बिहार के विद्यार्थियों के लिए 'अपार आईडी' (APAAR ID) और आधार संख्या अनिवार्य शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए निर्देश
भागलपुर/बिहार: बिहार के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव करते हुए राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से विद्यार्थियों के पंजीकरण के लिए 'अपार आईडी' (APAAR ID) और आधार संख्या को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' (One Nation, One Student ID) पहल के तहत उठाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को पूरी तरह से डिजिटल और एकीकृत बनाना है।
क्या है अपार आईडी और इसका महत्व?
'अपार' यानी 'ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री' (Automated Permanent Academic Account Registry) एक डिजिटल पहचान पत्र है। जिस तरह आधार संख्या एक नागरिक की पहचान होती है, उसी तरह अपार आईडी हर छात्र की आजीवन शैक्षणिक पहचान होगी।
डिजिटल एकीकरण: इसके माध्यम से छात्र के बचपन से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी रिकॉर्ड, जैसे परीक्षा परिणाम, सह-पाठ्यक्रम उपलब्धियां और अन्य प्रमाणपत्र एक ही जगह (डिजिलॉकर) पर सुरक्षित रहेंगे।
आजीवन पहचान: यह आईडी छात्र के पूरे करियर में एक ही रहेगी, जिससे भविष्य में कॉलेज में दाखिले या नौकरी के आवेदन के समय दस्तावेजों का सत्यापन बेहद आसान हो जाएगा।
भागलपुर और राज्य भर में निर्देश
भागलपुर सहित पूरे बिहार के सरकारी और निजी विद्यालयों को शिक्षा परियोजना परिषद् द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि वे 30 जून 2026 तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी जनरेट करना सुनिश्चित करें। इस प्रक्रिया को गति देने के लिए हर शनिवार को मेगा कैंप आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
जिला शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 9 से 12 तक के बोर्ड परीक्षा पंजीकरण के लिए अपार आईडी और विद्यालय का U-DISE+ कोड दर्ज करना अब अनिवार्य है। इनके बिना पंजीकरण प्रक्रिया को पूरा करना संभव नहीं होगा। साथ ही, इग्नू (IGNOU) जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी अपने ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अपार आईडी को अनिवार्य कर दिया है।
नामांकन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश
अक्सर ऐसी खबरें सामने आती थीं कि आईडी के अभाव में बच्चों का नामांकन रुक जाता है, इसे लेकर भागलपुर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल 'परमानेंट एजुकेशन नंबर' (PEN) या अपार आईडी न होने के कारण किसी भी बच्चे को नामांकन से वंचित नहीं किया जाएगा। यदि तकनीकी कारणों से आईडी नहीं बन पा रही है, तो प्रक्रिया को सुगम बनाया जाएगा ताकि शिक्षा के अधिकार में बाधा न आए।
अभिभावकों के लिए मुख्य बातें
आधार-लिंक अनिवार्य: अपार आईडी बनाने के लिए छात्र का आधार नंबर आधार-आधारित सत्यापन (Aadhaar-based verification) प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है।
डाटा मिलान: छात्रों के नाम की वर्तनी (spelling) और जन्मतिथि (DOB) का मिलान उनके आधार कार्ड से होना चाहिए। किसी भी विसंगति की स्थिति में उसे समय रहते सुधारा जाना चाहिए।
सहमति पत्र: इस पूरी प्रक्रिया के लिए माता-पिता को अपनी सहमति देना आवश्यक है, ताकि बच्चे का डाटा सुरक्षित रूप से डिजिलॉकर से जोड़ा जा सके।
डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ता कदम
शिक्षा मंत्रालय की इस पहल का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और फर्जी विद्यार्थियों (Ghost students) की पहचान करना है। इससे न केवल डेटा प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र छात्रों तक पहुँचाना भी आसान हो जाएगा।
प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों को सलाह दी है कि वे आधार-लिंक प्रक्रिया में आने वाली किसी भी समस्या के लिए तुरंत जिला शिक्षा कार्यालय (DEO) या अपने नोडल अधिकारी से संपर्क करें। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान किसी भी छात्र की पढ़ाई बाधित न हो।