भारी बारिश का कहर: मुरैठा फ्लैग स्टेशन से एसएच-52 तक जाने वाली सड़क जलमग्न, दर्जनों गांवों का संपर्क टूटा

जुलाई के मध्य में हुई मूसलाधार बारिश ने मुजफ्फरपुर के ग्रामीण इलाकों में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसी कड़ी में, मुरैठा रेलवे फ्लैग स्टेशन से स्टेट हाईवे (SH)-52 को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का डायवर्सन 17-18 जुलाई की रात हुई भारी वर्षा के कारण पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इस जलजमाव ने एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों निवासियों के लिए आवागमन का संकट खड़ा कर दिया है।

संकट की स्थिति: रातों-रात कट गया संपर्क

17 और 18 जुलाई की दरमियानी रात क्षेत्र में हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश ने निचले इलाकों को जलमग्न कर दिया। सड़क के डायवर्सन पर पानी का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आवागमन पूरी तरह ठप हो गया। वर्तमान में, सड़क का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है, जिससे चार पहिया वाहनों का चलना तो दूर, दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए भी यह रास्ता जानलेवा बन गया है।

प्रभावित क्षेत्र और ग्रामीणों की पीड़ा

यह सड़क मुख्य रूप से एक दर्जन से अधिक गांवों की जीवनरेखा मानी जाती है। मुरैठा के आसपास के गांवों से एसएच-52 तक पहुंचने के लिए यही एकमात्र सुगम मार्ग है। इस सड़क के डूबने से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं:

आपातकालीन चिकित्सा: सबसे बड़ी चिंता उन मरीजों की है जिन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता है। एंबुलेंस का पहुंचना तो दूर, खटिया पर ढोकर मरीज को पानी से पार कराना पड़ रहा है।

शैक्षिक संस्थान: स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, क्योंकि रास्ता बंद होने से वे शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।

दैनिक मजदूरी और व्यवसाय: रोज कमाने-खाने वाले मजदूर और किसान, जो शहर या बाजार जाते थे, अब घर में बैठने को मजबूर हैं। उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।

जरूरी सेवाओं का अभाव: पानी के तेज बहाव और कीचड़ के कारण दूध, सब्जी और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो गई है।

प्रशासन की लापरवाही या प्राकृतिक आपदा?

ग्रामीणों का आक्रोश इस बात पर अधिक है कि इस सड़क का डायवर्सन निर्माण काफी निम्न स्तर का किया गया था। उनका आरोप है कि यदि जल निकासी की समुचित व्यवस्था होती या सड़क की ऊंचाई मानकों के अनुरूप होती, तो इतनी जल्दी यह मार्ग बंद नहीं होता। भारी वर्षा से पहले सुरक्षात्मक उपायों की कमी ने इस संकट को और विकराल बना दिया है।

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान उन्हें इस स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार पानी का दबाव पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ रहा है। प्रशासन से गुहार लगाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है। यदि जलस्तर कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में इन गांवों में खाद्यान्न का संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

सुरक्षा के प्रति सचेत रहने की जरूरत

स्थानीय प्रशासन ने जलमग्न मार्ग पर संकेत-पट्ट लगाने और लोगों को पानी में उतरने से मना करने की सलाह दी है। प्रशासन का कहना है कि:

अनावश्यक यात्रा से बचें: जब तक पानी का स्तर नीचे न आ जाए, इस रास्ते का उपयोग न करें।

बच्चों का ध्यान रखें: बाढ़ के पानी में सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीवों का खतरा रहता है, इसलिए बच्चों को पानी के पास न जाने दें।

नाव की व्यवस्था: जिला प्रशासन पंचायत स्तर पर नाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है ताकि आवश्यक सेवाओं के लिए संपर्क बना रहे।

दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता

मुरैठा से एसएच-52 तक की यह सड़क न केवल एक मार्ग है, बल्कि विकास की एक कड़ी है। जब तक इस सड़क का चौड़ीकरण और पुलिया का निर्माण ऊंचे स्तर पर नहीं किया जाता, तब तक मानसून के समय यह गांव हर साल मुख्यधारा से कटते रहेंगे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस बार राज्य सरकार से विशेष आपदा कोष से इस सड़क के पुनर्निर्माण की मांग की है।

मुरैठा रेलवे फ्लैग स्टेशन के पास की यह सड़क फिलहाल पानी की चपेट में है। यह स्थिति न केवल ग्रामीणों के लिए एक बड़ा संकट है, बल्कि प्रशासन के लिए भी चेतावनी है कि समय रहते बुनियादी ढांचे को मानसून के अनुकूल नहीं बनाया गया तो जन-धन की क्षति हो सकती है। फिलहाल, सभी ग्रामीणों की नजरें आसमान की ओर हैं, इस उम्मीद में कि बारिश थमे और पानी का स्तर नीचे उतरे, ताकि वे अपनी सामान्य जीवनशैली में लौट सकें।