बालू खनन के दौरान मजदूर को गोली मारने के तीन दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई FIR, थानाक्षेत्र विवाद में उलझी पुलिस

भागलपुर: भागलपुर और बांका जिले की सीमा पर अवैध बालू खनन से जुड़े एक गंभीर मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 20 जुलाई की रात भागलपुर के जगदीशपुर और बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र की सीमा के पास स्थित फतेहपुर गांव के निवासी नीतीश कुमार को बालू खनन के दौरान अपराधियों ने गोली मार दी। घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। हालांकि, घटना के तीन दिन बाद तक भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं होने से स्थानीय लोगों और परिजनों में नाराजगी है।

बताया जा रहा है कि दोनों जिलों की पुलिस इस बात को लेकर उलझी हुई है कि गोलीबारी की घटना किस थाना क्षेत्र में हुई। इसी क्षेत्राधिकार विवाद के कारण अब तक मामला दर्ज नहीं हो सका है।

20 जुलाई की रात हुई गोलीबारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 20 जुलाई की देर रात बालू खनन के दौरान अचानक गोलीबारी की घटना हुई। इस दौरान फतेहपुर गांव निवासी नीतीश कुमार को गोली लग गई। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार जारी है।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, लेकिन आरोप है कि अब तक मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।

तीन दिन बाद भी दर्ज नहीं हुई प्राथमिकी

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकी। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन पुलिस थानों के बीच क्षेत्राधिकार विवाद के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर प्राथमिकी दर्ज होती और जांच शुरू होती, तो आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना अधिक रहती।

थानाक्षेत्र को लेकर उलझे दोनों थाने

मामले में बताया जा रहा है कि रजौन थाना और जगदीशपुर थाना दोनों यह तय करने में लगे हैं कि घटना उनके अधिकार क्षेत्र में हुई या नहीं।

इसी वजह से दोनों थानों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है। इस स्थिति ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराध की जांच और पीड़ित को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस क्षेत्राधिकार के विवाद में उलझी हुई है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया संज्ञान

घटना के कुछ घंटों बाद ही सिटी एसपी अतुलेश झा ने मामले का संज्ञान लेते हुए घटनास्थल के सत्यापन और घायल का बयान दर्ज करने की जिम्मेदारी विधि-व्यवस्था डीएसपी नवनीत कुमार को सौंपी थी।

इसके बावजूद अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घटना किस थाना क्षेत्र में हुई, जिसके कारण कानूनी कार्रवाई में देरी हो रही है।

घायल का बयान लेने में हुई देरी

पुलिस अधिकारियों के अनुसार घायल नीतीश कुमार का इलाज जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) में चल रहा है। उनकी सर्जरी होने के कारण तत्काल बयान दर्ज नहीं किया जा सका।

डीएसपी ने बताया कि घायल की स्थिति में सुधार होने के बाद उसका बयान दर्ज किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सीमा विवाद की आड़ में कार्रवाई पर सवाल

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दो जिलों की सीमा पर होने वाली घटनाओं में क्षेत्राधिकार विवाद के कारण कार्रवाई में देरी क्यों होती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराध चाहे किसी भी थाना क्षेत्र में हुआ हो, प्राथमिकता पीड़ित को न्याय दिलाने और अपराधियों को गिरफ्तार करने की होनी चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को पहले प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए, जबकि क्षेत्राधिकार का निर्धारण बाद में भी किया जा सकता है।

अवैध बालू खनन पर उठे सवाल

घटना के बाद क्षेत्र में अवैध बालू खनन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीमा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बालू खनन की गतिविधियां चल रही हैं।

यदि इन गतिविधियों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो संभवतः ऐसी घटना को रोका जा सकता था।

लोगों ने प्रशासन से अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई करने और क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है।

परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी

घायल युवक के परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि घटना के बाद तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन पुलिस थानों के बीच जिम्मेदारी तय करने में समय गंवा रही है।

ग्रामीणों ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।

पुलिस का पक्ष

विधि-व्यवस्था डीएसपी ने कहा कि घायल की सर्जरी होने के कारण उसका बयान लेने में कुछ समय लगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही घटना का सटीक थाना क्षेत्र निर्धारित कर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

भागलपुर-बांका सीमा पर बालू खनन के दौरान हुई गोलीबारी और उसके बाद तीन दिनों तक प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का मामला पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्राधिकार को लेकर जारी विवाद के कारण जांच और कार्रवाई में हुई देरी से पीड़ित परिवार में असंतोष है।

अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि थाना क्षेत्र का विवाद जल्द समाप्त होगा, प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।