टीएमबीयू के सीनेट हॉल में सेवानिवृत्त और कार्यरत कर्मियों के बकाये भुगतान के लिए लगा दो दिवसीय विशेष शिविर; पहले दिन उमड़ी भारी भीड़, मिले 100 से अधिक आवेदन
भागलपुर, विशेष संवाददाता: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय एवं अंगीभूत कॉलेजों के सेवानिवृत्त (Retired) और वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के लंबित बकाये भुगतानों के त्वरित निष्पादन के लिए एक विशेष पहल की गई है। इसी कड़ी में विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक सीनेट हॉल (Senate Hall) में दो दिवसीय विशेष समाधान शिविर का भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उन बुजुर्ग पेंशनरों और कर्मचारियों की वर्षों पुरानी आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान करना है, जो ग्रेच्युटी, पेंशन, एरियर, एसीपी-मैप और अन्य वित्तीय बकायों के लिए लंबे समय से दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। शिविर के पहले दिन ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों और कॉलेजों से सौ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बकाये भुगतान का यह मुद्दा कर्मियों के लिए कितना गंभीर और ज्वलंत है।
सीनेट हॉल में शिविर का उद्घाटन और प्रशासनिक तत्परता
शिविर के पहले दिन सुबह से ही टीएमबीयू के सीनेट हॉल परिसर में वृद्ध पेंशनरों, सेवारत शिक्षकों और कर्मचारियों का पहुंचना शुरू हो गया था।
काउंटर प्रणाली की व्यवस्था: आवेदकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे—एक काउंटर नए आवेदनों को जमा करने के लिए, दूसरा कागजात की जांच (Verification) के लिए और तीसरा काउंटर पुरानी पेंडिंग फाइलों की स्थिति बताने के लिए निर्धारित किया गया था।
विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति: शिविर की सफलता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी, कुलसचिव (Registrar) और परीक्षा नियंत्र سمیت कई प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी स्वयं सीनेट हॉल में मौजूद रहे। अधिकारियों ने एक-एक कर पेंशनभोगियों की शिकायतों को सुना और मौके पर ही संबंधित शाखाओं को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
पेंशनरों ने अधिकारियों को सुनाई अपनी समस्याएं: सालों से लंबित हैं मामले
शिविर के दौरान पेंशनभोगियों और बुजुर्ग शिक्षकों का दर्द खुलकर सामने आया। कई ऐसे मामले सामने आए जो पिछले पांच से दस वर्षों से विश्वविद्यालय की लालफीताशाही (Red Tapism) और कागजी औपचारिकताओं में उलझे हुए थे:
मेडिकल बिल और एरियर का भुगतान: कई सेवानिवृत्त शिक्षकों ने बताया कि उनके चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के बिल और छठे-सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी इलाज कराने में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पारिवारिक पेंशन और कागजी उलझनें: कुछ महिला पेंशनभोगियों ने पारिवारिक पेंशन (Family Pension) शुरू कराने में आ रही प्रशासनिक अड़चनों के बारे में अधिकारियों को विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मामूली कागजी त्रुटियों के नाम पर उनकी फाइलों को महीनों से लटका कर रखा गया है।
अधिकारियों का आश्वासन: पेंशनरों की समस्याएं सुनने के बाद विश्वविद्यालय के वित्त विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया कि इस दो दिवसीय शिविर का उद्देश्य ही पेंडिंग मामलों का ऑन-द-स्पॉट (On-the-spot) निस्तारण करना है। अधिकारियों ने वादा किया कि शिविर में प्राप्त सभी आवेदनों की फाइलें प्राथमिकता के आधार पर प्रोसेस की जाएंगी और तय समयसीमा के भीतर उनके बैंक खातों में बकाये की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
पहले दिन मिले 100 से अधिक आवेदन, तकनीकी सेल सक्रिय
शिविर के समापन के बाद जब पहले दिन के आंकड़ों की समीक्षा की गई, तो यह पाया गया कि विभिन्न श्रेणियों के बकाये भुगतान के लिए 100 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं:
तकनीकी और लेखा विभाग की सक्रियता: प्राप्त आवेदनों को तुरंत स्कैन कर विश्वविद्यालय के वित्त और लेखा विभाग (Accounts Department) के सर्वर पर अपलोड किया गया। इसके लिए एक विशेष तकनीकी सेल को सीनेट हॉल में ही तैनात किया गया था, ताकि किसी भी आवेदन के गुम होने या उसमें देरी की गुंजाइश न रहे।
पारदर्शिता और रसीद प्रणाली: प्रत्येक आवेदक को उनके आवेदन पत्र की प्राप्ति रसीद (Acknowledgement Receipt) दी गई, जिस पर एक यूनिक आईडी दर्ज थी, ताकि वे ऑनलाइन या काउंटर के माध्यम से अपने मामले के निष्पादन की स्थिति को ट्रैक कर सकें।
कर्मचारी संघों और पेंशनर एसोसिएशन ने की सराहना
टीएमबीयू प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम की विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षक संघों, शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ और पेंशनर एसोसिएशन ने जमकर सराहना की है:
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से लंबित पड़े बकाये भुगतानों के कारण कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा था और वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे थे। इस प्रकार के विशेष शिविर आयोजित होने से न केवल प्रशासनिक दूरी कम होती है, बल्कि बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलती है।
उन्होंने मांग की कि इस प्रकार के समाधान शिविर केवल दो दिनों तक सीमित न रखकर हर महीने के निश्चित अंतराल पर आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में फाइलों का बैकलॉग न बने।
टीएमबीयू के सीनेट हॉल में आयोजित यह दो दिवसीय विशेष समाधान शिविर विश्वविद्यालय प्रशासन और उसके कर्मचारियों के बीच संवाद स्थापित करने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हुआ है। पहले ही दिन सौ से अधिक आवेदन प्राप्त होना और अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई का आश्वासन देना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब अपने कर्मचारियों के आर्थिक और सामाजिक हितों के प्रति गंभीर हो रहा है। यदि इन सभी आवेदनों का निष्पादन समयबद्ध तरीके से हो जाता है, तो यह निश्चित रूप से टीएमबीयू के इतिहास में एक ऐतिहासिक और राहत भरा कदम साबित होगा।