पूर्णिया में चतुर्थ मंगलवार स्वास्थ्य दिवस का सफल आयोजन: मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष जोर

पूर्णिया: जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित नियमित कार्यक्रमों के तहत, इस माह के चतुर्थ मंगलवार को जिले भर में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को सुलभ बनाना, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बच्चों के टीकाकरण एवं स्वास्थ्य की जांच करना रहा।

स्वास्थ्य मेलों और शिविरों की व्यापक रूपरेखा

जिला मुख्यालय से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक फैले स्वास्थ्य उपकेंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में सुबह से ही स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।

गर्भवती महिलाओं की जांच: शिविरों में आने वाली गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की नियमित जांच की गई, जिसमें रक्तचाप, हीमोग्लोबिन (खून की कमी), वजन और पेट की जांच शामिल रही।

गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां: एएनएम (ANM) और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन की गोलियों के सेवन और समय-समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (High-Risk Pregnancy) की पहचान: स्वास्थ्य कर्मियों ने विशेष रूप से वैसी महिलाओं की पहचान की जिनकी गर्भावस्था में जोखिम की संभावना अधिक थी, ताकि उन्हें समय पर उच्च स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफर किया जा सके।

टीकाकरण अभियान पर विशेष फोकस

चतुर्थ मंगलवार के इस कार्यक्रम का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण रहा। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को उनकी आयु के अनुसार जीवनरक्षक टीके लगाए गए।

टीकों से सुरक्षा: बच्चों को पोलियो, बीसीजी, पेंटावेलेंट, खसरा और रुबेला जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने वाले टीके दिए गए।

जागरूकता का प्रसार: कई अभिभावकों में टीकों को लेकर होने वाली झिझक या भ्रम को दूर करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने उन्हें समझाया कि ये टीके बच्चों के उज्जवल और स्वस्थ भविष्य के लिए कितने आवश्यक हैं।

मदर-चाइल्ड रजिस्ट्रेशन: जिन नवजात बच्चों का पंजीकरण नहीं हुआ था, उनका ऑन-स्पॉट रजिस्ट्रेशन किया गया और उन्हें टीकाकरण कार्ड जारी किए गए।

पोषण और जन-जागरूकता गतिविधियां

स्वास्थ्य केवल दवा और टीकाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सही पोषण का होना भी उतना ही आवश्यक है। इस बात को ध्यान में रखते हुए शिविरों में पोषण परामर्श काउंटर भी लगाए गए थे।

विशेष संदेश: "स्वस्थ बच्चा, समृद्ध परिवार" के नारे के साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने स्तनपान के महत्व और छह माह के बाद बच्चों को ऊपरी आहार (Complementary Feeding) शुरू करने के तरीकों पर माताओं से चर्चा की।

एनीमिया (खून की कमी) की रोकथाम: किशोरियों और महिलाओं में तेजी से बढ़ रही एनीमिया की समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्हें आयरन और फॉलिक एसिड (WIFS) की गोलियां वितरित की गईं।

व्यक्तिगत स्वच्छता: डायरिया और अन्य जल जनित रोगों से बचाव के लिए ओआरएस (ORS) के पैकेट और जिंक की गोलियों का वितरण किया गया तथा हाथ धोने के सही तरीकों के बारे में डेमो दिया गया।

प्रशासनिक निगरानी और अधिकारियों का निरीक्षण

कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और सिविल सर्जन कार्यालय की टीमों ने विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।

व्यवस्थाओं का जायजा: अधिकारियों ने केंद्रों पर उपलब्ध दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति तथा साफ-सफाई का बारीकी से जायजा लिया।

दिशा-निर्देश: निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्देश दिया कि किसी भी योग्य लाभार्थी को स्वास्थ्य योजनाओं के लाभ से वंचित न रखा जाए और आने वाले हर मरीज के साथ संवेदनशील व्यवहार किया जाए।

पूर्णिया जिला प्रशासन द्वारा चतुर्थ मंगलवार को आयोजित यह स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहा। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और बच्चों ने इन शिविरों का लाभ उठाया। इस प्रकार के निरंतर आयोजनों से ग्रामीण अंचल में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिल रही है। प्रशासन का यह प्रयास पूर्णिया को एक स्वस्थ और सशक्त जिला बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम साबित हो रहा है।