जिला कांग्रेस कमेटी ने 29 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन की की घोषणा, अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा ने लाठीचार्ज को बताया लोकतंत्र पर काला धब्बा

बिहार की राजनीतिक फिजा में एक बार फिर छात्रों के मुद्दों और पुलिसिया कार्रवाई को लेकर उबाल आ गया है। राज्य में विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज, बर्बरतापूर्ण दमन और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी पूरी तरह आक्रामक हो गई है। कांग्रेस ने नीतीश-भाजपा सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुखर होते हुए 29 जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन (Phased Agitation) का ऐलान किया है।

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा ने एक प्रेस वार्ता के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्रों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार लाठी और गोली के दम पर युवाओं की आवाज को दबाना चाहती है, जिसका कांग्रेस पार्टी सड़क से सदन तक पुरजोर विरोध करेगी। आइए इस पूरे घटनाक्रम, छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि, कांग्रेस के आंदोलन के स्वरूप और राजनीतिक हलकों में मची हलचल का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

पृष्ठभूमि: छात्रों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और गिरफ्तारी का पूरा मामला

बिहार में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली, पेपर लीक, रिजल्ट में अनियमितता, फीस वृद्धि और अन्य छात्रहित से जुड़े मुद्दों को लेकर युवा सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।

दमनकारी नीति का शिकार हुए युवा: राजधानी पटना समेत राज्य के कई अन्य जिलों में जब छात्रों ने अपनी जायज मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया, तो जिला प्रशासन और पुलिस ने संवाद स्थापित करने के बजाय उन पर लाठियां भांजी। कई जगहों पर महिला छात्रों को भी नहीं बख्शा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

गिरफ्तारियों का दौर: पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे दर्जनों छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। छात्रों पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए, जिससे छात्र समुदाय और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। इसी क्रूर पुलिस कार्रवाई ने विपक्ष और विशेषकर कांग्रेस पार्टी को सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया।

अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा का कड़ा रुख: "लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या"

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा ने सरकार की कार्यप्रणाली की कड़ी निंदा करते हुए इसे राज्य में "अघोषित आपातकाल" करार दिया है।

लोकतंत्र पर हमला: राजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और अपनी बात सरकार तक पहुँचाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। लेकिन बिहार सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग कर रही है। छात्रों पर हुआ लाठीचार्ज सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है।

गिरफ्तारी की निंदा: कांग्रेस अध्यक्ष ने मांग की कि गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों को तत्काल प्रभाव से बिना शर्त रिहा किया जाए और उन पर दर्ज फर्जी मुदमों को वापस लिया जाए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।

29 जुलाई से शुरू होने वाले चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

छात्रों के समर्थन में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा घोषित 29 जुलाई से शुरू होने वाला यह चरणबद्ध आंदोलन सरकार की नींद उड़ाने के लिए तैयार किया गया है। आंदोलन के विभिन्न चरण इस प्रकार हैं:

प्रथम चरण - धरना-प्रदर्शन और रोष मार्च (29 जुलाई से शुरुआत): आंदोलन के पहले दिन जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस कार्यकर्ता, युवा कांग्रेस के नेता और छात्र संगठन के लोग हाथों में तख्तियां लेकर विशाल रोष मार्च निकालेंगे और सरकार विरोधी नारे लगाएंगे।

द्वितीय चरण - पुतला दहन और ज्ञापन सौंपना: जिला स्तर पर जिलाधिकारी (DM) के माध्यम से महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें पुलिसिया ज्यादती की न्यायिक जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग होगी।

तृतीय चरण - व्यापक जन-आंदोलन और चक्का जाम: यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर संज्ञान नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी आंदोलन को और तीव्र करते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और ग्रामीण स्तर पर जन-जागरण अभियान चलाएगी।

विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का मिल रहा समर्थन

कांग्रेस पार्टी द्वारा उठाए गए इस कदम को अन्य राजनीतिक दलों और विभिन्न छात्र संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है।

युवाओं में बढ़ता असंतोष: बेरोजगारी, पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही से त्रस्त बिहार का युवा वर्ग अब इस आंदोलन के जरिए सरकार को सबक सिखाने के मूड में है। कांग्रेस का यह चरणबद्ध आंदोलन युवाओं के इस असंतोष को एक संगठित राजनीतिक दिशा प्रदान कर रहा है।

सरकार की बढ़ती मुश्किलें: एक तरफ जहाँ आगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की कवायद चल रही है, वहीं दूसरी ओर युवाओं और छात्रों का सड़क पर उतरना सरकार की साख पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।

बिहार में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा 29 जुलाई से घोषित चरणबद्ध आंदोलन राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। अध्यक्ष राजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अन्याय के खिलाफ युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और पुलिसिया दमन के खिलाफ यह संघर्ष आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनने वाला है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस आंदोलन के दबाव में आकर छात्रों की रिहाई और मांगों पर क्या रुख अपनाता है।