गंगा नदी के कटाव को रोकने की कवायद तेज, जल संसाधन विभाग ने किया निरीक्षण; अक्टूबर से शुरू होगा स्थायी सुरक्षा कार्य

मोकामा (पटना): मोकामा के पूर्वी क्षेत्र में गंगा नदी के लगातार हो रहे भीषण कटाव को रोकने के लिए बिहार जल संसाधन विभाग ने अस्थायी बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। शनिवार को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। विभाग ने स्पष्ट किया कि गंगा नदी का जलस्तर घटने के बाद अक्टूबर माह से स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू किए जाएंगे, जिससे प्रभावित गांवों और कृषि भूमि को दीर्घकालिक सुरक्षा मिल सकेगी।

निरीक्षण का नेतृत्व जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता कुणाल ने किया। उनके साथ तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने सीआरपीएफ घाट क्षेत्र में चल रहे बचाव कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने लगभग दो किलोमीटर क्षेत्र में कटाव की स्थिति का विस्तृत आकलन किया, कार्यों की गुणवत्ता की समीक्षा की और मौके पर मौजूद अभियंताओं को आवश्यक निर्देश दिए।

गंगा के कटाव से बढ़ी लोगों की चिंता

मानसून के दौरान गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण मोकामा के पूर्वी इलाके में कटाव लगातार तेज हो गया है। नदी की धारा धीरे-धीरे किनारों को काटती हुई कृषि भूमि और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है।

इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के बीच भय और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो कई घर, खेत और सार्वजनिक संपत्तियां नदी में समा सकती हैं।

अधिकारियों ने किया विस्तृत निरीक्षण

शनिवार को विभागीय अधिकारियों ने कटाव प्रभावित पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। तकनीकी टीम ने नदी के बहाव, मिट्टी के कटाव और बचाव कार्यों की प्रगति का बारीकी से अध्ययन किया।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने उन स्थानों की भी पहचान की जहां कटाव का खतरा अधिक है और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की आवश्यकता हो सकती है।

बालू से भरी बोरियों से रोकी जा रही कटाव की रफ्तार

कार्यपालक अभियंता कुणाल ने बताया कि फिलहाल आपातकालीन व्यवस्था के तहत नदी में बालू से भरी बोरियां डाली जा रही हैं। इसका उद्देश्य गंगा की तेज धारा को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर मोड़ना और कटाव की गति को कम करना है।

उन्होंने कहा कि यह अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन मानसून के दौरान गांवों और खेतों को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह बेहद प्रभावी साबित हो रही है।

अक्टूबर से शुरू होगा स्थायी समाधान

जल संसाधन विभाग ने जानकारी दी कि मानसून समाप्त होने और गंगा का जलस्तर सामान्य होने के बाद अक्टूबर से स्थायी कटाव निरोधी परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा।

इस परियोजना के तहत आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से नदी तट को मजबूत किया जाएगा ताकि भविष्य में कटाव की समस्या को स्थायी रूप से नियंत्रित किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि स्थायी सुरक्षा कार्य पूरा होने के बाद इस क्षेत्र के लोगों को हर साल आने वाली कटाव की समस्या से काफी राहत मिलेगी।

हजारों लोगों को मिलेगा लाभ

स्थायी कटाव निरोधी परियोजना से मोकामा के पूर्वी क्षेत्र में रहने वाले हजारों लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस परियोजना से न केवल गांव सुरक्षित होंगे, बल्कि किसानों की बहुमूल्य कृषि भूमि भी बचाई जा सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष कटाव के कारण उनकी उपजाऊ जमीन नदी में समा जाती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

कृषि भूमि पर सबसे अधिक खतरा

गंगा नदी के लगातार कटाव का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर उपजाऊ खेत नदी की धारा में समा चुके हैं।

किसानों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं बनाई गई तो आने वाले वर्षों में खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।

लगातार होगी निगरानी

जल संसाधन विभाग ने बताया कि मानसून के पूरे मौसम में कटाव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाएगी।

तकनीकी टीमें नियमित रूप से निरीक्षण करेंगी और यदि कहीं कटाव की स्थिति गंभीर होती है तो तत्काल अतिरिक्त बचाव कार्य शुरू किए जाएंगे।

जिला प्रशासन भी सतर्क

जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग संयुक्त रूप से पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन तैयार रखे गए हैं। जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू किए जाएंगे।

ग्रामीणों ने जताई संतुष्टि

स्थानीय लोगों ने विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण और चल रहे बचाव कार्यों का स्वागत किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा उठाए गए तत्काल कदमों से उन्हें कुछ राहत मिली है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान तभी होगा जब प्रस्तावित परियोजना समय पर पूरी होगी।

उन्होंने सरकार से अक्टूबर में प्रस्तावित स्थायी कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की।

विशेषज्ञों की राय

जल प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा नदी के किनारे होने वाला कटाव हर वर्ष मानसून के दौरान बड़ी चुनौती बन जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अस्थायी उपायों के साथ-साथ नदी तटों का वैज्ञानिक सुदृढ़ीकरण, नियमित निगरानी और दीर्घकालिक जल प्रबंधन ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।

सरकार की प्रतिबद्धता

जल संसाधन विभाग ने कहा कि सरकार लोगों की जान-माल, कृषि भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

फिलहाल प्राथमिकता आपातकालीन बचाव कार्यों के माध्यम से कटाव की गति को नियंत्रित करना है, जबकि दीर्घकालिक लक्ष्य स्थायी सुरक्षा व्यवस्था विकसित करना है।

मोकामा के पूर्वी क्षेत्र में गंगा नदी के बढ़ते कटाव को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने अस्थायी बचाव कार्यों में तेजी लाई है और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया है।

फिलहाल बालू से भरी बोरियों के माध्यम से नदी की धारा को आबादी से दूर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि अक्टूबर से गंगा का जलस्तर कम होने के बाद स्थायी कटाव निरोधी परियोजना शुरू की जाएगी। यदि यह योजना समय पर पूरी होती है, तो इससे हजारों लोगों के घर, खेत और सार्वजनिक संपत्तियों को भविष्य में गंगा कटाव से स्थायी सुरक्षा मिल सकेगी।