टी जनता के मुद्दों को लगातार उठा रही है और सरकार को हर मोर्चे पर घेर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी नेता की अनुपस्थिति को लेकर अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
हालांकि तेजस्वी यादव की गैरहाजिरी के वास्तविक कारण को लेकर पार्टी की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक
मानसून सत्र के शुरुआती दिनों से ही सत्ता और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल रही है। विपक्ष सरकार को कानून-व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक मामलों पर घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपनी उपलब्धियों और विकास योजनाओं को सामने रख रही है।
ऐसे माहौल में नेता प्रतिपक्ष की अनुपस्थिति राजनीतिक रूप से और अधिक चर्चा का विषय बन गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा का सत्र किसी भी विपक्षी दल के लिए सरकार को घेरने का सबसे प्रभावी मंच होता है। यदि विपक्ष का प्रमुख चेहरा सदन में मौजूद नहीं रहता, तो सत्ता पक्ष को राजनीतिक हमला करने का अवसर मिल जाता है।
विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि तेजस्वी यादव सदन में शामिल होते हैं तो राजनीतिक बहस का केंद्र सरकार की नीतियां बन सकती हैं, लेकिन फिलहाल उनकी अनुपस्थिति ही सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
जदयू के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग सत्ता पक्ष के तंज का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे केवल राजनीतिक बयानबाजी बता रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक अपने-अपने तर्कों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नजर आए।
आगे क्या?
मानसून सत्र अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों तथा वित्तीय प्रस्तावों पर चर्चा होनी है। राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेजस्वी यादव आगामी बैठकों में सदन में शामिल होंगे या उनकी अनुपस्थिति को लेकर सत्ता पक्ष के हमले और तेज होंगे।
फिलहाल इतना तय है कि बिहार विधानसभा के इस मानसून सत्र में विकास, बजट और जनहित के मुद्दों के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष की गैरहाजिरी भी राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और अधिक गर्माहट ला सकता है।