बक्सर-भागलपुर के बीच बनेगा 336 किमी छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, चार घंटे में पूरा होगा सफर
पटना। बिहार में एक छोर से दूसरे छोर तक सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने बक्सर से भागलपुर के बीच 336 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 19 अगस्त को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना को मंजूरी दी गई। परियोजना के पूरा होने के बाद बक्सर से भागलपुर के बीच सड़क यात्रा का समय लगभग आधा होने की उम्मीद है।
फिलहाल बक्सर से भागलपुर तक सड़क मार्ग से पहुंचने में करीब आठ घंटे का समय लग जाता है। नया एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद यह दूरी लगभग चार घंटे में पूरी होने की उम्मीद है। इससे न केवल यात्रियों को समय की बचत होगी, बल्कि बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे को पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड बनाया जाएगा। परियोजना को लगभग 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल के तहत विकसित करने की योजना है। इसके लिए DBFOT-Toll मॉडल अपनाया जाएगा। परियोजना का क्रियान्वयन बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BSRDC के माध्यम से किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी से परियोजना को मिली रफ्तार
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे बिहार की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल हो सकता है। राज्य कैबिनेट से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
336 किलोमीटर लंबा यह छह लेन एक्सप्रेसवे पश्चिमी बिहार के बक्सर को पूर्वी बिहार के भागलपुर से जोड़ने का काम करेगा। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों के बीच सड़क संपर्क को मजबूत करने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य आधुनिक सड़क बुनियादी ढांचे का विस्तार करना है, ताकि लोगों को लंबी दूरी की यात्रा में कम समय लगे और माल एवं यात्री परिवहन अधिक सुगम हो सके।
आठ घंटे का सफर चार घंटे में होने की उम्मीद
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा आम यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में बक्सर से भागलपुर की सड़क यात्रा में करीब आठ घंटे लगते हैं। लंबी दूरी और रास्ते में आने वाले विभिन्न यातायात दबाव के कारण यात्रा में अधिक समय लगता है।
छह लेन का एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा का समय घटकर करीब चार घंटे रहने की उम्मीद है। यानी यात्रियों को एक तरफ की यात्रा में लगभग चार घंटे तक की बचत हो सकती है।
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए समय की यह बचत काफी महत्वपूर्ण होगी। व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए एक जिले से दूसरे जिले की यात्रा करने वाले लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड होगा एक्सप्रेसवे
प्रस्तावित सड़क को एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा। इसका अर्थ है कि एक्सप्रेसवे पर वाहनों के प्रवेश और निकास को निर्धारित स्थानों से नियंत्रित किया जाएगा।
इस तरह की सड़क व्यवस्था का उद्देश्य लंबी दूरी के यातायात को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाना होता है। मुख्य सड़क पर अनियंत्रित प्रवेश और निकास कम होने से यातायात के प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
छह लेन की सड़क होने के कारण भविष्य में बढ़ते यातायात दबाव को संभालने की क्षमता भी बेहतर रहने की उम्मीद है।
करीब 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
परियोजना के निर्माण पर करीब 3,700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP के तहत विकसित करने की योजना बनाई गई है।
परियोजना के लिए DBFOT-Toll मॉडल अपनाया जाएगा। DBFOT का अर्थ Design, Build, Finance, Operate and Transfer है। इस मॉडल में निजी भागीदारी के माध्यम से परियोजना के निर्माण और संचालन की व्यवस्था की जाती है और निर्धारित अवधि के बाद परियोजना को संबंधित प्राधिकरण को हस्तांतरित किया जाता है।
एक्सप्रेसवे पर टोल व्यवस्था के माध्यम से परियोजना की लागत और संचालन से जुड़े वित्तीय मॉडल को समर्थन मिलने की योजना है।
BSRDC करेगा परियोजना का क्रियान्वयन
बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BSRDC को परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य में सड़क और परिवहन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में BSRDC की भूमिका रही है। इस परियोजना के लिए भी निर्माण से जुड़ी आगे की प्रक्रिया इसी संस्था के माध्यम से संचालित की जाएगी।
कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद परियोजना से जुड़ी विस्तृत प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसमें परियोजना की तकनीकी और वित्तीय रूपरेखा, निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं तथा PPP मॉडल के तहत आगे की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्से को मिलेगा बेहतर संपर्क
बक्सर राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित है, जबकि भागलपुर पूर्वी बिहार का एक महत्वपूर्ण शहर है। दोनों क्षेत्रों के बीच बेहतर सड़क संपर्क बनने से राज्य के भीतर लंबी दूरी के परिवहन को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एक आधुनिक एक्सप्रेसवे के माध्यम से इन क्षेत्रों को जोड़ने से यात्रियों के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है।
कृषि उत्पाद, औद्योगिक सामान और अन्य वस्तुओं को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचाने में बेहतर सड़क संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को मिल सकती है गति
सड़क बुनियादी ढांचे का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता है। बेहतर सड़क संपर्क से माल ढुलाई का समय कम हो सकता है और परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सकती है।
बक्सर और भागलपुर के बीच तेज सड़क संपर्क विकसित होने से दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना है।
स्थानीय बाजारों को भी इसका अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। परिवहन सुविधाओं में सुधार होने से कारोबारियों के लिए विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है।
हालांकि परियोजना का वास्तविक आर्थिक प्रभाव इसके निर्माण और संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा।
रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद
इतनी बड़ी सड़क परियोजना के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। निर्माण कार्यों में श्रमिकों, तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों और अन्य कर्मियों की आवश्यकता होगी।
इसके अलावा निर्माण सामग्री, परिवहन, मशीनरी और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद भी रखरखाव, टोल प्रबंधन और अन्य संबंधित सेवाओं में रोजगार के अवसर बने रहने की संभावना है।
यात्रा के साथ पर्यटन को भी फायदा
बिहार के अलग-अलग हिस्सों में ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले कई स्थान हैं। बेहतर सड़क संपर्क से लंबी दूरी की यात्रा आसान होने पर पर्यटन गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
बक्सर और भागलपुर दोनों ही ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों के बीच तेज सड़क संपर्क बनने से पर्यटकों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
इसके अलावा एक्सप्रेसवे से जुड़े क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर होटल, भोजन, परिवहन और अन्य सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना भी रहती है।
सड़क सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
एक्सेस कंट्रोल्ड छह लेन एक्सप्रेसवे का उद्देश्य केवल यात्रा का समय कम करना नहीं है, बल्कि यातायात को व्यवस्थित करना भी है।
हालांकि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण के दौरान बेहतर डिजाइन, संकेतक, निकास और प्रवेश व्यवस्था तथा अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा।
तेज रफ्तार वाले एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों के लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा प्रावधानों का पालन भी जरूरी होगा।
परियोजना के आगे बढ़ने का इंतजार
कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब लोगों की नजर परियोजना की अगली प्रक्रिया पर रहेगी। 336 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजना के लिए विस्तृत योजना, तकनीकी प्रक्रिया और निर्माण से जुड़े कई चरणों को पूरा करना होगा।
सरकार और संबंधित एजेंसी के स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के निर्माण की दिशा में वास्तविक काम शुरू होगा।
लोगों को उम्मीद है कि परियोजना निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी और भविष्य में बिहार के सड़क नेटवर्क को एक नया आधुनिक कॉरिडोर मिलेगा।
बिहार के सड़क नेटवर्क को मिलेगी नई दिशा
बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेसवे को बिहार के सड़क बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छह लेन की 336 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड सड़क राज्य के दो महत्वपूर्ण हिस्सों के बीच तेज संपर्क स्थापित करने में मदद कर सकती है।
इस परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण यात्रा समय में संभावित कमी है। करीब आठ घंटे का सफर लगभग चार घंटे में पूरा होने की उम्मीद आम यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
इसके साथ ही व्यापार, माल परिवहन, रोजगार और क्षेत्रीय संपर्क को भी संभावित लाभ मिलने की उम्मीद है।
बिहार सरकार ने बक्सर से भागलपुर के बीच 336 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को सैद्धांतिक मंजूरी देकर राज्य के सड़क बुनियादी ढांचे में एक बड़ी परियोजना की नींव रखी है। करीब 3,700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को PPP के तहत DBFOT-Toll मॉडल पर विकसित करने की योजना है।
परियोजना का क्रियान्वयन BSRDC के माध्यम से किया जाएगा। पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड इस एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद बक्सर से भागलपुर की सड़क यात्रा का समय करीब आठ घंटे से घटकर लगभग चार घंटे होने की उम्मीद है।
समय की बचत के अलावा यह परियोजना बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क, तेज माल परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब लोगों की नजर परियोजना की आगे की प्रक्रियाओं और निर्माण कार्य शुरू होने पर है।