आस्था का सैलाब, कालीघाट से पहुंचे कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में लगाई डुबकी
सुल्तानगंज (भागलपुर): श्रावणी मेला 2026 के आधिकारिक शुभारंभ (30 जुलाई) से पहले ही धर्मनगरी सुल्तानगंज में भक्ति का प्रवाह चरम पर है। शनिवार को उस समय वातावरण शिवमय हो गया, जब पश्चिम बंगाल के कालीघाट से पैदल यात्रा तय कर पहुंचे दो दर्जन कांवरियों के जत्थे ने उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई । हर-हर महादेव और बोल-बम के जयघोष से पूरा घाट परिसर गूंज उठा।
आस्था की लंबी डगर: बंगाल से अजगैवीनाथ धाम तक
कालीघाट से आए इन कांवरियों के जत्थे ने बताया कि वे अपने साथ एक क्विंटल का विशेष कांवड़ लेकर यात्रा कर रहे हैं । इतनी भारी कांवड़ के साथ मीलों की पैदल यात्रा करना उनकी अटूट श्रद्धा और बाबा भोलेनाथ के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। जत्थे के सदस्यों ने बताया कि वे बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कठिन यात्रा पूरी करने के संकल्प के साथ निकले हैं। सुल्तानगंज की पावन गंगा में डुबकी लगाने के बाद, ये कांवरिये विधि-विधान से जल भरकर देवघर के लिए प्रस्थान करेंगे।
मेले की दस्तक और बढ़ती भीड़
यद्यपि आधिकारिक तौर पर श्रावणी मेला 30 जुलाई से शुरू होना है, लेकिन सुल्तानगंज में श्रद्धालुओं की संख्या में हर दिन वृद्धि हो रही है । असम, ओडिशा, नेपाल और पश्चिम बंगाल जैसे दूरदराज के राज्यों से कांवरियों का पहुंचना शुरू हो चुका है । अजगैवीनाथ धाम में जलार्पण के लिए श्रद्धालुओं की कतारें अब लंबी होती जा रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि इस वर्ष की कांवड़ यात्रा पिछले वर्षों के मुकाबले और भी भव्य होने वाली है ।
प्रशासन की तैयारियां और अंतिम चरण का कार्य
श्रद्धालुओं की इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है । जिलाधिकारी ने हाल ही में सुल्तानगंज का दौरा कर ड्रोन शो, जर्मन हैंगर, टेंट सिटी और गंगा महाआरती समेत तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया । अधिकारियों को 24 जुलाई तक सभी निर्माण कार्य और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
यातायात और कनेक्टिविटी: भीड़ को देखते हुए रेलवे ने रांची और भागलपुर के बीच श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेनों का परिचालन घोषित कर दिया है, जो सुल्तानगंज में रुकेंगी ।
सुरक्षा व तकनीकी सहयोग: पहली बार सुरक्षा के लिए एआई (AI) आधारित सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, अजगैवीनाथ मंदिर में जलार्पण को सुगम बनाने के लिए 'आधुनिक अरघा सिस्टम' का भी प्रावधान किया गया है ।
सुविधाएं: कांवरियों के लिए टेंट सिटी का निर्माण जोरों पर है। इसके अलावा 14 स्थानों पर 24 घंटे स्वास्थ्य शिविर चलाने की योजना है, ताकि गंभीर मरीजों को तत्काल सहायता मिल सके।
भक्ति और संकल्प का मिलन
कालीघाट के कांवरियों का यह जत्था न केवल अपनी श्रद्धा का परिचय दे रहा है, बल्कि यह उन लाखों शिवभक्तों की भावना का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो अपनी मुश्किलों को दरकिनार कर बाबा के दर्शन के लिए आतुर हैं। सुल्तानगंज का घाट आज उसी आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। प्रशासन का लक्ष्य है कि कांवरियों की इस कठिन 'बोल-बम' यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया जा सके।
अगले कुछ दिनों में जैसे-जैसे मेला प्रारंभ होने की तारीख करीब आएगी, सुल्तानगंज की गलियां और गंगा घाट भक्ति के और भी अद्भुत दृश्यों के साक्षी बनेंगे।