फरका में गंगा का रौद्र रूप, सूर्य नारायण सिंह खेल मैदान और विद्यालय के पास कटाव से मचा हड़कंप; 25 से अधिक घर खतरे की जद में
कहलगांव (भागलपुर): भागलपुर जिले के कहलगांव अनुमंडल अंतर्गत फरका पंचायत में गंगा नदी ने अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले कुछ दिनों से जलस्तर में हो रही वृद्धि के साथ ही गंगा का कटाव (Erosion) तेज हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है। फरका स्थित प्रसिद्ध 'सूर्य नारायण सिंह खेल मैदान' और 'घोषपुर फरका राजकीय मध्य विद्यालय' के समीप कटाव इतना तीव्र हो गया है कि अब ये महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल और आसपास की रिहायशी बस्तियां गंगा के आगोश में समाने को तत्पर दिख रही हैं।
कटाव का केंद्र: खेल मैदान और विद्यालय पर संकट
फरका पंचायत का यह इलाका स्थानीय लोगों के लिए केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक पहचान है। सूर्य नारायण सिंह खेल मैदान, जहाँ स्थानीय युवा अपने सपनों को उड़ान देते हैं, और घोषपुर फरका राजकीय मध्य विद्यालय, जहाँ सैकड़ों बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं, आज गंगा की धारा के ठीक मुहाने पर खड़े हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गंगा की लहरें अब सीधे मिट्टी को काटकर विद्यालय के प्रांगण और खेल मैदान की सीमा की ओर बढ़ रही हैं। यदि कटाव का यही वेग बरकरार रहा, तो आने वाले कुछ ही दिनों में ये सरकारी संपत्तियां पूरी तरह से नदी में विलीन हो सकती हैं।
25 से अधिक घरों पर मंडरा रहा खतरा
इस कटाव ने न केवल सरकारी संपत्तियों को अपनी चपेट में लिया है, बल्कि स्थानीय निवासियों की नींद भी हराम कर दी है। कटाव स्थल के समीप बसे 25 से अधिक परिवार इस समय अत्यंत डरे हुए हैं। कई लोगों ने अपने घर के सामानों को समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना शुरू कर दिया है।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि "रात के सन्नाटे में गंगा के कटने की आवाजें सुनाई देती हैं, जो हमें यह एहसास कराती हैं कि सुबह शायद हमारा घर हमारे साथ न हो।" पशुधन और खेती योग्य भूमि के साथ-साथ अब घर भी गंगा के पेट में समाने का डर इन लोगों को रात भर सोने नहीं दे रहा है।
मुखिया की प्रशासन से गुहार: 'समय रहते हो बचाव कार्य'
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फरका पंचायत के मुखिया ने जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से अविलंब बचाव कार्य शुरू करने की पुरजोर मांग की है। मुखिया का कहना है कि:
तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता: यदि अगले 48 घंटों के भीतर कटाव निरोधी कार्य (Erosion Control Work) शुरू नहीं किया गया, तो नुकसान की भरपाई करना असंभव हो जाएगा।
प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता: मुखिया ने आरोप लगाया कि हर साल गंगा के कटाव की चेतावनी दी जाती है, लेकिन प्रशासन तब तक सक्रिय नहीं होता जब तक कोई बड़ी आपदा न घट जाए।
स्थायी समाधान: उन्होंने कटाव प्रभावित क्षेत्रों में जिओ-बैग (Geo-bags) डालने और बोल्डर पिचिंग (Boulder Pitching) जैसे ठोस कार्यों को जल्द पूरा करने का आग्रह किया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति
खबर लिखे जाने तक, स्थानीय प्रशासन की एक टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया है। कहलगांव अंचल कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, कटाव की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग को भी सूचित कर दिया गया है ताकि समय रहते प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थलों (Shelter Homes) की व्यवस्था की जा सके।
गंगा का कटाव: एक वार्षिक समस्या
बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव, पीरपैंती और नवगछिया जैसे इलाकों में गंगा का कटाव एक वार्षिक त्रासदी बन चुका है। मानसून के दौरान जब गंगा उफान पर होती है, तो यह अपनी धारा बदल लेती है। वैज्ञानिक रूप से देखें तो मिट्टी की बनावट और नदी के घुमाव (Meandering) के कारण इन क्षेत्रों में कटाव का खतरा हमेशा बना रहता है। हालांकि, इसे रोकने के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन फिर भी कटाव की समस्या का कोई दीर्घकालिक (Permanent) समाधान नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों में आक्रोश और डर
ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल एक खेल के मैदान या एक विद्यालय को नहीं खो रहे हैं, बल्कि अपनी पूरी जीवनभर की कमाई और यादों को खो रहे हैं। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि पिछले एक दशक में गंगा ने दर्जनों घरों और सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को अपने आगोश में ले लिया है, जिससे लोग आर्थिक रूप से भी पूरी तरह टूट गए हैं।
प्रशासन के कड़े इम्तिहान की घड़ी
फरका में गंगा का कटाव अब एक आपदा का रूप ले चुका है। यह स्थिति जिला प्रशासन के लिए एक कड़ी परीक्षा की तरह है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या जल संसाधन विभाग पत्थर के बोल्डर और बालू भरी बोरियों के साथ समय रहते मौके पर पहुंचता है, या फिर यह खेल का मैदान और राजकीय मध्य विद्यालय भी इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएंगे।
स्थानीय लोग अभी भी उम्मीद की किरण लिए बैठे हैं कि प्रशासन उनके आशियानों और उनके बच्चों के भविष्य (विद्यालय) को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू करेगा।