पाकिस्तानी नंबर से साइबर ब्लैकमेलिंग, अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर युवक से 1.78 लाख रुपये की ठगी

मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवक को पहले फर्जी लोन के झांसे में फंसाया गया और बाद में अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उससे 1.78 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) वाले मोबाइल नंबर से कॉल कर युवक को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और लगातार ब्लैकमेल करते रहे। बदनामी के डर से पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में आरोपितों के खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।

जब ब्लैकमेलिंग का सिलसिला लगातार जारी रहा और अपराधियों की मांगें बढ़ने लगीं, तब पीड़ित ने साहस जुटाकर साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और साइबर अपराधियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है।

फर्जी लोन के नाम पर शुरू हुआ पूरा खेल

जानकारी के अनुसार, मामला मिठनपुरा थाना क्षेत्र का है। पीड़ित युवक को सबसे पहले ऑनलाइन फर्जी लोन दिलाने का झांसा दिया गया। अपराधियों ने आसान प्रक्रिया और कम दस्तावेजों में तुरंत लोन उपलब्ध कराने का दावा किया।

युवक उनके झांसे में आ गया और आवश्यक जानकारी साझा कर दी। इसके बाद साइबर अपराधियों ने कथित रूप से उसकी निजी जानकारी और तस्वीरों का दुरुपयोग करते हुए उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

अश्लील वीडियो वायरल करने की दी धमकी

पीड़ित का आरोप है कि अपराधियों ने उसकी तस्वीरों और अन्य सामग्री का उपयोग कर एक आपत्तिजनक वीडियो तैयार किया और दावा किया कि यदि उसने पैसे नहीं दिए तो वीडियो को सोशल मीडिया और इंटरनेट पर वायरल कर दिया जाएगा।

अचानक मिली इस धमकी से युवक घबरा गया। समाज और परिवार में बदनामी के डर से वह मानसिक दबाव में आ गया।

पाकिस्तानी कोड (+92) वाले नंबर से कॉल

पीड़ित के अनुसार, ब्लैकमेल करने वाले लोग +92 से शुरू होने वाले मोबाइल नंबरों से लगातार संपर्क कर रहे थे। उन्होंने स्वयं को अलग-अलग नामों और पहचान के साथ प्रस्तुत किया और बार-बार पैसे भेजने का दबाव बनाया।

हालांकि, किसी मोबाइल नंबर का विदेशी कंट्री कोड होना अपने आप में कॉल करने वाले की वास्तविक लोकेशन या राष्ट्रीयता का अंतिम प्रमाण नहीं होता। साइबर अपराधी इंटरनेट आधारित कॉलिंग सेवाओं या अन्य तकनीकों का उपयोग कर नंबर छिपाने या बदलने की कोशिश भी कर सकते हैं। इसलिए इसकी पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा ही की जा सकती है।

मानसिक दबाव में भेजे 1.78 लाख रुपये

लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग के कारण पीड़ित ने कई बार अलग-अलग रकम अपराधियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की। कुल मिलाकर उसने 1 लाख 78 हजार रुपये भेज दिए।

इसके बावजूद अपराधियों ने धमकियां देना बंद नहीं किया और लगातार नई मांगें करते रहे।

बढ़ती मांगों के बाद दर्ज कराई शिकायत

जब पीड़ित को यह महसूस हुआ कि पैसे देने के बावजूद ब्लैकमेलिंग खत्म नहीं हो रही है, तब उसने साइबर थाना पहुंचकर पूरी घटना की जानकारी दी।

शिकायत में उसने कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य पुलिस को सौंपे।

साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

साइबर थाना पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

यदि अपराधियों ने फर्जी पहचान, इंटरनेट कॉलिंग या डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल किया है, तो उनकी डिजिटल ट्रेल खंगाली जाएगी।

लगातार बढ़ रहे हैं सेक्सटॉर्शन के मामले

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की ठगी को आमतौर पर सेक्सटॉर्शन (Sextortion) कहा जाता है। इसमें अपराधी किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो या कथित आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल कर पैसे की मांग करते हैं।

कई मामलों में अपराधी फोटो या वीडियो को कृत्रिम रूप से संपादित (मॉर्फ) कर भी ब्लैकमेल करते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को इस प्रकार की धमकी मिले तो घबराकर पैसे नहीं भेजने चाहिए।

इसके बजाय तुरंत—

  • साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  • स्थानीय साइबर पुलिस से संपर्क करें।
  • संदिग्ध नंबरों और संदेशों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  • किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ निजी फोटो, दस्तावेज या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन लोन, निवेश, नौकरी या अन्य आकर्षक प्रस्तावों से जुड़े अनजान कॉल और लिंक पर भरोसा न करें।

यदि कोई व्यक्ति वीडियो वायरल करने या सोशल मीडिया पर बदनाम करने की धमकी देकर पैसे मांगता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।

डिजिटल सुरक्षा क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए प्रत्येक इंटरनेट उपयोगकर्ता को अपनी व्यक्तिगत जानकारी, फोटो, वीडियो और बैंकिंग विवरण की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना चाहिए।