विक्रमशिला सेतु के समानांतर बनने वाले नए फोरलेन पुल की समयसीमा बढ़ी; अब वर्ष 2029 में तैयार होगा पुल, मॉर्थ ने बदली पूर्णावधि

भागलपुर, मुख्य संवाददाता: उत्तर बिहार की लाइफलाइन कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के बगल में बहुप्रतीक्षित समानांतर फोरलेन पुल के निर्माण को लेकर एक बड़ी और अहम अपडेट सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मॉर्थ - MoRTH) ने इस महत्वकांक्षी परियोजना की पूर्णावधि (Completion Deadline) में बड़ा बदलाव किया है। निर्माण कार्य की सुस्त रफ्तार और जमीनी अड़चनों को देखते हुए अब इस नए पुल के तैयार होने की समयसीमा को वर्ष 2027 से बढ़ाकर वर्ष 2029 कर दिया गया है। बदले हुए शेड्यूलिंग के अनुसार, अब यह पुल 31 मार्च 2029 तक बनकर पूरी तरह तैयार होगा, जबकि पहले इसकी समयसीमा 08 मई 2027 निर्धारित की गई थी।

निर्माण कार्य की सुस्त चाल बनी मुख्य वजह

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मॉर्थ) द्वारा लिए गए इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण निर्माण कार्य की धीमी गति बताया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के समानांतर बन रहे इस नए फोरलेन पुल (एनएच 131बी) का अब तक मात्र 51.73 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। खास बात यह है कि इसके मुकाबले ठेका एजेंसी को निर्माण कार्य के एवज में कुल राशि का 49.78 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका है। तय समयसीमा के भीतर कार्य पूरा न होने और काम की सुस्त रफ्तार को भांपते हुए मंत्रालय ने यह संशोधन किया है।

गौरतलब है कि संबंधित ठेका एजेंसी ने 09 मई 2023 को मॉर्थ के साथ इस परियोजना के लिए अप्वाइंटमेंट किया था और कार्य का श्रीगणेश किया था। हालांकि, शुरुआती दौर से ही तकनीकी और अन्य प्रशासनिक कारणों से कार्य की गति वैसी नहीं रही जैसी इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के लिए अपेक्षित थी।

उत्तर बिहार और भागलपुर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पुल?

भागलपुर और सुदूर उत्तर बिहार को जोड़ने वाला पुराना विक्रमशिला सेतु लंबे समय से भारी ट्रैफिक और जाम की समस्याओं से जूझ रहा है। इस सेतु पर वाहनों का अत्यधिक दबाव रहता है, जिससे अक्सर मीलों लंबा जाम लग जाता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ही एनएच 131बी के तहत विक्रमशिला सेतु के समानांतर इस नए फोरलेन पुल की परिकल्पना की गई थी।

इस पुल के बन जाने से:

यातायात सुगम होगा: भागलपुर से पूर्णिया, कटिहार, और असम की ओर जाने वाले वाहनों को भारी जाम से मुक्ति मिलेगी।

व्यापारिक गतिविधियों को पंख लगेंगे: उत्तर बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच माल ढुलाई और परिवहन तेज व सुगम हो जाएगा।

समय और ईंधन की बचत: आवागमन सुचारू होने से रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों और व्यवसायियों का कीमती समय और ईंधन दोनों बचेगा।

समयसीमा बढ़ने से आम जनता में निराशा

पूर्णावधि को 2027 से बढ़ाकर 2029 किए जाने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, व्यापारियों और चालकों में निराशा का माहौल है। लोगों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य इसी सुस्त रफ्तार से चलता रहा, तो तय की गई नई डेडलाइन (मार्च 2029) तक भी प्रोजेक्ट पूरा होने पर संशय बना रहेगा। स्थानीय बुद्धिजीवियों और संगठनों ने मांग की है कि मॉर्थ और राज्य प्रशासन को मिलकर निर्माण एजेंसी पर दबाव बनाना चाहिए ताकि कार्यों में तेजी लाई जा सके और जनता को लंबे समय तक जाम की मार न झेलनी पड़े।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विक्रमशिला सेतु के समानांतर नए फोरलेन पुल की समयसीमा को वर्ष 2027 से बढ़ाकर 2029 करना यह स्पष्ट करता है कि परियोजना अभी अपनी तय गति से काफी पीछे चल रही है। उत्तर बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले इस सामरिक और आर्थिक रूप से अति-महत्वपूर्ण पुल के निर्माण कार्य में अब मॉर्थ और संबंधित एजेंसी को पूरी मुस्तैदी दिखानी होगी, ताकि तयशुदा नई तारीख (31 मार्च 2029) तक यह सौगात जनता को समर्पित की जा सके।