गंगा के जलस्तर में हो रही तीव्र वृद्धि से परबत्ता अंचल में बाढ़ का मंडराया खतरा; निचले इलाकों में घुसा पानी, तटवर्ती ग्रामीणों की बढ़ी धड़कनें, प्रशासन ने शुरू की मॉनिटरिंग

परबत्ता (खगड़िया), ब्यूरो रिपोर्ट: बिहार के मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद एक बार फिर उत्तर बिहार की जीवनदायिनी कही जाने वाली गंगा नदी के जलस्तर में तेज वृद्धि (Rapid Rise in Ganga Water Level) दर्ज की जा रही है। खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड क्षेत्र से अमोद कुमार तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा के उग्र तेवर और लगातार बढ़ते पानी ने तटवर्ती इलाकों के किसानों और ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। जलस्तर में हो रहे इस बेतहाशा इजाफे के कारण नदी का पानी अब धीरे-धीरे निचले इलाकों, दियारा क्षेत्रों और खेतों में फैलने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों के बीच संभावित बाढ़ की आशंका को लेकर भारी दहशत और चिंता का माहौल बन गया है।

क्या है वर्तमान स्थिति और कितनी तेजी से बढ़ रहा है जलस्तर?

केंद्रीय जल आयोग (CWC) और स्थानीय जल संसाधन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 48 घंटों से गंगा नदी के जलस्तर में लगातार उछाल देखा जा रहा है। खतरे के निशान के करीब बह रही गंगा की धारा अब हर घंटे अपना दायरा बढ़ा रही है।

परबत्ता प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कई दियारा इलाकों और घाटों पर पानी का दबाव काफी बढ़ गया है।

गंगा के इस बढ़ते जलस्तर के कारण तटों पर कटाव (Soil Erosion) की रफ्तार भी तेज हो गई है, जिससे किसानों की उपजाऊ जमीन और फसलें जलमग्न होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

स्थानीय बुजुर्गों और किसानों का कहना है कि जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा है, यदि यही स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रही, तो पिछले साल की तरह इस बार भी परबत्ता के कई गांवों का संपर्क मुख्य इलाके से कट सकता है।

दियारा क्षेत्र के निवासियों और पशुपालकों की बढ़ी मुश्किलें

परबत्ता क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा दियारा और तटीय इलाकों में बसा है, जहां के अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि और पशुपालन पर निर्भर है। गंगा के जलस्तर में अचानक आई तेजी के कारण सबसे बुरा असर पशुपालकों और किसानों पर पड़ा है।

चारे की समस्या: खेतों और चरागाहों में पानी भर जाने के कारण मवेशियों के लिए हरे चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न होने लगी है। पशुपालक अब अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों और ऊंचे बांधों की ओर ले जाने की तैयारी करने लगे हैं।

फसलों को भारी नुकसान: खेतों में लगी मक्का, हरी सब्जियां और अन्य खरीफ फसलें जलमग्न होने लगी हैं। किसानों की महीनों की मेहनत पानी में डूबती देख उनके चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।

प्रशासनिक चौकसियां और विभाग की पैनी नजर

परबत्ता में गंगा के बढ़ते जलस्तर और संभावित खतरे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और अंचल कार्यालय पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। जल संसाधन विभाग के अभियंता और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी लगातार तटबंधों (Embankments) की निगरानी कर रहे हैं।

तटबंधों की सुरक्षा: संवेदनशील बिंदुओं और कमजोर तटबंधों पर विशेष नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

बाढ़ राहत और बचाव की तैयारियां: प्रशासन द्वारा यह आकलन किया जा रहा है कि यदि जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है, तो निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और उनके लिए राहत शिविरों (Relief Camps) की व्यवस्था कैसे की जाए। नावों के परिचालन और गोताखोरों की सूची भी तैयार की जा रही है ताकि ऐन वक्त पर किसी तरह की असुविधा न हो।

स्थानीय लोगों में मायूसी, प्रशासन से त्वरित मदद की गुहार

प्रभावित इलाकों के लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इस तरह की आपदा का सामना करना पड़ता है, लेकिन समय रहते पुख्ता स्थायी इंतजाम न होने के कारण उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं लेतीं। अमोद कुमार तिवारी की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि जलस्तर पर लगातार नजर रखने के साथ-साथ संभावित बाढ़ पीड़ितों के लिए अभी से राहत सामग्री और मवेशी चारे का प्रबंध किया जाए।

परबत्ता (खगड़िया) से अमोद कुमार तिवारी की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि गंगा के जलस्तर में हो रही तीव्र वृद्धि इस क्षेत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह स्थिति विकराल रूप ले सकती है। फिलहाल, प्रशासनिक सतर्कता और ग्रामीणों की धड़कनें दोनों ही इस समय गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ तेज गति से आगे बढ़ रही हैं।