बिहारशरीफ में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का प्रदर्शन, 7 महीने से मानदेय नहीं मिलने पर सीडीपीओ कार्यालय का घेराव

बिहारशरीफ। बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों पर काम करने वाली सेविका-सहायिकाओं की आर्थिक परेशानी बढ़ती जा रही है। लंबे समय से मानदेय का भुगतान नहीं होने से नाराज आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने बिहारशरीफ में सीडीपीओ कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार और संबंधित विभाग से लंबित मानदेय का जल्द भुगतान करने की मांग की। उनका कहना है कि पिछले सात महीने से मानदेय अधर में लटका हुआ है, जिसके कारण उन्हें घर चलाने और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदर्शन के दौरान सेविकाओं और सहायिकाओं ने अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी जताई और सरकार से जल्द भुगतान की मांग की। उनका कहना था कि वे लंबे समय से आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं से जुड़ी विभिन्न सेवाओं को जिम्मेदारी के साथ पूरा कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।

सात महीने से भुगतान का इंतजार

प्रदर्शन कर रही सेविकाओं ने बताया कि कई महीनों से उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। सात महीने से भुगतान लंबित होने के कारण उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।

आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं का कहना है कि मानदेय उनके लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से घर के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि काम लगातार लिया जा रहा है, लेकिन मानदेय के भुगतान को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं बताई जा रही है। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें कार्यालय का घेराव करना पड़ा।

सीडीपीओ कार्यालय के बाहर जताया विरोध

मानदेय भुगतान की मांग को लेकर सेविकाओं और सहायिकाओं ने सीडीपीओ कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिला कर्मियों के पहुंचने से कार्यालय परिसर में हलचल बढ़ गई।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई और लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की। उनका कहना था कि बार-बार अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखने के बावजूद भुगतान की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने सरकार और विभाग से यह भी मांग की कि मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में उन्हें महीनों तक अपने भुगतान का इंतजार न करना पड़े।

सेविकाओं ने सरकार पर लगाए आरोप

प्रदर्शनकारी सेविकाओं ने सरकार पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका जमीनी स्तर पर सरकार की कई योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन उनकी अपनी आर्थिक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सेविकाओं के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियों में सहयोग दिया जाता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भी विभिन्न योजनाओं की जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराने में आंगनबाड़ी कर्मियों की भूमिका रहती है।

उनका कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद यदि सात महीने तक मानदेय नहीं मिलता है तो यह उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन जाता है।

आंगनबाड़ी केंद्रों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण

आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में बाल विकास और पोषण से जुड़ी सरकारी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाती हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से छोटे बच्चों और महिलाओं तक कई सरकारी सेवाओं और योजनाओं को पहुंचाने का काम किया जाता है।

सेविकाओं की जिम्मेदारी में बच्चों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों के संचालन के साथ-साथ लाभार्थियों से जुड़ी जानकारी और विभागीय कार्यों में सहयोग करना शामिल होता है। सहायिकाएं भी केंद्र के दैनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि जब उनसे नियमित रूप से काम लिया जा रहा है तो उनके मानदेय का भुगतान भी समय पर होना चाहिए।

आर्थिक संकट से जूझ रहीं सेविकाएं

सात महीने तक मानदेय लंबित रहने का सीधा असर सेविकाओं और सहायिकाओं के परिवारों पर पड़ रहा है। कई प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें उधार लेना पड़ रहा है।

महंगाई के दौर में लंबे समय तक आय का भुगतान नहीं होने से परिवार का बजट बिगड़ जाता है। बच्चों की पढ़ाई, घरेलू खर्च, राशन और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ जाता है।

सेविकाओं ने कहा कि वे सम्मानजनक तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभाना चाहती हैं, लेकिन समय पर मानदेय नहीं मिलने से उनके सामने गंभीर परेशानी पैदा हो रही है।

भुगतान में देरी पर स्पष्ट जानकारी की मांग

प्रदर्शन के दौरान सेविकाओं ने केवल लंबित भुगतान की मांग ही नहीं की, बल्कि भुगतान में देरी के कारण की स्पष्ट जानकारी देने की भी मांग की।

उनका कहना है कि यदि किसी प्रशासनिक या तकनीकी कारण से भुगतान रुका हुआ है तो विभाग को इसकी जानकारी कर्मचारियों को देनी चाहिए। साथ ही भुगतान जारी करने की समयसीमा भी स्पष्ट की जानी चाहिए।

सेविकाओं का कहना है कि उन्हें लगातार यह उम्मीद रहती है कि जल्द ही लंबित मानदेय उनके खाते में पहुंच जाएगा, लेकिन समय बीतने के बावजूद भुगतान नहीं होने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है।

समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शनकारी सेविकाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सात महीने से लंबित मानदेय का भुगतान अब और टाला नहीं जाना चाहिए।

सेविकाओं का कहना है कि वे पहले भी अधिकारियों के सामने अपनी समस्या रख चुकी हैं। अब वे चाहती हैं कि विभाग इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर देखे और जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करे।

यदि समस्या का समाधान नहीं होता है तो आगे सामूहिक रूप से आंदोलन करने का निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि आंदोलन के अगले चरण का स्वरूप संबंधित संगठन और सेविकाओं की बैठक के बाद तय किया जा सकता है।

कार्यालय घेराव से प्रशासन पर बढ़ा दबाव

सीडीपीओ कार्यालय का घेराव किए जाने के बाद स्थानीय प्रशासन पर समस्या के समाधान को लेकर दबाव बढ़ गया है। आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं चाहती हैं कि विभागीय स्तर पर लंबित भुगतान की स्थिति की समीक्षा की जाए और जल्द समाधान निकाला जाए।

ऐसे मामलों में विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होता है कि पात्र कर्मियों का भुगतान किसी तकनीकी, दस्तावेजी या प्रशासनिक समस्या के कारण अनावश्यक रूप से लंबित न रहे।

प्रदर्शन के बाद अब सेविकाओं की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।

समय पर मानदेय क्यों जरूरी?

आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए समय पर मानदेय मिलना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे जमीनी स्तर पर बाल विकास और पोषण से जुड़ी सेवाओं को लागू करने में सहयोग करती हैं।

यदि कर्मचारियों को लंबे समय तक भुगतान नहीं मिलता है तो इसका असर उनके मनोबल और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारी सेविकाओं का कहना है कि आर्थिक असुरक्षा के बावजूद वे अपने दायित्व निभा रही हैं।

उनका कहना है कि सरकार और विभाग को उनकी स्थिति को गंभीरता से समझते हुए लंबित भुगतान जल्द जारी करना चाहिए।

बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं पर भी असर की चिंता

आंगनबाड़ी केंद्रों का सीधा संबंध बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सेवाओं से है। ऐसे में कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है, ताकि केंद्रों का कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे।

सेविकाओं का कहना है कि वे अपने स्तर से काम में किसी तरह की लापरवाही नहीं करना चाहतीं। लेकिन लगातार मानदेय लंबित रहने से उनकी व्यक्तिगत और पारिवारिक परेशानियां बढ़ रही हैं।

उनका आग्रह है कि विभाग जल्द से जल्द भुगतान की प्रक्रिया पूरी करे, जिससे वे आर्थिक चिंता से मुक्त होकर अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर

बिहारशरीफ में सीडीपीओ कार्यालय का घेराव किए जाने के बाद अब सभी की नजर प्रशासन और विभाग की प्रतिक्रिया पर है। सेविकाएं चाहती हैं कि उन्हें जल्द भुगतान की स्पष्ट जानकारी मिले और सात महीने से लंबित मानदेय उनके खातों में भेजा जाए।

यदि प्रशासन की ओर से जल्द समाधान का आश्वासन मिलता है तो आंदोलन समाप्त हो सकता है। वहीं मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में सेविकाएं आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दे चुकी हैं।

कुल मिलाकर, बिहारशरीफ में सात महीने से मानदेय लंबित रहने के विरोध में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाओं का सीडीपीओ कार्यालय घेराव प्रशासन के लिए एक गंभीर संकेत है। प्रदर्शनकारी कर्मियों ने सरकार से लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद महीनों तक मानदेय नहीं मिलना उनके परिवारों के लिए आर्थिक संकट पैदा कर रहा है।

अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग लंबित भुगतान की वास्तविक स्थिति की जांच करे, देरी के कारणों को स्पष्ट करे और पात्र सेविका-सहायिकाओं का भुगतान जल्द सुनिश्चित करे। इससे न केवल कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी कम होगी, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के कामकाज को भी सुचारु बनाए रखने में मदद मिलेगी।