कसबा नगर परिषद में अतिक्रमण का मकड़जाल: नेहरू चौक से पश्चिम स्टेशन रोड जाने वाली सड़क पर दुकानदारों द्वारा अवैध कब्जा; आवागमन बाधित, राहगीर और वाहन चालक परेशान

बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा नगर परिषद क्षेत्र से प्रशासनिक लापरवाही और आम नागरिकों की परेशानी से जुड़ी एक बड़ी समस्या सामने आई है। कसबा के व्यस्त इलाके नेहरू चौक से पश्चिम दिशा में स्टेशन रोड की ओर जाने वाली महत्वपूर्ण सड़क इन दिनों गंभीर अतिक्रमण (Encroachment) की चपेट में है। सड़क के दोनों ओर स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों द्वारा अवैध रूप से अपनी दुकानें बढ़ा-चढ़ाकर और सामान रखकर रास्ता घेर लिया गया है, जिससे इस प्रमुख मार्ग पर चलना दूभर हो गया है।

इस अवैध कब्जे के कारण प्रतिदिन हजारों वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और आम राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद नगर परिषद प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है, जिससे अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।

क्या है पूरा मामला? (स्टेशन रोड पर अतिक्रमण की दास्तां)

कसबा नेहरू चौक से स्टेशन रोड की ओर जाने वाला यह मार्ग व्यापारिक और आवागमन की दृष्टि से बेहद व्यस्त और महत्वपूर्ण माना जाता है।

सड़क के दोनों ओर अवैध कब्जा: इस सड़क के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने तय सीमा से आगे बढ़कर पक्के व कच्चे निर्माण कर लिए हैं। इसके अलावा कई दुकानदार अपने सामान, ठेले और काउंटर सड़क की पटरियों तक सजा देते हैं।

सिकुड़ गई सड़क की चौड़ाई: दुकानदारों के इस अवैध अतिक्रमण के कारण चौड़ी दिखने वाली यह सड़क अब काफी संकरी हो गई है। दो बड़े वाहनों के आमने-सामने आने पर यहाँ घंटों ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।

पैदल चलना भी हुआ मुश्किल: पटरी (Footpath) न होने और दुकानों का सामान सड़क तक फैले होने के कारण पैदल चलने वाले राहगीरों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को बीच सड़क से गुजरना पड़ता है, जिससे हर वक्त दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

जनता की मुसीबत और जाम की विकराल समस्या

अतिक्रमण के इस नासूर के कारण कसबा के इस मुख्य मार्ग पर आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।

रोजाना का महाजाम: सुबह से लेकर देर शाम तक इस मार्ग पर रुक-रुक कर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन जाने वाले यात्रियों को इस जाम के कारण अपनी ट्रेन छूटने का डर सताता रहता है।

आपातकालीन सेवाओं पर असर: यदि इस सड़क पर कोई एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की गाड़ी फँस जाए, तो उसे निकलने के लिए इंच-इंच जगह के लिए संघर्ष करना पड़ता है। अतिक्रमण के कारण आपातकाल में भी मदद समय पर नहीं पहुँच पाती।

स्थानीय दुकानदारों की मनमानी: कई बार जब राहगीर या अन्य दुकानदार इसका विरोध करते हैं, तो अतिक्रमण करने वाले लोग दबंगई पर उतर आते हैं, जिससे आपसी विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

स्थानीय लोगों की मांग और प्रशासन की चुप्पी

इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और दैनिक यात्रियों में नगर परिषद प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।

प्रशासनिक सुस्ती: लोगों का आरोप है कि कसबा नगर परिषद को कई बार इस संबंध में लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव (Anti-encroachment Drive) नहीं चलाई गई है।

अस्थाई और औपचारिकता भरी कार्रवाई: कभी-कभार यदि प्रशासन द्वारा खानापूर्ति के लिए कोई छोटी-मोटी कार्रवाई की भी जाती है, तो टीम के जाते ही दुकानदार फिर से सड़क पर कब्जा जमा लेते हैं।

बुलडोजर कार्रवाई की मांग: जनता ने जिला प्रशासन और कसबा नगर परिषद के मुख्य पार्षद से मांग की है कि बिना किसी दबाव के इस मार्ग पर बुलडोजर चलाकर पूरी तरह अतिक्रमण हटाया जाए और दोबारा कब्जा करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए।

कसबा नगर परिषद अंतर्गत नेहरू चौक से पश्चिम स्टेशन रोड की ओर जाने वाली सड़क पर दुकानदारों द्वारा किया गया यह अवैध अतिक्रमण प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ जहाँ शहर के विकास के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ बुनियादी सड़कों पर इस तरह का कब्जा विकास की पोल खोल रहा है। यदि समय रहते नगर परिषद प्रशासन ने कड़ा रुख नहीं अपनाया, तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है। जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहती है।