अनियमित आपूर्ति और लो-वोल्टेज से त्रस्त उपभोक्ता, दिनभर अंधेरे में डूबा रहा इलाका
शाहकुंड (भागलपुर): भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड में बिजली की बदहाल व्यवस्था ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले कई दिनों से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जिससे उपभोक्ता खासे परेशान हैं। बुधवार का दिन तो उपभोक्ताओं के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं रहा, जब दिनभर बिजली की आंख-मिचौली चलती रही। लगातार बिजली कटौती और खतरनाक स्तर के लो-वोल्टेज ने न केवल घरेलू कामकाज को प्रभावित किया, बल्कि स्थानीय छोटे उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों की कमर तोड़ कर रख दी है।
बुधवार का दिन: बिजली की लगातार होती कटौती
बुधवार को सुबह से ही बिजली की स्थिति चरमरा गई थी। शाहकुंड के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की आवाजाही का कोई निश्चित समय नहीं रहा। कभी कुछ मिनटों के लिए बिजली आती, तो कभी घंटों तक गायब रहती। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विभाग द्वारा कोई पूर्व सूचना दिए बिना की जा रही इस मनमानी कटौती से वे भारी मुश्किल में हैं।
एक स्थानीय उपभोक्ता ने व्यथा सुनाते हुए कहा, "दिन भर बिजली का इंतजार करते-करते थक जाते हैं। जब बिजली आती भी है, तो उसका वोल्टेज इतना कम होता है कि पंखे तक मुश्किल से चल पाते हैं।"
लो-वोल्टेज: बिजली होने के बावजूद अंधेरा
अनियमित बिजली आपूर्ति से भी अधिक खतरनाक समस्या 'लो-वोल्टेज' की है। शाहकुंड के कई गांवों में बिजली का वोल्टेज इतना कम रहता है कि घरों में बल्ब महज टिमटिमाते नजर आते हैं।
उपकरणों की सुरक्षा: लो-वोल्टेज के कारण रेफ्रिजरेटर, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फुकने का डर बना रहता है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण उनके उपकरण पहले ही खराब हो चुके हैं।
शिक्षा पर प्रभाव: भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली न होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। छात्रों को शाम के समय अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए मोमबत्ती या लालटेन का सहारा लेना पड़ रहा है।
व्यापार पर चौतरफा मार
बिजली की अनियमितता का सबसे बड़ा दंश शाहकुंड के दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को झेलना पड़ रहा है। कंप्यूटर सेंटर, वेल्डिंग शॉप, आटा चक्की और दूध डेयरी जैसे व्यवसाय पूरी तरह से बिजली पर निर्भर हैं।
आर्थिक क्षति: बिजली न रहने के कारण इन व्यवसायियों का काम ठप पड़ा है। डीजल जनरेटर का उपयोग करना अब इनके बजट से बाहर होता जा रहा है।
व्यापारियों की मांग: व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
विभाग की लापरवाही या संसाधनों का अभाव?
क्षेत्र के उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिजली विभाग के स्थानीय कार्यालय में शिकायत करने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। शिकायतों को या तो अनसुना कर दिया जाता है या फिर 'तकनीकी खराबी' बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।
जर्जर तार और ट्रांसफार्मर: क्षेत्र के कई इलाकों में बिजली के तार काफी पुराने और जर्जर हो चुके हैं, जो थोड़ी सी हवा चलने पर ही टूटकर गिर जाते हैं। वहीं, ट्रांसफार्मर भी लोड के हिसाब से अपर्याप्त हैं, जिसके कारण बार-बार फॉल्ट की समस्या पैदा होती है।
क्या कहते हैं स्थानीय जिम्मेदार?
इस संबंध में जब विद्युत विभाग के कनीय अभियंता से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कहा कि फीडर और ट्रांसफार्मर पर ओवरलोड की समस्या के कारण आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही मेंटेनेंस का काम पूरा कर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, उपभोक्ता इस तरह के आश्वासन से अब पूरी तरह से थक चुके हैं।
आम जनता की चेतावनी
शाहकुंड के नागरिकों का कहना है कि बिजली बिल समय पर जमा करने के बावजूद उन्हें यह सुविधा नहीं मिल रही है। यदि अगले कुछ दिनों में बिजली आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता संगठित होकर शाहकुंड विद्युत कार्यालय का घेराव करेगी।
समाधान की तत्काल आवश्यकता
बिजली किसी भी क्षेत्र के विकास की रीढ़ होती है। शाहकुंड में जिस तरह से बिजली व्यवस्था चरमराई हुई है, वह जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती है। गर्मी के इस मौसम में लगातार बिजली कटौती न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से पीछे धकेल रही है। अब समय आ गया है कि बिजली विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें और शाहकुंड में सुचारू बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएं।