मायागंज और आदमपुर चौक पर बुडको की क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से रोजाना बह रहे हैं हजारों गैलन शुद्ध पेयजल; जिम्मेदार महकमा गहरी नींद में, आम जनता परेशान

भागलपुर (विशेष संवाददाता): एक तरफ जहां पूरा देश और राज्य भीषण जल संकट, भूजल स्तर में लगातार आ रही गिरावट और बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष की आस लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट सिटी भागलपुर में प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा हैरान करने वाला नजारा देखने को मिल रहा है जो रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है। भागलपुर शहर में जलापूर्ति के लिए करोड़ों रुपए की लागत से बिछाई गई बिहार अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको - BUIDCO) की पाइपलाइन इन दिनों शहर के अतिसंवेदनशील इलाकों में नासूर बन चुकी है। शहर के सबसे प्रमुख और व्यस्त इलाकों में शुमार मायागंज अस्पताल क्षेत्र और आदमपुर चौक के पास बुडको की मुख्य पेयजल पाइपलाइन पिछले कई दिनों से बुरी तरह लीक कर रही है। इस लीकेज के कारण रोजाना हजारों गैलन शुद्ध और ट्रीटेड पेयजल सड़कों पर यूं ही बर्बाद होकर बह रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि पानी की यह बर्बादी रोजाना देखने के बावजूद बुडको और संबंधित महकमे के अधिकारी कुंभकर्णी नींद सोए हुए हैं।

क्या है मायागंज और आदमपुर चौक की जमीनी हकीकत?

शहर के इन दोनों व्यस्त चौराहों पर जलवितरण प्रणाली की पोल खोलती तस्वीरें हर आने-जाने वाले को झकझोर कर रख देती हैं:

मायागंज अस्पताल के पास फव्वारा बनी सड़क: शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) मायागंज के समीप मुख्य मार्ग पर पाइपलाइन में बड़ा फाल्ट आ जाने के कारण पानी किसी फव्वारे की तरह लगातार बाहर निकल रहा है। मरीजों, एम्बुलेंस और तीमारदारों की आवाजाही वाले इस मार्ग पर जलजमाव की स्थिति बन गई है, जिससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

आदमपुर चौक पर बह रही पानी की नदियां: ऐतिहासिक और व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण आदमपुर चौक के पास भी बुडको की पाइपलाइन से हर वक्त पानी का रिसाव हो रहा है। सड़क पर पानी बहने के कारण डामर उखड़ने लगा है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है।

जल संकट के बीच 'जल की बर्बादी': कौन है जिम्मेदार?

गर्मी और मानसून के बीच जल स्तर के नीचे खिसकने की चिंता हर जिम्मेदार नागरिक को सताती है, लेकिन सरकारी तंत्र की बेपरवाही का आलम यह है कि मीठे पानी को यूं ही नालियों में बहाया जा रहा है:

लाखों लोगों के हिस्से का पानी बर्बाद: जानकारों का मानना है कि मायागंज और आदमपुर जैसे मुख्य प्वाइंटों पर लीकेज के कारण हर रोज कम से कम हजारों गैलन पानी यूं ही व्यर्थ हो जाता है। यदि इस पानी को बचाया जाए, तो शहर के कई जरूरतमंद मोहल्लों की प्यास बुझाई जा सकती है।

घटिया निर्माण सामग्री या मेंटेनेंस की कमी: स्थानीय लोगों और पार्षदों का आरोप है कि बुडको द्वारा शहरभर में जो पाइपलाइन बिछाई गई थी, उसकी गुणवत्ता शुरू से ही सवालों के घेरे में रही है। हल्की सी लोड या सड़क निर्माण कार्यों के दौरान ये पाइपलाइनें आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके बाद महीनों तक विभाग की ओर से इनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं होता।

स्थानीय लोगों और राहगीरों का फूटा गुस्सा

सड़कों पर बहते पानी और उससे हो रही परेशानियों को देखकर स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है:

स्थानीय दुकानदारों का दर्द: आदमपुर चौक के एक दुकानदार ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "एक तरफ सरकार जल संरक्षण के बड़े-बड़े विज्ञापन छपवाकर लोगों को पानी बचाने का संदेश देती है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य सड़क पर हजारों लीटर शुद्ध पेयजल बह रहा है और विभाग आंखें मूंदकर बैठा है। क्या अधिकारियों को यह लीकेज दिखाई नहीं देता?"

दुर्घटनाओं का खतरा: मायागंज के पास सड़क पर जलजमाव और काई जम जाने के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर गिर रहे हैं। मरीजों को लेकर आने वाली एम्बुलेंस को भी इन गड्ढों और पानी के बीच से गुजरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों के रटे-रटाए दावे और धरातल की पोल

जब इस गंभीर मामले पर बुडको और नगर निगम के संबंधित अभियन्ताओं से बात करने का प्रयास किया गया, तो हमेशा की तरह टालमटोल वाले जवाब सामने आए:

मरम्मत का आश्वासन: विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस लीकेज की जानकारी मिल चुकी है और जल्द ही मेंटेनेंस टीम को भेजकर पाइपलाइन की मरम्मत करा दी जाएगी।

सवाल यह है कि देरी क्यों? सवाल यह उठता है कि जब शहर के सबसे व्यस्त मार्गों पर रोजाना हजारों गैलन पानी बर्बाद हो रहा है, तो विभाग को इसकी सूचना मिलने के बाद भी त्वरित कार्रवाई करने में हफ्तो क्यों लग जाते हैं? क्या किसी बड़ी दुर्घटना या भयंकर जल संकट के आने का इंतजार किया जा रहा है?

मायागंज और आदमपुर चौक पर बुडको की क्षतिग्रस्त पाइपलाइन से रोजाना बर्बाद हो रहा हजारों गैलन पानी सिर्फ पेयजल की बर्बादी नहीं है, बल्कि यह हमारी लचर व्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का एक जीवंत प्रमाण है। वक्त आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर आएं और तुरंत इन लीकेजों को दुरुस्त करवाएं। यदि समय रहते इस बर्बादी को नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में भागलपुर की जनता को पानी के लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे, जिसके लिए पूरी तरह प्रशासन जिम्मेदार होगा।