'संतमत सत्संग' में डॉ. शिवनाथ बाबा ने कहा—गुरु की शरण ही मोक्ष का एकमात्र मार्ग

पीरपैंती (भागलपुर): भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड स्थित विनोबाटोला में आध्यात्मिकता और शांति का एक सुंदर संगम देखने को मिला। मैय्यो बाबू के आवास पर आयोजित एक दिवसीय 'संतमत सत्संग' में क्षेत्र के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। सत्संग के दौरान डॉ. शिवनाथ बाबा ने अपने ओजस्वी प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को आत्मज्ञान और गुरु महिमा के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि भागदौड़ भरी इस दुनिया में यदि मनुष्य को सच्ची शांति चाहिए, तो उसे गुरु की शरण में जाना ही होगा।

आध्यात्मिक ज्ञान का महाकुंभ

सत्संग का कार्यक्रम सुबह से ही भजन-कीर्तन के साथ शुरू हुआ। मैय्यो बाबू के आवास पर भक्तिमय वातावरण का निर्माण हुआ था, जहां संतों के आगमन से स्थानीय लोग अभिभूत थे। डॉ. शिवनाथ बाबा ने अपने प्रवचन में संतमत की प्रमुख शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि, "संसार की माया-मोह में फंसकर मनुष्य अपना वास्तविक लक्ष्य भूल जाता है। गुरु का सानिध्य ही वह प्रकाश है जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर हमें ईश्वर से जोड़ता है।"

प्रवचन के मुख्य बिंदु: क्यों जरूरी है गुरु की शरण?

डॉ. शिवनाथ बाबा ने बड़े ही सरल और बोधगम्य उदाहरणों के माध्यम से लोगों को सत्संग की महत्ता समझाई। उनके प्रवचन के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:

ज्ञान का प्रकाश: उन्होंने कहा कि बिना गुरु के ज्ञान की प्राप्ति असंभव है। जिस प्रकार दीपक के बिना कमरा अंधेरा रहता है, ठीक उसी प्रकार गुरु के मार्गदर्शन के बिना मनुष्य का जीवन दुखों और भ्रमों में उलझा रहता है।

आंतरिक शुद्धि: सत्संग केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि इसे जीवन में उतारने की प्रक्रिया है। जब मनुष्य सत्संग में बैठता है, तो उसके मन के विकारों का नाश होता है।

कर्म और भक्ति का सामंजस्य: उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्ति का अर्थ संसार छोड़ना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है।

गुरु शरणागति: उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में एक ऐसे गुरु को चुनें जो उन्हें सही राह दिखा सके और उनके आत्मिक उत्थान में सहायक हो।

श्रद्धालुओं में अपार उत्साह

इस आयोजन में शामिल होने के लिए आस-पास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी भक्त पहुंचे थे। सत्संग स्थल पर अनुशासन और भक्ति का अद्भुत समन्वय था। विशेषकर महिलाओं और युवाओं की बढ़-चढ़कर भागीदारी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भी अब अध्यात्म और भारतीय परंपरा की ओर आकर्षित हो रही है। कार्यक्रम के अंत में गुरु वंदना के साथ सामूहिक प्रार्थना की गई, जिससे पूरा वातावरण गूंज उठा।

मैय्यो बाबू के आवास पर भव्य व्यवस्था

मेजबान मैय्यो बाबू और उनके परिवार ने आने वाले सभी भक्तों के लिए भोजन (प्रसाद) की भव्य व्यवस्था की थी। इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय स्वयंसेवकों ने दिन-रात मेहनत की। सत्संग के आयोजकों ने बताया कि पीरपैंती में इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है ताकि समाज में नैतिक मूल्यों और प्रेम का संचार होता रहे।

समाज पर सत्संग का प्रभाव

स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज की कुरीतियों को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। पीरपैंती जैसे ग्रामीण अंचलों में जब कोई संत आकर जीवन के रहस्यों को साझा करता है, तो लोगों में सकारात्मक परिवर्तन आता है। अपराध और तनाव से दूर रहने के लिए भी ऐसे सत्संग एक प्रेरणा का कार्य करते हैं।

 शांति की तलाश का अंत

सत्संग के समापन पर डॉ. शिवनाथ बाबा ने सभी भक्तों को आशीर्वाद दिया और उनसे आग्रह किया कि वे आज सुनी हुई बातों को केवल कानों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने दैनिक जीवन में उतारें। उन्होंने कहा, "सत्संग का सही लाभ तभी है, जब आपका व्यवहार और विचार पहले से अधिक शुद्ध और विनम्र हो जाएं।"

पीरपैंती का यह 'संतमत सत्संग' निश्चित रूप से एक ऐसी ऊर्जा का संचार कर गया है, जो श्रद्धालुओं को लंबे समय तक राह दिखाएगी। इस तरह के आयोजनों की सार्थकता इसी में है कि वे समाज को जोड़ें और मनुष्य को उसके अस्तित्व का अहसास कराएं।