गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलें जल्द होंगी शुरू, नल-जल योजना की जिम्मेदारी वार्ड सदस्यों को देने पर भी सरकार करेगी विचार
पटना:बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के औद्योगिक विकास और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से जुड़े दो महत्वपूर्ण मुद्दों पर बड़े संकेत दिए। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि लंबे समय से बंद पड़ी गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की एक संस्था के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) किया जाएगा और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होते ही तीनों चीनी मिलों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
इसी के साथ मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नल-जल योजना के रखरखाव की जिम्मेदारी दोबारा वार्ड सदस्यों को सौंपने की मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पंचायती राज विभाग और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के साथ संयुक्त बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विधान परिषद में उठा चीनी मिलों का मुद्दा
मंगलवार को विधान परिषद में सदस्य शशि यादव द्वारा पूछे गए अल्पसूचित प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने बताया कि गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलों को फिर से चालू करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की संबंधित संस्था के साथ समझौता किया जाएगा, जिससे तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन संबंधी सहयोग प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही इन चीनी मिलों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी मिलों के पुनः संचालन से गन्ना किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।
वर्तमान में कई किसान अपनी उपज को दूर-दराज के जिलों या अन्य राज्यों की चीनी मिलों तक पहुंचाने के लिए मजबूर होते हैं। यदि स्थानीय स्तर पर मिलें चालू हो जाती हैं, तो किसानों का परिवहन खर्च कम होगा और उन्हें समय पर भुगतान मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
इसके अलावा हजारों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
औद्योगिक विकास को मिलेगी नई गति
राज्य सरकार का मानना है कि बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों को पुनर्जीवित करना बिहार के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा।
चीनी मिलों के संचालन से केवल चीनी उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि गुड़, शीरा (मोलासेस), एथेनॉल और अन्य सह-उत्पादों के उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।
नल-जल योजना पर सदन में हुई चर्चा
विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान हर घर नल का जल योजना के रखरखाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने मांग की कि योजना के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी फिर से वार्ड सदस्यों को दी जाए।
सदस्यों का तर्क था कि स्थानीय वार्ड सदस्य अपने क्षेत्र की समस्याओं, पाइपलाइन नेटवर्क और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझते हैं। यदि यह जिम्मेदारी किसी बाहरी एजेंसी या व्यक्ति को दी जाती है, तो स्थानीय स्तर की समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से नहीं हो पाएगा।
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उठे सवाल
सदन में चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि नल-जल योजना के रखरखाव पर हर वर्ष लगभग सवा दो सौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
इसके बावजूद कई क्षेत्रों में जलापूर्ति, पाइपलाइन मरम्मत और मोटर संचालन जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं।
ऐसे में स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने से योजना के बेहतर संचालन की संभावना जताई गई।
जदयू सदस्य ने भी रखा सुझाव
जदयू के विधान पार्षद दिनेश प्रसाद सिंह ने भी वार्ड सदस्यों को योजना की जिम्मेदारी सौंपने का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि वार्ड सदस्य जनता के सबसे निकट होते हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान अधिक तेजी से कर सकते हैं।
पीएचईडी मंत्री ने दी जानकारी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के मंत्री संजय कुमार सिंह ने सदन को वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी और बताया कि विभाग योजना के रखरखाव को प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी ग्रामीण परिवारों तक नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने दिया विचार का आश्वासन
सदन में विभिन्न सदस्यों की राय सुनने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार इस मांग पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।
उन्होंने बताया कि पंचायती राज विभाग और पीएचईडी विभाग के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
बैठक में सभी व्यावहारिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
जनहित को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर पेयजल व्यवस्था और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करना है।
यदि वार्ड सदस्यों को जिम्मेदारी सौंपने से व्यवस्था अधिक प्रभावी होती है, तो सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष में बनी सहमति
इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकांश सदस्यों की राय लगभग समान रही।
दोनों पक्षों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
इसे ग्रामीण विकास और जनभागीदारी की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बिहार विधान परिषद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा गोपालगंज, सकरी और रैयाम चीनी मिलों को जल्द शुरू करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वहीं हर घर नल का जल योजना के रखरखाव की जिम्मेदारी वार्ड सदस्यों को सौंपने की मांग पर सरकार द्वारा गंभीरता से विचार करने का आश्वासन भी ग्रामीण प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि दोनों पहल समयबद्ध तरीके से लागू होती हैं, तो इससे किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों, स्थानीय रोजगार और बुनियादी सेवाओं को व्यापक लाभ मिलने की उम्मीद है।