अखिल भारतीय धोबी महासंघ ने बीपीएससी की प्रतिभाओं को नवाजा; डीएसपी बनी प्रियंका कुमारी के पिता हुए सम्मानित

पीरपैंती (भागलपुर): शिक्षा और दृढ़ संकल्प के दम पर सफलता की नई इबारत लिखने वाले मेधावी छात्रों के सम्मान में पीरपैंती में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय धोबी महासंघ के तत्वावधान में आयोजित इस 'प्रतिभा सम्मान समारोह' में 70वीं बीपीएससी (BPSC) परीक्षा में परचम लहराने वाले 59 सफल बच्चों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन न केवल सफल अभ्यर्थियों के लिए गौरव का क्षण था, बल्कि क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया।

सफलता का जश्न: डीएसपी प्रियंका कुमारी की उपलब्धि

इस समारोह का सबसे आकर्षण केंद्र पीरपैंती के एक स्थानीय डीलर की बेटी प्रियंका कुमारी रहीं, जिन्होंने 70वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर डीएसपी (DSP) के पद पर अपना स्थान सुरक्षित किया है। प्रियंका की यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। हालांकि, व्यस्तता और कार्यभार के कारण प्रियंका स्वयं समारोह में उपस्थित नहीं हो सकीं, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में उनके पिता महेश रजक ने यह सम्मान ग्रहण किया।

समारोह के दौरान जब महेश रजक मंच पर सम्मानित होने के लिए पहुंचे, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। पिता की आंखों में अपनी बेटी की सफलता की चमक साफ देखी जा सकती थी। इस दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिवादन किया, जो एक पिता के संघर्ष और उनकी बेटी की कड़ी मेहनत की कहानी बयां कर रहा था।

शिक्षा ही सामाजिक उत्थान का आधार

अखिल भारतीय धोबी महासंघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा का है और इस दौर में शिक्षा ही एकमात्र ऐसा माध्यम है, जो समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में ला सकता है। 70वीं बीपीएससी में सफल हुए 59 छात्र-छात्राओं को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रियंका कुमारी जैसे युवा अधिकारी अब समाज के लिए 'रोल मॉडल' बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि बेटी की सफलता से यह साबित हो गया है कि यदि सही मार्गदर्शन और अटूट हौसला हो, तो संसाधनों का अभाव सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकता।

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

इस सम्मान समारोह में भाग लेने वाले अन्य सफल अभ्यर्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। कार्यक्रम में उपस्थित अभिभावकों ने भी इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की शिक्षा के प्रति समाज को और अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।

सामाजिक एकजुटता का संदेश

अखिल भारतीय धोबी महासंघ का यह प्रयास केवल एक सम्मान समारोह तक सीमित नहीं था, बल्कि यह समाज में व्याप्त शैक्षिक जागरूकता को बढ़ाने की एक बड़ी पहल थी। इस तरह के आयोजनों से समाज के भीतर एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों को बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।

समारोह के समापन पर महासंघ के अध्यक्ष ने सभी सफल छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में इन बच्चों का चयन बिहार के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

 एक नई सुबह की शुरुआत

पीरपैंती में आयोजित यह प्रतिभा सम्मान समारोह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि शिक्षा के क्षेत्र में ग्रामीण प्रतिभाएं अब बड़े शहरों के छात्रों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। महेश रजक का अपनी बेटी के लिए सम्मान ग्रहण करना इस बात का प्रतीक है कि समाज अब अपनी बेटियों की सफलता में अपनी जीत देख रहा है। निश्चित रूप से, प्रियंका कुमारी की यह सफलता पीरपैंती के हर घर के लिए एक नई सुबह लेकर आई है, जो आने वाले समय में और भी कई मेधावी युवाओं को डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने की प्रेरणा देगी।