LNMU में आइसा और आरवाइए ने आयोजित की छात्र-युवा संसद, शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के मुद्दों पर हुई चर्चा

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में छात्र संगठन आइसा (AISA) और आरवाइए (RYA) की ओर से छात्र-युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-युवाओं ने भाग लिया और शिक्षा, परीक्षा, रोजगार तथा सरकारी विद्यालयों की स्थिति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। छात्र-युवा संसद के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों को लेकर युवाओं की आवाज को मजबूत करने के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन की आवश्यकता है।

कार्यक्रम में छात्रों ने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि देश और राज्य के युवाओं का भविष्य शिक्षा और रोजगार की बेहतर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इन दोनों क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं को केवल प्रशासनिक स्तर पर नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और लोकतांत्रिक विमर्श के माध्यम से भी उठाने की जरूरत है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंता

छात्र-युवा संसद में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त संसाधन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। उन्होंने पाठ्यक्रमों को समय के अनुरूप बनाने और उनमें आवश्यक सुधार करने की मांग पर जोर दिया।

छात्रों का कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं होना चाहिए। पाठ्यक्रम में ऐसी सामग्री और गतिविधियों को भी पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में तार्किक सोच, व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार से जुड़ी क्षमताओं का विकास हो सके।

वक्ताओं ने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और रोजगार के स्वरूप को देखते हुए पाठ्यक्रमों में समय-समय पर बदलाव आवश्यक है। विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान और कौशल उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालयों को भी लगातार अपनी शैक्षणिक व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग

छात्र-युवा संसद में परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता की मांग की। उनका कहना था कि परीक्षा से संबंधित किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का सीधा प्रभाव विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

छात्रों ने कहा कि परीक्षा की तारीख, परिणाम, मूल्यांकन और अन्य प्रक्रियाओं में स्पष्टता होनी चाहिए। यदि परीक्षा या परिणाम में अनावश्यक देरी होती है तो विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई और रोजगार की योजनाएं प्रभावित होती हैं।

वक्ताओं ने परीक्षा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय पर समाधान किया जा सके।

एनटीए को भंग करने की मांग

कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। वक्ताओं ने विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि परीक्षा संचालन की व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बनाए रखना जरूरी है।

छात्र नेताओं ने कहा कि परीक्षा एजेंसी और परीक्षा प्रणाली के प्रति विद्यार्थियों का भरोसा लोकतांत्रिक और पारदर्शी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को दूर करने की मांग की।

आइसा और आरवाइए से जुड़े वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी या अव्यवस्था का असर लाखों विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

रोजगार का सवाल बना प्रमुख मुद्दा

छात्र-युवा संसद में रोजगार के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। युवाओं ने कहा कि शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार हासिल करना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने सरकार से रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करने और भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए। युवाओं का कहना था कि लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ता है।

छात्र नेताओं ने कहा कि रोजगार केवल व्यक्तिगत आय का माध्यम नहीं है, बल्कि युवाओं के आत्मनिर्भर बनने और समाज की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए रोजगार के सवाल को प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाना चाहिए।

सरकारी विद्यालयों की बदहाली पर चिंता

कार्यक्रम में सरकारी विद्यालयों की स्थिति को लेकर भी चर्चा हुई। छात्रों और वक्ताओं ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पर्याप्त संसाधन, शिक्षकों की उपलब्धता और बेहतर आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि समाज के बड़ी संख्या में बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ते हैं। इसलिए सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार का सीधा प्रभाव समाज के कमजोर और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा।

वक्ताओं ने विद्यालयों में भवन, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, शौचालयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति सुधारने की जरूरत पर जोर दिया। इसके साथ ही शिक्षकों की पर्याप्त नियुक्ति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

पाठ्यक्रम में सुधार पर जोर

छात्रों ने पाठ्यक्रमों में सुधार को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनका कहना था कि कई पाठ्यक्रमों को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप लगातार अपडेट किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना जरूरी है।

छात्रों ने कहा कि उच्च शिक्षा के दौरान विद्यार्थियों को शोध, तकनीकी ज्ञान, डिजिटल कौशल और अन्य व्यावहारिक क्षमताओं के विकास के अवसर मिलने चाहिए। इससे उन्हें आगे की पढ़ाई और रोजगार दोनों में मदद मिल सकती है।

आंदोलन की जरूरत पर जोर

छात्र-युवा संसद में वक्ताओं ने शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना छात्रों और युवाओं का अधिकार है।

वक्ताओं ने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े सवालों को लेकर संगठित हों। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए संवाद जरूरी है, लेकिन यदि लगातार मांगों की अनदेखी होती है तो लोकतांत्रिक आंदोलन का रास्ता अपनाना भी आवश्यक हो सकता है।

छात्र नेताओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को व्यापक छात्र-युवा आंदोलन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

विश्वविद्यालय स्तर पर भी सुधार की मांग

कार्यक्रम में विश्वविद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था को लेकर भी छात्रों ने अपनी चिंताएं रखीं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को समय पर शैक्षणिक सुविधाएं और प्रशासनिक सेवाएं मिलनी चाहिए।

परीक्षा, परिणाम, नामांकन, प्रमाणपत्र और छात्र सुविधाओं से संबंधित कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। छात्रों का कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनके समाधान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना चाहिए।

छात्र-युवा संसद का उद्देश्य

आयोजकों के अनुसार छात्र-युवा संसद का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए मंच उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अपने विचार रखने और सामूहिक रूप से समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर मिला।

वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करती है। छात्रों को केवल शिक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि समाज के महत्वपूर्ण नागरिक के रूप में भी अपनी भूमिका समझनी चाहिए।

आगे की रणनीति पर भी चर्चा

कार्यक्रम में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर आगे की रणनीति को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। छात्र नेताओं ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय और राज्य स्तर पर लगातार संवाद और अभियान चलाने की जरूरत है।

आयोजकों ने छात्रों से अधिक संख्या में जुड़ने और अपनी समस्याओं को संगठित तरीके से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवाल लंबे समय तक युवाओं के भविष्य को प्रभावित करते हैं, इसलिए इनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक है।

कुल मिलाकर, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में आइसा और आरवाइए द्वारा आयोजित छात्र-युवा संसद में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने, सरकारी विद्यालयों की स्थिति सुधारने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। कार्यक्रम में एनटीए को भंग करने की मांग भी उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की समस्याओं को प्रभावी तरीके से सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन और संगठनात्मक प्रयास जरूरी हैं। छात्र-युवा संसद ने विद्यार्थियों को अपनी चिंताओं और मांगों पर सामूहिक चर्चा का मंच दिया और शिक्षा एवं रोजगार से जुड़े मुद्दों पर आगे भी आवाज उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।