बिहरा-पटोरी बाजार एसबीआई एटीएम ठगी मामला: एटीएम कार्ड फंसने के बाद जालसाजों ने उड़ 38 हजार रुपये
सहरसा जिले के बिहरा-पटोरी बाजार स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एटीएम बूथ पर ठगी और धोखाधड़ी का एक और मामला सामने आया है। शातिर अपराधियों ने एटीएम मशीन में तकनीकी खराबी या कार्ड फंसने का फायदा उठाकर एक बार फिर एक सीधे-साधे ग्रामीण को अपना शिकार बनाया। परमानंद ठाकुर नामक व्यक्ति जब पैसे निकालने एटीएम पहुंचे, तो उनका कार्ड मशीन में फंस गया। इसी का लाभ उठाकर वहां पहले से घात लगाए बैठे ठगों ने मदद का नाटक किया और धोखे से पिन नंबर हासिल कर उनके खाते से 38 हजार रुपये की अवैध निकासी कर ली। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में रोष है और एटीएम बूथों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना का विवरण: कैसे हुई ठगी?
यह पूरी घटना बिहरा-पटोरी बाजार मुख्य मार्ग के पास स्थित एसबीआई (SBI) के एटीएम काउंटर पर घटी। पीड़ित परमानंद ठाकुर किसी जरूरी काम के लिए अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए इस एटीएम बूथ पर गए थे।
मशीन में कार्ड का फंसना: जब परमानंद ठाकुर ने एटीएम कार्ड को मशीन में डाला, तो तकनीकी या किसी सुनियोजित तरीके से उनका कार्ड मशीन के अंदर ही फंस गया। वह कार्ड बाहर नहीं निकल रहा था।
मदद के नाम पर धोखा: पीड़ित व्यक्ति जब कार्ड निकालने के लिए परेशान थे, तभी बूथ के अंदर या आसपास मौजूद शातिर ठगों ने खुद को बैंककर्मी या मददगार बताकर उनसे संपर्क किया।
पिन की चोरी और अवैध निकासी: ठगों ने बड़ी चालाकी से पीड़ित को विश्वास में लिया और पिन (PIN) नंबर पूछ लिया या गुप्त तरीके से देख लिया। इसके बाद धोखे से कार्ड को मशीन से बाहर निकालने या दोबारा इस्तेमाल करने का झांसा देकर उन्होंने कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खाते से 38 हजार रुपये उड़ा लिए। थोड़ी देर बाद जब पीड़ित के मोबाइल पर पैसे कटने का संदेश आया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
एसबीआई एटीएम बूथों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस सनसनीखेज वारदात के बाद से स्थानीय व्यवसायियों और खाताधारकों में भारी दहशत और गुस्सा है। बिहरा-पटोरी बाजार स्थित इस एसबीआई एटीएम की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं:
सुरक्षा गार्ड की अनुपस्थिति: सबसे बड़ा सवाल यह है कि अधिकांश ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के एटीएम बूथों पर बैंक प्रबंधन द्वारा किसी भी सुरक्षा गार्ड (Security Guard) की तैनाती नहीं की जाती है। गार्ड के न होने से अपराधी किस्म के लोग आसानी से एटीएम के अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली: कई बार एटीएम बूथों में लगे सीसीटीवी कैमरे या तो खराब पाए जाते हैं या फिर उनकी फुटेज इतनी स्पष्ट नहीं होती कि अपराधियों की पहचान आसानी से की जा सके।
तकनीकी खामियों का फायदा: शातिर ठग अक्सर एटीएम मशीनों के स्लॉट (जहां कार्ड डाला जाता है) के साथ छेड़छाड़ करते हैं ताकि कार्ड आसानी से फंस जाए और वे भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना सकें।
पुलिस और बैंक प्रबंधन की भूमिका
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है।
थाना में शिकायत: पीड़ित परमानंद ठाकुर द्वारा स्थानीय थाना में लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई गई है। पुलिस ने मामले को दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी है।
सीसीटीवी फुटेज खंगालना: पुलिस एटीएम बूथ के अंदर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को खंगाल रही है ताकि ठगी करने वाले अपराधियों के चेहरे साफ तौर पर सामने आ सकें और उनकी पहचान की जा सके।
बैंक अधिकारियों से संपर्क: पुलिस बैंक प्रबंधन से भी संपर्क साध रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस एटीएम में पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं और ट्रांजैक्शन किस खाते या यूपीआई आईडी में ट्रांसफर किए गए हैं।
साइबर ठगी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
इस प्रकार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, इसलिए आम नागरिकों को बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। बैंक या पुलिस प्रशासन द्वारा समय-समय पर निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:
किसी को भी पिन न बताएं: अपना एटीएम पिन (PIN) नंबर कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें, चाहे वह खुद को बैंक का कर्मचारी ही क्यों न बताए।
मदद के नाम पर सतर्क रहें: यदि एटीएम में कार्ड फंस जाए या कोई तकनीकी समस्या आए, तो किसी अनजान व्यक्ति की मदद लेने के बजाय सीधे बैंक शाखा जाएं या बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करें।
कीपैड को ढकें: पिन दर्ज करते समय हमेशा दूसरे हाथ से कीपैड को अच्छी तरह ढक लें ताकि कोई आपका पासवर्ड देख न सके।
अकाउंट अलर्ट चालू रखें: अपने मोबाइल नंबर को बैंक खाते से हमेशा लिंक रखें ताकि किसी भी प्रकार के ट्रांजैक्शन का तुरंत अलर्ट (SMS) आपको मिल सके।
स्थानीय लोगों की मांग और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
बिहरा-पटोरी बाजार के निवासियों और व्यापारियों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस प्रकार के गिरोह का जल्द से जल्द पर्दाफाश किया जाए, जो भोले-भाले ग्रामीणों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं।
गश्त बढ़ाने की मांग: लोगों ने मांग की है कि बाजार क्षेत्र स्थित सभी एटीएम बूथों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जाए ताकि असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जा सके।
बैंकों की जिम्मेदारी: लोगों का यह भी कहना है कि बैंकों को अपनी संपत्ति और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए एटीएम बूथों पर सुरक्षा गार्ड तैनात करने के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
परमानंद ठाकुर के साथ हुई 38 हजार रुपये की ठगी की यह घटना एक आंख खोलने वाला वाकया है। यह दर्शाती है कि कैसे तकनीक और शातिर दिमाग का इस्तेमाल कर ग्रामीण इलाकों के सीधे-साधे लोगों की मेहनत की कमाई लूटी जा रही है। जरूरत इस बात की है कि पुलिस जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करे और जनता भी डिजिटल व एटीएम ट्रांजैक्शन करते समय पूरी तरह सतर्क रहे।