पंचायतों के नए परिसीमन का स्वागत, मुखिया प्रतिनिधि महंत नवल किशोर दास ने मुख्यमंत्री का जताया आभार

बिहपुर (भागलपुर): बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। पंचायतों के नए परिसीमन (Delimitation) की सरकार द्वारा की गई हालिया घोषणा का स्थानीय स्तर पर व्यापक स्वागत हो रहा है। बिहपुर पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि, महंत नवल किशोर दास ने इस निर्णय को बिहार के विकास में एक मील का पत्थर बताते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया है।

विकास की नई इबारत: क्या है परिसीमन का महत्व?

महंत नवल किशोर दास ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि लंबे समय से पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन की मांग उठ रही थी। मौजूदा व्यवस्था में कई पंचायतें भौगोलिक रूप से इतनी विशाल हो गई थीं कि वहां के निवासियों तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुँचाना एक कठिन चुनौती बन गया था। नए परिसीमन के साथ, पंचायतों का क्षेत्रफल संतुलित होगा, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार आएगा।

महंत नवल किशोर दास की मुख्य बातें:

मुखिया प्रतिनिधि ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसके निम्नलिखित लाभों पर प्रकाश डाला:

दूरी घटेगी, सुविधा बढ़ेगी: उन्होंने कहा कि क्षेत्रफल कम होने से मुखिया और प्रशासनिक अमले की पहुंच हर सुदूर गांव तक आसानी से हो सकेगी। अब विकास कार्य ब्लॉक मुख्यालय से लेकर अंतिम छोर के घर तक अधिक तेजी से पहुंचेंगे।

प्रतिनिधित्व का विस्तार: नए परिसीमन से वार्डों का पुनर्गठन होगा, जिससे आम नागरिकों को अपने वार्ड सदस्य या मुखिया तक अपनी शिकायतें पहुंचाने में कम मशक्कत करनी पड़ेगी।

योजनाओं का बेहतर कार्यान्वयन: क्षेत्रफल सीमित होने से सरकारी योजनाओं के चयन और उनके कार्यान्वयन की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी।

सरकार के प्रति जताया आभार

महंत नवल किशोर दास ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का धन्यवाद करते हुए कहा कि, "मुख्यमंत्री जी ने बिहार के जमीनी स्तर के लोकतंत्र को मजबूत करने का जो संकल्प लिया है, यह परिसीमन उसी का हिस्सा है। एक दूरदर्शी नेता के रूप में उन्होंने स्थानीय निकायों की जमीनी दिक्कतों को समझा है और उसका समाधान दिया है।" उन्होंने विश्वास जताया कि परिसीमन के बाद बिहपुर सहित पूरे बिहार की पंचायतों में विकास की गति दोगुनी हो जाएगी।

बदलते परिदृश्य में बिहपुर का भविष्य

बिहपुर पंचायत क्षेत्र में इस खबर के बाद से ग्रामीणों में भी उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पंचायतें छोटी होने से मुखिया और अन्य जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ेगी। परिसीमन प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनसंख्या और भौगोलिक आधार को वैज्ञानिक तरीके से संतुलित किया जाए, ताकि किसी भी गांव की अनदेखी न हो।

प्रशासनिक तैयारी और चुनौतियां

महंत नवल किशोर दास ने यह भी कहा कि परिसीमन एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें प्रशासन को पूरी निष्पक्षता बरतनी होगी। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की कि वे इस प्रक्रिया में अपना सहयोग दें। उन्होंने कहा, "विकास की राह में परिसीमन एक नई शुरुआत है। अब हम अपनी पंचायत को एक आदर्श पंचायत बनाने के लिए नई ऊर्जा के साथ काम करेंगे।"

क्या होगा अगला कदम?

परिसीमन के बाद अब अगले चरण में पंचायतों का नए सिरे से वार्ड गठन और मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा। मुखिया प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया कि बिहपुर पंचायत की ओर से वे सरकार के दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन करेंगे और इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उन्होंने अंत में कहा कि अब समय आ गया है कि हम 'सबका साथ, सबका विकास' के मूल मंत्र को पंचायत के हर वार्ड तक पहुंचाएं।

यह निर्णय न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि यह एक राजनीतिक और सामाजिक बदलाव का भी संकेत है, जो ग्रामीण बिहार की तस्वीर बदलने की क्षमता रखता है। बिहपुर पंचायत से उठी स्वागत की यह आवाज राज्य भर के अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।