बिहार में भ्रष्ट इंजीनियर पर ईओयू का शिकंजा: दानापुर के पॉश अपार्टमेंट में मिले अरविन्द चौधरी के दो आलीशान फ्लैट; भारी मात्रा में कैश, 500 ग्राम सोना और बेनामी संपत्तियों का खुलासा

बिहार प्रशासनिक और महकमे से एक बार फिर भ्रष्टाचार की एक बड़ी और चौंकाने वाली दास्तान सामने आई है। बिहार के सासाराम में लघु जल संसाधन विभाग (लघु सिंचाई प्रमंडल) में तैनात कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार चौधरी के ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU - Economic Offences Unit) ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। महज 12 वर्षों की सरकारी सेवा में कुबेर का खजाना जुटाने वाले इस इंजीनियर के ठिकानों पर हुई रेड के दौरान जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सबको सन्न कर दिया है।

जांच के दौरान पटना के दानापुर स्थित पॉश अपार्टमेंट कॉलोनियों में अरविन्द चौधरी के दो आलीशान फ्लैट मिले हैं, जिनकी आंतरिक साज-सज्जा और डिजाइनिंग पर अलग से लाखों रुपये खर्च किए गए थे। इन फ्लैटों और उनके अन्य ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी, करीब आधा किलो सोना, जमीन के कागजात और अकूत संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। आइए इस सनसनीखेज भ्रष्टाचार प्रकरण, ईओयू की छापेमारी और बरामद संपत्तियों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।

पृष्ठभूमि: कैसे रडार पर आए कार्यपालक अभियंता अरविन्द चौधरी?

मूल रूप से बिहार के बांका जिले के रजौन थाना क्षेत्र अंतर्गत पीपराडीह गांव के रहने वाले अरविन्द कुमार चौधरी ने मार्च 2014 में सहायक अभियंता (असैनिक) के रूप में अपनी सरकारी सेवा की शुरुआत की थी।

लंबे समय से मिल रही थीं शिकायतें: अपनी सेवाकाल के दौरान औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, नवादा, किशनगंज और पटना जैसे विभिन्न जिलों में पदस्थापित रहने के बाद वर्तमान में वे सासाराम में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे। उनकी कार्यशैली और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की मिल रही लगातार शिकायतों के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने गोपनीय तरीके से उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस: प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि इस इंजीनियर ने अपनी वैध और ज्ञात आय से 85.05 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित कर रखी है। इसके बाद ईओयू ने विशेष न्यायालय (निगरानी) से वारंट प्राप्त कर पटना, दानापुर, सासाराम, डेहरी-ऑन-सोन, मुजफ्फरपुर और बांका सहित कुल छह ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

दानापुर के पॉश इलाकों में मिले दो आलीशान फ्लैट और उनकी भव्य सजावट

ईओयू की टीम ने जब पटना के दानापुर क्षेत्र में दबिश दी, तो वहां इंजीनियर अरविन्द चौधरी की संपत्ति देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच में मुख्य रूप से दो बड़े ठिकानों का पता चला:

वीनस पैराडाइज अपार्टमेंट (आदमपुर): इस पॉश अपार्टमेंट कॉलोनी में फ्लैट संख्या 405 उनके नाम पर या उनके करीबियों के जरिए खरीदा गया था।

वीनस इम्पायर अपार्टमेंट (आशोपुर): दानापुर के ही आशोपुर स्थित इस दूसरे प्रतिष्ठित अपार्टमेंट में फ्लैट संख्या 1301 भी इन्हीं का निकला।

इन दोनों ही आलीशान फ्लैटों की बनावट और आंतरिक साज-सज्जा (Interior Decoration) पर अलग से लाखों रुपये खर्च किए गए थे। महंगे फर्नीचर, आधुनिक फिक्सचर्स और लग्जरी लाइफस्टाइल से जुड़े सामानों को देखकर यह साफ जाहिर होता है कि इन फ्लैटों को बेहद शान-शौकत के साथ तैयार किया गया था। जांच एजेंसी अब इन फ्लैटों की वास्तविक खरीद कीमत के साथ-साथ इनकी साज-सज्जा पर खर्च किए गए एक-एक पाई का हिसाब लगा रही है।

छापेमारी में क्या-क्या हुआ बरामद? (कुबेर का खजाना)

गुरुवार को दिनभर चली इस मैराथन छापेमारी के दौरान ईओयू की टीम को भारी मात्रा में चल और अचल संपत्ति के दस्तावेज हाथ लगे हैं:

नकद और सोना: तलाशी के दौरान लगभग 9 लाख रुपये नकद और करीब 75 लाख रुपये मूल्य का 500 ग्राम (आधा किलो) सोना व स्वर्ण आभूषण बरामद किए गए हैं।

बैंक खाते और एफडी (FD): इंजीनियर और उनके परिजनों के नाम पर कुल 21 बैंक खातों का पता चला है, जिनमें जमा करीब 25 लाख रुपये की राशि को ईओयू ने फ्रीज करवा दिया है।

जमीन और फ्लैट के कागजात: पटना, दानापुर और भागलपुर समेत कई अन्य जगहों पर जमीन तथा फ्लैट खरीदने से जुड़े भारी मात्रा में रजिस्ट्री के कागजात मिले हैं। इसके अलावा एलआईसी (LIC) और अन्य बीमा कंपनियों की 17 पॉलिसियों में भारी निवेश के दस्तावेज भी हाथ लगे हैं।

दिलचस्प पहलू: सास के खाते में ली जाती थी रिश्वत की रकम!

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और दिलचस्प खुलासा यह हुआ है कि कार्यपालक अभियंता अरविन्द चौधरी भ्रष्टाचार और कमीशन के जरिए आने वाले काले धन को ठिकाने लगाने के लिए अजीबोगरीब तरकीब अपनाते थे। जांच में यह बात सामने आई है कि रिश्वत की बड़ी रकम सीधे उनकी सास (मीरा जायसवाल) के बैंक खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी, ताकि एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके। जांच एजेंसी अब उनकी पत्नी मेहा रानी और अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम पर बनाई गई संपत्तियों की भी गहराई से वित्तीय पड़ताल कर रही है।

मात्र 12 साल की छोटी सी सेवा अवधि में एक सरकारी इंजीनियर द्वारा अकूत संपत्ति खड़ी कर लेना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि किस प्रकार कुछ भ्रष्ट अधिकारी व्यवस्था को खोखला कर रहे हैं। दानापुर के पॉश अपार्टमेंट में मिले दो आलीशान फ्लैट, लाखों की सजावट, आधा किलो सोना और बेनामी संपत्तियों का यह मामला बिहार के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। ईओयू अब बैंक लॉकरों को खंगालने और आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है, जिससे इस काली कमाई के और भी कई बड़े राज से पर्दा उठने की उम्मीद है।