प्रज्ञान सभागार में डीएम अंशुल कुमार ने सुनी आम नागरिकों की फरियाद, जनसुनवाई में आए 27 आवेदन; अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

बिहार के पूर्णिया जिले से प्रशासन और जनता के बीच की दूरियों को मिटाने तथा जनहित से जुड़ी समस्याओं के त्वरित निष्पादन को लेकर एक बेहद सकारात्मक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला मुख्यालय स्थित प्रज्ञान सभागार में आयोजित साप्ताहिक जनता दरबार/जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान पूर्णिया के जिला पदाधिकारी (DM) अंशुल कुमार ने अपनी कुर्सी से उठकर आम नागरिकों की एक-एक समस्या को बड़े ही धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुना। इस जनसुनवाई के दौरान जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहुंचे फरियादियों द्वारा कुल 27 आवेदन दर्ज कराए गए। डीएम अंशुल कुमार ने इन सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी आवेदनों का त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम जनता को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

क्या है जनता दरबार और जनसुनवाई का पूरा स्वरूप?

प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, पूर्णिया जिला प्रशासन द्वारा आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण के लिए नियमित रूप से विशेष जनसुनवाई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसी कड़ी में प्रज्ञान सभागार में आयोजित इस ताज़ा जनसुनवाई में सुबह से ही फरियादियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। समाज के विभिन्न वर्गाें से आए लोगों—जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और किसान शामिल थे—ने अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं से जिला पदाधिकारी को अवगत कराया।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचे और किसी भी नागरिक को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए दर-दर न भटकना पड़े। डीएम अंशुल कुमार ने प्रत्येक आवेदक के पास खुद जाकर या उन्हें सामने बुलाकर उनकी पूरी बात सुनी और मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों से उसका फीडबैक भी लिया।

जनसुनवाई में पहुँचे कुल 27 आवेदन: किन-किन प्रमुख समस्याओं पर हुआ मंथन?

इस जनसुनवाई के दौरान कुल 27 लिखित आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं। मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर फरियादियों ने अपनी बात रखी:

भूमि विवाद और अतिक्रमण: जमीन की पैमाइश, दाखिल-खारिज (Mutation) में विलंब, और सार्वजनिक जमीनों पर अवैध कब्जे से जुड़े मामले सबसे अधिक संख्या में सामने आए।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना: वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन राशि समय पर न मिलने या खाता संख्या में त्रुटि से जुड़ी शिकायतें।

प्रधानमंत्री आवास योजना व राशन कार्ड: आवास सूची में नाम छूटने, अपात्रों के नाम जुड़ने तथा नए राशन कार्ड बनवाने या यूनिट जुड़वाने से संबंधित आवेदन।

आपसी विवाद और पुलिसिया कार्रवाई: कुछ मामलों में स्थानीय स्तर पर पुलिस या प्रशासनिक सहयोग न मिलने और न्याय की गुहार लगाने से जुड़े बिंदु भी रखे गए।

डीएम अंशुल कुमार के कड़े निर्देश: "लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी"

आवेदन प्राप्त होने के बाद जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने सभी मामलों को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद विभिन्न विभागों (जैसे राजस्व, ग्रामीण विकास, समाज कल्याण, और पुलिस विभाग) के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक आवेदन की व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग की जाए।

डीएम ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली या प्रशासनिक सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि:

हर एक आवेदन पर एक निश्चित समय-सीमा (Time Frame) के भीतर कार्रवाई पूरी की जाए।

जिन मामलों का निष्पादन स्थानीय स्तर पर संभव है, उन्हें तुरंत कैंप लगाकर सुलझाया जाए।

झूठी या भ्रामक रिपोर्ट सौंपने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता में जगी उम्मीद, प्रशासनिक प्रणाली में कसावट

जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार द्वारा स्वयं प्रज्ञान सभागार में बैठकर इस प्रकार जनसुनवाई करने और एक-एक फरियादी की समस्या को तल्लीनता से सुनने की शैली की पूरे जिले में सराहना हो रही है। इस पहल से आम जनता के मन में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी आवाज अनसुनी नहीं रहेगी।

प्रशासन के इस संवेदनशील और सक्रिय रवैये के कारण न केवल पेंडिंग मामलों के जल्द निस्तारण की उम्मीद बंध गई है, बल्कि पूर्णिया जिले के प्रशासनिक तंत्र में भी एक सकारात्मक कसावट देखने को मिल रही है। इस प्रकार के जनसुनवाई कार्यक्रम यह साबित करते हैं कि जब जिम्मेदार अधिकारी खुद जनता के बीच आकर उनकी समस्याओं को सुनते हैं, तो लोकतंत्र और शासन व्यवस्था पर आम जनमानस का भरोसा और अधिक मजबूत होता है।