रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बिहार की महिलाओं और बेटियों को बड़ा तोहफा स्टार्टअप चैलेंज, बालिका पीएचडी फेलोशिप और 'पुलिस दीदी' योजना का भव्य शुभारंभ
पावन पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर बिहार सरकार ने प्रदेश की महिलाओं, बहनों और बेटियों के सशक्तिकरण, सुरक्षा और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई ऐतिहासिक घोषणाएं की हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया और आधिकारिक कार्यक्रमों के माध्यम से राज्यभर में तीन बड़ी क्रांतिकारी योजनाओं का आगाज किया है। इनमें स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा के लिए 'पुलिस दीदी' (अभया ब्रिगेड) के तहत हजारों दोपहिया वाहनों की सौगात, शोधरत छात्राओं के लिए 'मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप', और महिला उद्यमियों के लिए 'बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना' शामिल हैं। सरकार के इस कदम से स्पष्ट है कि बिहार की प्रगति का रास्ता महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक स्वावलंबन से होकर गुजरता है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट के माध्यम से इन तीनों योजनाओं और उनके प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
स्कूल-कॉलेज की छात्राओं की सुरक्षा के लिए 'पुलिस दीदी' (अभया ब्रिगेड) का आगाज
महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने एक विशेष पुलिस दस्ते को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
4,700 स्कूटर और मोटरसाइकिलों का लोकार्पण: शैक्षणिक संस्थानों के आसपास मनचलों पर नकेल कसने और छात्राओं को भयमुक्त वातावरण देने के लिए 'पुलिस दीदी' (अभया ब्रिगेड) को कुल 4,700 नए दोपहिया वाहनों (स्कूटर एवं मोटरसाइकिल) की सौगात दी गई है।
सतर्क निगरानी: इन वाहनों के जरिए महिला पुलिसकर्मी स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के आसपास नियमित गश्त करेंगी, जिससे बालिकाओं के मन से डर दूर होगा और किसी भी प्रकार की अभद्रता या छेड़खानी की घटनाओं पर तुरंत अंकुश लगाया जा सकेगा।
उच्च शिक्षा को बढ़ावा: 'मुख्यमंत्री बालिका पीएचडी फेलोशिप' की शुरुआत
बेटियों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान (Research) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण छात्रवृत्ति योजना की शुरुआत की गई है।
1,000 छात्राओं को वित्तीय मदद: इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बिहार की लगभग 1,000 योग्य छात्राओं का चयन किया जाएगा जो पीएचडी (Ph.D.) या उच्च शोध कार्य कर रही हैं।
प्रति माह 10,000 रुपये की सहायता: चयनित शोधार्थी छात्राओं को अगले चार वर्षों तक प्रति माह 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में दी जाएगी। इससे उन्हें अपनी पढ़ाई और शोध कार्यों के दौरान आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
आर्थिक स्वावलंबन के लिए 'बिहार की बेटी स्टार्टअप चैलेंज योजना'
महिलाओं को केवल नौकरीपेशा या पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रखकर उन्हें सफल उद्यमी बनाने के लिए स्टार्टअप योजना शुरू की गई है।
50 हजार से 2 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद: इस योजना के तहत नई व्यावसायिक सोच रखने वाली बेटियों और महिलाओं को अपना खुद का बिजनेस या स्टार्टअप शुरू करने के लिए 50,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता (Financial Assistance) प्रदान की जाएगी।
रोजगार और आत्मनिर्भरता: सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में बिहार की लाखों महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करना है।
महिलाओं के विकास से ही संभव है विकसित बिहार का निर्माण
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जब तक महिलाएं आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं होंगी, तब तक एक सशक्त समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
सरकार की प्रतिबद्धता: रक्षाबंधन के ठीक पहले इन योजनाओं की सौगात देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि प्रदेश की हर बहन और बेटी की सुरक्षा और उनका उज्जवल भविष्य राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
व्यापक सामाजिक प्रभाव: इन तीनों पहलों (सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी, शिक्षा के लिए पीएचडी फेलोशिप और कारोबार के लिए स्टार्टअप चैलेंज) के धरातल पर उतरने से बिहार की आधी आबादी को एक नई उड़ान मिलने की पूरी उम्मीद है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा रक्षा-बंधन के पावन पर्व पर शुरू की गई ये योजनाएं बिहार की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करेंगी। सुरक्षा, शिक्षा और स्टार्टअप का यह अनूठा त्रिवेणी संगम राज्य की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।