सांप के डसने के बाद महिला को अस्पताल ले जाने के बजाय तांत्रिक के पास ले गए परिजन, इलाज में देरी से हुई मौत

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले से अंधविश्वास की एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां समय पर चिकित्सा उपचार नहीं मिलने के कारण एक महिला की जान चली गई। जिले के जामसडी गांव में एक महिला को जहरीले सांप ने डस लिया। घटना के बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय एक तांत्रिक के पास ले गए, जहां घंटों तक झाड़-फूंक और टोना-टोटका किया जाता रहा। जब महिला की हालत गंभीर हो गई, तब उसे अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और चिकित्सा सुविधाओं के प्रति जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

खेत में काम के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, जामसडी गांव की रहने वाली महिला अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थी। इसी दौरान उसे जहरीले सांप ने डस लिया। सांप के काटते ही महिला ने तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

घटना की जानकारी मिलते ही परिवार और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने महिला को अस्पताल ले जाने की सलाह भी दी, लेकिन परिवार के कुछ लोगों ने पहले पारंपरिक तरीके से इलाज कराने का निर्णय लिया।

अस्पताल के बजाय तांत्रिक के पास ले गए

परिजन महिला को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बजाय एक तांत्रिक के पास ले गए। वहां कथित रूप से झाड़-फूंक और मंत्रोच्चार के जरिए सांप के जहर को उतारने की कोशिश की गई।

काफी देर तक यह प्रक्रिया चलती रही, जबकि महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। महिला को चक्कर आने लगे, सांस लेने में तकलीफ होने लगी और वह अचेत होने लगी। इसके बावजूद काफी समय तक चिकित्सकीय सहायता नहीं ली गई।

हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने का फैसला

जब महिला की स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब परिजनों को अपनी गलती का एहसास हुआ और वे उसे अस्पताल लेकर निकले। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी।

रास्ते में ही महिला की तबीयत और बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

गांव में पसरा मातम

महिला की मौत की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि महिला को समय रहते अस्पताल ले जाया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

घटना के बाद गांव में अंधविश्वास और आधुनिक चिकित्सा के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने पर सबसे पहला कदम मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना होना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • सांप के काटने के बाद घबराना नहीं चाहिए।
  • मरीज को शांत रखकर उसकी अनावश्यक गतिविधि कम करनी चाहिए।
  • प्रभावित अंग को स्थिर रखने का प्रयास करना चाहिए।
  • झाड़-फूंक, टोना-टोटका या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
  • जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचना चाहिए जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) उपलब्ध हो।

चिकित्सकों का कहना है कि समय पर एंटी-वेनम मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी अंधविश्वास का प्रभाव

बिहार के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी सांप काटने, बिच्छू के डंक और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा लिया जाता है। कई बार इस कारण मरीजों को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल पाती और उनकी जान चली जाती है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोगों में वैज्ञानिक सोच और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। सरकारी स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को भी गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने जैसी किसी भी आपात स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं। अधिकारियों ने कहा कि झाड़-फूंक में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी इस दिशा में अधिक प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

जागरूकता ही बचा सकती है जान

विशेषज्ञों का मानना है कि सांप के काटने के बाद सही समय पर सही इलाज ही सबसे बड़ा उपचार है। अंधविश्वास के कारण इलाज में हुई देरी कई बार जानलेवा साबित होती है।

गोपालगंज की यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि आपातकालीन स्वास्थ्य स्थिति में वैज्ञानिक और चिकित्सकीय उपचार को प्राथमिकता देना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

फिलहाल इस दुखद घटना से पूरे गांव में मातम का माहौल है। स्थानीय लोग भी इस बात पर अफसोस जता रहे हैं कि यदि महिला को शुरुआत में ही अस्पताल पहुंचाया जाता, तो संभव है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी। यह घटना अंधविश्वास छोड़कर समय पर चिकित्सा सुविधा लेने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।