मुजफ्फरपुर में कांग्रेस सेवा दल का जोरदार प्रदर्शन: वित्त रहित विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों की नियमित वेतन व सेवा सुरक्षा के लिए हुंकार, मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी और सुगबुगाहट पैदा करने वाली खबर सामने आई है। लंबे समय से आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना का शिकार बन रहे वित्त रहित (Financially Unaided) विद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के समर्थन में कांग्रेस सेवा दल खुलकर मैदान में उतर गया है। रविवार को मुजफ्फरपुर में कांग्रेस सेवा दल के बैनर तले शिक्षकों और कर्मचारियों ने नियमित वेतन भुगतान और पूर्ण सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर एक विशाल धरना-प्रदर्शन किया।
धरने के बाद आक्रोशित शिक्षकों और कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए एक भव्य पदयात्रा निकाली, जिसके माध्यम से प्रशासन और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई गई। अंत में, एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए एक सूत्रीय व बहुसूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
क्यों हो रहा है विरोध? (वित्त रहित शिक्षकों की पीड़ा)
बिहार में वित्त रहित शिक्षा नीति के तहत संचालित होने वाले शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षक और कर्मचारी दशकों से दयनीय हालत में जीने को विवश हैं।
वेतन का अकाल: वित्त रहित संस्थानों के नियम के अनुसार, जब तक सरकार द्वारा अनुदान (Grant) या सहायता राशि जारी नहीं होती, तब तक इन संस्थानों के शिक्षकों को नियमित वेतन नहीं मिलता। कई-कई महीनों और वर्षों तक वेतन न मिलने के कारण शिक्षकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है।
सेवा सुरक्षा का अभाव: सरकारी शिक्षकों की तरह इन शिक्षकों के पास न तो कोई स्थायी सेवा शर्त है और न ही भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या पेंशन जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा। प्रबंधन जब चाहे तब शिक्षकों को मनमाने तरीके से बाहर का रास्ता दिखा देता है।
समान काम, समान वेतन की अनदेखी: समान योग्यता होने के बावजूद सरकारी और वित्त रहित शिक्षकों के वेतनमान में जमीन-आसमान का अंतर है, जिससे इन शिक्षकों में भारी कुंठा और असंतोष व्याप्त है।
धरना-प्रदर्शन और कांग्रेस सेवा दल की हुंकार
रविवार को मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय पर आयोजित धरना-प्रदर्शन में जिलेभर के कोने-कोने से सैकड़ों की संख्या में वित्त रहित शिक्षक, कर्मचारी और कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता शामिल हुए। सभा स्थल पर वक्ताओं ने सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखा प्रहार किया।
वक्ताओं के तीखे तेवर: धरना को संबोधित करते हुए कांग्रेस सेवा दल के वरिष्ठ नेताओं और शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि "राज्य सरकार एक तरफ शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जिन शिक्षकों के कंधों पर नौनिहालों का भविष्य गढ़ा जा रहा है, उन्हें भूखों मरने के लिए छोड़ दिया गया है। यह दोहरी नीति अब और सहन नहीं की जाएगी।"
शोषण के खिलाफ एकजुटता: वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि वित्त रहित शिक्षा नीति असल में शिक्षकों का आर्थिक और मानसिक शोषण करने का एक हथियार बन चुकी है, जिसे समाप्त किया जाना अनिवार्य है।
शहर में निकाली गई विशाल पदयात्रा
धरना-प्रदर्शन के उपरांत कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में शिक्षकों और कर्मचारियों ने मुजफ्फरपुर की सड़कों पर एक आक्रोशित पदयात्रा निकाली।
अनुशासन और जोश के साथ मार्च: हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शिक्षक 'नियमित वेतन लागू करो', 'सेवा सुरक्षा की गारंटी दो' और 'वित्त रहित शिक्षा नीति वापस लो' जैसे नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।
आम जनता का समर्थन: इस पदयात्रा को शहर के आम नागरिकों और दुकानदारों का भी भरपूर समर्थन मिला। लोगों का मानना था कि जो शिक्षक पीढ़ियों का भविष्य संवारते हैं, यदि उन्हें अपनी आजीविका के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
मुख्यमंत्री को ज्ञापन और मुख्य मांगें
पदयात्रा के समापन के बाद कांग्रेस सेवा दल और शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर राज्य के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं:
नियमित वेतनमान की गारंटी: वित्त रहित विद्यालयों और महाविद्यालयों के सभी शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मचारियों को राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों की तर्ज पर हर महीने नियमित वेतन का भुगतान किया जाए।
पूर्ण सेवा सुरक्षा कानून: शिक्षकों की सेवा को सुरक्षित करने के लिए एक कड़ा कानून बनाया जाए, ताकि प्रबंधन द्वारा उनका arbitrary (मनमाना) निष्कासन रोका जा सके।
अनुदान प्रक्रिया का सरलीकरण: जब तक पूर्ण अधिग्रहण (Takeover) नहीं होता, तब तक मिलने वाली अनुदान राशि की जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए ताकि समय पर भुगतान हो सके।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा: शिक्षकों के लिए स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) और पेंशन योजना लागू की जाए।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सेवा दल और शिक्षकों के इस जोरदार प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। हालांकि, सरकार या शिक्षा विभाग के स्तर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने समय रहते इस पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है।
मुजफ्फरपुर में कांग्रेस सेवा दल के नेतृत्व में वित्त रहित विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा किया गया यह धरना-प्रदर्शन और पदयात्रा इस बात का प्रमाण है कि असंतोष अब चरम सीमा पर पहुंच चुका है। चार साल से अधिक समय तक सेवा देने और शिक्षा की अलख जगाने वाले ये शिक्षक यदि आर्थिक तंगी से जूझेंगे, तो समाज का विकास असंभव है। मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन यदि कागजी बहसों में उलझकर रह गया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का रूप ले सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन शिक्षकों की सुध कब लेती है।