अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर भव्य जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन; प्राचार्य प्रो. हिमांशु ने दी हेपेटाइटिस के लक्षणों और बचाव की विस्तृत जानकारी
भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी भागलपुर के अंतर्गत आने वाले नवगछिया के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग (Arjun College of Nursing) में 'विश्व हेपेटाइटिस दिवस' (World Hepatitis Day) के अवसर पर एक विशेष जागरूकता संगोष्ठी सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नर्सिंग के विद्यार्थियों, स्वास्थ्यकर्मियों और आसपास के आम नागरिकों को यकृत (Liver) को प्रभावित करने वाली इस गंभीर बीमारी हेपेटाइटिस के प्रकार, उसके फैलने के कारणों, लक्षणों और आधुनिक चिकित्सा उपचार के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हिमांशु ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में हेपेटाइटिस के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और समाज को इस बीमारी के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया।
दीप प्रज्ज्वलन और संगोष्ठी का उद्देश्य
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के सभागार में मुख्य अतिथि और प्राचार्य द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
स्वास्थ्य शिक्षा की महत्ता: आयोजन समिति की ओर से बताया गया कि एक नर्सिंग संस्थान होने के नाते अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह न केवल अपने छात्र-छात्राओं को किताबी ज्ञान दे, बल्कि समाज में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाने में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
बढ़ता खतरा और सतर्कता: संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि हेपेटाइटिस आज के समय में एक साइलेंट किलर (Silent Killer) का रूप लेता जा रहा है, जिसके प्रति समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
प्रो. हिमांशु का मुख्य संबोधन: हेपेटाइटिस क्या है और यह क्यों खतरनाक है?
संगोष्ठी के मुख्य वक्ता और कॉलेज के प्राचार्य प्रो. हिमांशु ने अपने विस्तृत संबोधन में हेपेटाइटिस के चिकित्सीय पक्षों को बहुत ही सरल भाषा में समझाया:
हेपेटाइटिस का अर्थ: उन्होंने बताया कि 'हेपेटाइटिस' का सीधा अर्थ लीवर की सूजन (Liver Inflammation) से है, जो मुख्य रूप से वायरल संक्रमण के कारण होता है। इसके अलावा अत्यधिक मदिरापान, कुछ विशेष प्रकार की दवाइयों का सेवन और ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसका कारण बन सकती हैं।
प्रमुख प्रकार (A, B, C, D और E): प्रो. हिमांशु ने विस्तार से बताया कि हेपेटाइटिस मुख्य रूप से पांच प्रकार का होता है—हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई। इनमें से हेपेटाइटिस बी और सी को सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है क्योंकि ये क्रॉनिक (दीर्घकालिक) रूप धारण करके सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर सकते हैं।
फैलने के मुख्य कारण: उन्होंने बताया कि हेपेटाइटिस ए और ई मुख्य रूप से दूषित पानी और भोजन के सेवन से फैलता है, जबकि हेपेटाइटिस बी, सी और डी संक्रमित रक्त के आदान-प्रदान, असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई (Syringe) के इस्तेमाल या संक्रमित मां से उसके नवजात शिशु में منتقل (Transmit) हो सकता है।
लक्षण और बचाव के उपाय: 'सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है'
कार्यशाला के दौरान नर्सिंग के विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों को हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और उससे बचने के उपायों का प्रशिक्षण दिया गया:
प्रमुख लक्षण: भूख न लगना, लगातार थकान महसूस होना, उल्टी या मितली आना, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द, पेशाब का रंग अत्यधिक पीला होना और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया के लक्षण) हेपेटाइटिस के संकेत हो सकते हैं।
बचाव के व्यावहारिक उपाय:
हमेशा उबला हुआ या शुद्ध पेयजल पिएं और बाहर के खुले, दूषित खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
बच्चों और व्यस्कों को समय पर हेपेटाइटिस बी का टीका (Hepatitis Vaccine) जरूर लगवाना चाहिए।
चिकित्सालयों या क्लीनिकों में हमेशा डिस्पोजेबल और नई सुइयों (Syringes) का ही उपयोग सुनिश्चित करें।
व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और नियमित रूप से साबुन से हाथ धोएं।
विद्यार्थियों और स्वास्थ्यकर्मियों की सक्रिय भागीदारी
इस जागरूकता संगोष्ठी में अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
छात्रों ने हेपेटाइटिस के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एक लघु नाटक और नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति भी दी, जिसके जरिए यह संदेश दिया गया कि समय पर जांच और टीकाकरण से इस बीमारी को पूरी तरह हराया जा सकता है।
संगोष्ठी के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र (Q&A Session) का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने प्राध्यापकों से हेपेटाइटिस के उपचार और नई मेडिकल तकनीकों से जुड़े कई सवाल पूछे, जिनका संतोषजनक समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
नवगछिया स्थित अर्जुन कॉलेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित विश्व हेपेटाइटिस दिवस की यह संगोष्ठी इस मायने में बेहद सफल रही कि इसने न केवल भावी नर्सिंग प्रोफेशनल्स को बल्कि आम जनता को भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या के प्रति जागरूक किया। प्राचार्य प्रो. हिमांशु के मार्गदर्शन में हुआ यह आयोजन स्वास्थ्य शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिससे आने वाले दिनों में लोगों को इस लाइलाज या गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।